कुंभमेले के नाम पर सरकार का बड़ा भ्रष्टाचार, 36 हजार करोड़ के फंड में मलाई: हर्षवर्धन सपकाल का गंभीर आरोप
कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल का आरोप है कि नाशिक के कुंभमेले के 36 हजार करोड़ रुपये के फंड में से 50 फीसदी की मलाई खाई जा रही है।
कांग्रेस के प्रदेशाध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने नाशिक के कुंभमेले को लेकर फडणवीस सरकार पर गंभीर आरोप लगाया है। उनका कहना है कि कुंभमेले के नाम पर भ्रष्टाचार हो रहा है और 36 हजार करोड़ रुपये के फंड में से 50 फीसदी की मलाई खाई जा रही है।
सपकाल के मुताबिक महायुति सरकार ने नाशिक के कुंभमेले के लिए 36 हजार करोड़ रुपये मंजूर किए हैं। सरकार का दावा है कि इससे विकास के काम हो रहे हैं, पर असल में ज्यादा से ज्यादा मलाई खाई जा रही है। 22 करोड़ रुपये मंडप पर, 3 करोड़ रुपये हेलिपैड पर और 350 करोड़ रुपये सीसीटीवी पर खर्च हो रहे हैं। उनका आरोप है कि विकास के नाम पर सोच समझकर भ्रष्टाचार किया जा रहा है।
उत्तर महाराष्ट्र विभाग के लोकसभा प्रभारी, विधानसभा प्रभारी, जिला प्रभारी और जिलाध्यक्षों की समीक्षा बैठक प्रभारी डॉ. सिरिवेल्ला प्रसाद और सपकाल की मुख्य मौजूदगी में हुई। CWC सदस्य बालासाहेब थोरात और सांसद शोभा बच्छाव समेत कई नेता मौजूद थे। नाशिक में महाराष्ट्र के सभी जिलाध्यक्षों का एक शिविर हुआ था, जिसमें नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने मार्गदर्शन किया था। उसी एजेंडे की समीक्षा इस बैठक में की गई।
मीडिया से बातचीत में सपकाल ने कहा कि समुद्रमंथन के बाद जब अमृत का कुंभ निकला, तो उसकी बूंदें धरती पर जिन चार जगहों पर गिरीं, नाशिक उनमें से एक है, जहां हर 12 साल में कुंभमेला होता है। उन्होंने कहा कि देवेंद्र फडणवीस की सरकार इसी कुंभमेले के नाम पर भ्रष्टाचार का जहर बो रही है और उसके फल उसे चखने पड़ेंगे। नाशिक में अब तक कोई भी काम पूरा नहीं हुआ है, नाशिक के लोग परेशान हैं और बोगस वर्क ऑर्डर निकाले जा रहे हैं। फडणवीस ने भ्रष्टाचार के लिए एक मंत्री को नियुक्त किया है। सपकाल ने कहा कि भाजपा-महायुति सरकार ने भ्रष्टाचार के लिए पवित्र कुंभमेले को भी नहीं छोड़ा।
वरिष्ठ नेता बालासाहेब थोरात ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी सत्ता पाने के लिए किसी भी स्तर तक जा रही है। लोकसभा और विधानसभा चुनाव में सत्ता के लिए जो किया गया, वही अब सहकार क्षेत्र में भी किया जा रहा है।
थोरात ने गोकुल के चुनाव का उदाहरण दिया। सतेज उर्फ बंटी पाटील के पैनल को साफ बहुमत था, फिर भी कोरम का मुद्दा आगे करके अध्यक्ष का चुनाव नहीं होने दिया गया। जिसके पास बहुमत हो, अध्यक्ष चुनने का हक उसी का होता है। सरकार को कोरम का नियम बदलना चाहिए, पर वह नया कानून बनाकर पिछले दरवाजे से गोकुल की सत्ता हथिया रही है।
थोरात के मुताबिक सरकार ने 4 सदस्य सरकार की तरफ से नियुक्त करने का बहुत गलत तरीका शुरू किया है, और यह कानून सहकार क्षेत्र की सभी संस्थाओं पर लागू होगा। भाजपा-महायुति सरकार पूरे सहकार क्षेत्र को ही खत्म करने निकल पड़ी है। उन्होंने कहा कि इस पाप का भागी मुख्यमंत्री को नहीं बनना चाहिए।
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