गुरूवार, 5 नवंबर 2026

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Khetwadi Ganraj: मुंबई के खेतवाडी गणराज का इतिहास क्या है? जानिए बाप्पा की रोचक कहानी

Khetwadi Ganraj: मुंबई के खेतवाडी गणराज का इतिहास क्या है? जानिए बाप्पा की रोचक कहानी तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं
कल्चर PT24 टीम

गिरगाव की १२ वीं गल्ली में विराजने वाले खेतवाडी के गणराज का इतिहास, स्थापना का साल और मूर्ति की खासियत जानिए।

मुंबई के गिरगाव और खेतवाडी इलाके में गणपति बाप्पा की बात ही अलग है। इसी इलाके का खेतवाडी गणराज मुंबई के सबसे मशहूर, पुराने और भव्य गणेश मंडलों में गिना जाता है। गिरगाव की १२ वीं गल्ली में विराजने वाले इस बाप्पा की मूर्ति और उसकी कलाकारी सिर्फ मुंबई या महाराष्ट्र में ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया में जानी जाती है।

बहुत कम लोगों को इस मंडल का असली इतिहास पता है। "१२ वीं खेतवाडी सार्वजनिक गणेशोत्सव मंडल" ने इस परंपरा की शुरुआत आधिकारिक तौर पर सन १९५२ में की थी, यानी यह उत्सव अब सात दशकों से भी ज्यादा पुराना है। हालांकि कुछ रिकॉर्ड्स के मुताबिक मंडल का मौजूदा स्वरूप १९५९ से चला आ रहा है, यानी शुरुआती सालों में मंडल का रूप कुछ और रहा होगा और बाद में उसमें बदलाव हुआ। यह सिर्फ एक उत्सव नहीं, बल्कि यहां के स्थानीय लोगों की गहरी और अटूट श्रद्धा और सामूहिक एकता का प्रतीक माना जाता है।

इतिहास में सबसे ऊंची मूर्ति बनाने का रिकॉर्ड भी खेतवाडी गणराज के नाम है। मंडल को असली पहचान और वर्ल्डवाइड फेम साल २००० में मिली, जब उन्होंने ४० फुट ऊंची मूर्ति बनाकर भारतीय इतिहास की सबसे ऊंची गणेश मूर्ति का रिकॉर्ड बनाया था। इस एक कारनामे ने खेतवाडी के गणराज को बाकी मंडलों से अलग खड़ा कर दिया और उसे एक अलग पहचान दे दी।

यह सिर्फ एक गणेश मंडल भर नहीं है, बल्कि गहरी भक्ति, संस्कृति और सामूहिक समर्पण की मिसाल है। हर साल बाप्पा को एक नए और अलग अंदाज में पेश किया जाता है, ताकि हर बार दर्शन करने वालों को कुछ नया देखने को मिले। कभी बाप्पा को शेषनाग पर बैठे दिखाया जाता है, तो कभी मंडप और मूर्ति की सजावट अयोध्या के राम मंदिर जैसी किसी भारतीय ऐतिहासिक थीम पर आधारित होती है, तो कभी रोमन कल्चर जैसी किसी ग्लोबल और ऐतिहासिक थीम को चुना जाता है।

बाप्पा की भव्य मूर्ति को असली सोने के भारी गहनों और कीमती हीरों से बड़े ही खूबसूरत ढंग से सजाया जाता है, जिससे मूर्ति की भव्यता और बढ़ जाती है। खेतवाडी में पहली गल्ली से लेकर १४ वीं गल्ली तक अलग-अलग जगहों पर गणपति स्थापित होते हैं और पूरा इलाका ही बाप्पा का गढ़ माना जाता है। फिर भी यह कहना गलत नहीं होगा कि इन सबके बीच १२ वें रास्ते पर विराजने वाला "खेतवाडी का गणराज" सबसे ज्यादा ध्यान खींचता है और भक्तों की भीड़ को अपनी ओर आकर्षित करता है।

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