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कोजागिरी की रात महाराष्ट्र में दूध की बिक्री कई गुना, मसाला दूध और ऊंचे दाम

कोजागिरी पूर्णिमा पर महाराष्ट्र में दूध की मांग अचानक बढ़ जाती है। कोल्हापुर, छत्रपति संभाजीनगर और नासिक में 2025 की बिक्री के आंकड़े और दामों का हाल।

कोजागिरी की रात महाराष्ट्र में दूध की बिक्री कई गुना, मसाला दूध और ऊंचे दाम तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं

आम दिनों में महाराष्ट्र के ज्यादातर घरों में आधा या एक लीटर दूध से काम चल जाता है। इसी से दिन भर की चाय जैसी बुनियादी जरूरतें पूरी हो जाती हैं। लेकिन कोजागिरी पूर्णिमा के दिन तस्वीर बदल जाती है और दूध की खपत में अचानक बड़ा उछाल आ जाता है।

अश्विन माह के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा, यानी शरद पूर्णिमा, को महाराष्ट्र में कोजागिरी पूर्णिमा के नाम से बड़ी धूमधाम से मनाया जाता है। इस दिन राज्य के लगभग हर घर में बड़े-बड़े बर्तनों में भारी मात्रा में दूध उबाला जाता है।

कोजागिरी की रात दूध सिर्फ उबाला नहीं जाता। उसमें काजू, बादाम, पिस्ता, चिरौंजी, इलायची, दालचीनी और केसर डालकर स्वादिष्ट मसाला दूध बनाया जाता है। फिर रात में इस मसाला दूध को खुले आसमान के नीचे चंद्रमा की रोशनी में रखा जाता है।

धार्मिक और आयुर्वेदिक मान्यता है कि शरद पूर्णिमा की रात चंद्रमा पृथ्वी के सबसे नजदीक होता है और उसकी किरणों से सेहत बढ़ाने वाले, अमृत जैसे गुण बरसते हैं। माना जाता है कि चांदनी में रखने से दूध में ये औषधीय गुण आ जाते हैं और इसे पीना सेहत के लिए बहुत फायदेमंद होता है।

पौराणिक मान्यता के अनुसार इसी दिन समुद्र मंथन से देवी लक्ष्मी प्रकट हुई थीं। इसलिए इस रात लक्ष्मी पूजन और रात भर जागने का विधान है। साथ ही शरद ऋतु के आने और बदलते मौसम में शरीर को ताकत, कैल्शियम और गर्मी देने के लिए मसाला दूध पीने की यह पुरानी परंपरा चली आ रही है।

इस दिन पूरे महाराष्ट्र में दूध की मांग कई गुना हो जाती है। हाउसिंग सोसायटियों, सार्वजनिक मंडलों, युवाओं के समूहों और होटल की महफिलों में दूध उबालने के बड़े कार्यक्रम होते हैं।

कोल्हापुर जिला सहकारी दूध उत्पादक संघ (गोकुल) ने 2025 में कोजागिरी पूर्णिमा पर 20 लाख 28 हजार 526 लीटर दूध की रिकॉर्ड बिक्री दर्ज की। यह 2024 के मुकाबले 1.63 लाख लीटर से भी ज्यादा है।

छत्रपति संभाजीनगर में 2025 में एक ही दिन में करीब 4 लाख लीटर दूध बिका। वहां रोज की बिक्री 2.5 लाख लीटर रहती है, यानी 2 लाख लीटर का अतिरिक्त उछाल आया। वहां लगभग 2 करोड़ रुपये के दूध और 15 लाख रुपये के दूध मसाले (300-350 किलो) का कारोबार हुआ था।

नासिक शहर में 2025 में कोजागिरी के कारण दूध की रोजाना मांग 10 हजार लीटर से ज्यादा बढ़ी और कुल बिक्री 8 लाख लीटर तक पहुंच गई थी।

अचानक बढ़ी मांग और त्योहारों के सीजन में मिठाई बनाने वालों की अतिरिक्त खरीदारी की वजह से हर साल इस दिन दूध के दाम तेजी से चढ़ते हैं। नासिक जिले में दूध की कीमत में प्रति लीटर 40 से 50 रुपये तक का उछाल आता है। आम दिनों में 80 रुपये लीटर मिलने वाला भैंस का दूध 120 रुपये प्रति लीटर तक बिकता है, जबकि गाय का दूध 45 रुपये से बढ़कर 60 रुपये प्रति लीटर तक पहुंच जाता है।

भिवंडी और नासिक के स्थानीय खुदरा बाजारों में पिछले साल खुले दूध के दाम 100 रुपये प्रति लीटर के पार चले गए थे। दूध मसाले का भाव थोक में 3,300 रुपये प्रति किलो और खुदरा में 3,700 से 3,800 रुपये प्रति किलो दर्ज किया गया था।

इस तरह कोजागिरी पूर्णिमा महाराष्ट्र में आस्था, सेहत की परंपरा और डेयरी कारोबार के बड़े आर्थिक लेन-देन का अनोखा मेल बन जाती है।

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