कलर्स मराठी की 'आई तुळजाभवानी' में उर्वी की एंट्री, 8 नवंबर को दिखेगा देवी का नया रूप
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कलर्स मराठी की मालिका 'आई तुळजाभवानी' में अभिनेत्री उर्वी पाध्ये देवी की भूमिका में नजर आएंगी। दीपावली के मौके पर रविवार 8 नवंबर के एपिसोड में देवी का मूल दैवी अवतार प्रकट होगा।
मुंबई : कलर्स मराठी के धारावाहिक 'आई तुलजाभवानी' में अब कहानी एक बड़े मोड़ पर पहुंच गई है। इसमें महिषासुर और उसकी पत्नी शुंभा ने चातुर्मास की पोथी कपट से अपने कब्जे में ले ली है और धर्म का राज खत्म करने के लिए नई साजिश रची है।
लोगों के मन से भक्ति मिटाने के लिए यह झूठी अफवाह फैलाई जा रही है कि चातुर्मास खत्म हो गया। महिषासुर के अंश से पैदा हुए मल्लासुर ने सृष्टि में हाहाकार मचा रखा है। महिषासुर और दैत्यगुरु शुक्राचार्य की रची यह मल्लासुर वाली चाल अब ऐसी जगह आ पहुंची है, जहां धर्म की रक्षा के लिए खुद आदिशक्ति को दैवी तत्व को ताकत देने के लिए आगे आना पड़ा है।
बाल रूप की तुलजा के साथ चल रही लड़ाई के बीच मल्लासुर दावा करता है कि दैवी सामर्थ्य खत्म हो गया और जीत का जश्न मनाने लगता है। ठीक उसी घड़ी आदिशक्ति के मार्गदर्शन के मुताबिक महादेव, विष्णु और ब्रह्मदेव अपने-अपने दिव्य अंश बाल रूप की तुलजाई को सौंप देते हैं। तीनों देवों की शक्तियां मिलते ही आग के प्रचंड तूफान के बीच से अष्टभुजा महाशक्ति के रूप में देवी तुलजाभवानी का भव्य मूल दैवी अवतार प्रकट होता है।
सुनहरी अग्निज्वालाओं की पृष्ठभूमि में बना देवी का यह भव्य रूप दर्शकों के लिए अद्भुत दृश्य अनुभव होगा। खास बात यह है कि दीपावली के शुभ मुहूर्त पर, आने वाले रविवार 8 नवंबर के एपिसोड में यह दिव्य रूप देखने को मिलेगा।
आदिशक्ति की पहल से सामने आई यह महाशक्ति स्वरूपिणी दैवीलीला आसुरी प्रवृत्ति के संहार का निर्णायक दौर शुरू करने वाली है। बताया गया है कि आने वाला हर एपिसोड देखने लायक है। देवी के भक्तों के लिए ये रोज अनुभव करने जैसे दैवी अनुभूति के अनमोल पल हैं। पौराणिक भव्यता और आधुनिक एआई तकनीक के अनोखे मेल की वजह से यह धारावाहिक इन दिनों खास लोकप्रिय हो रहा है।
इस नए दैवी रूप और भूमिका के बारे में अभिनेत्री उर्वी पाध्ये ने कहा, "हर कलाकार का सपना होता है कि वह मुख्य भूमिका निभाए। अपने पहले ही धारावाहिक में मुझे माँ तुलजाभवानी का किरदार मिलना मैं देवी की सबसे बड़ी कृपा मानती हूं। यह पौराणिक धारावाहिक है, इसलिए भाषा का भारीपन और आवाज की दृढ़ता बनाए रखने के लिए खास रियाज, स्क्रिप्ट रीडिंग और निर्देशकों का मार्गदर्शन मेरे लिए बहुत काम आया। किरदार के लिए पौराणिक अध्ययन और युद्ध के दृश्यों के लिए शारीरिक व मानसिक तैयारी करते समय शुरू में दबाव महसूस हुआ, पर उस पर काबू पाकर मैं सीखती गई। सेट पर मेरी पहली एंट्री शूट होते वक्त चारों तरफ 'माँ राजा की जय जय' का जयकारा था और बदन पर फूलों की पंखुड़ियां गिर रही थीं। वह पल बेहद भावुक करने वाला था, जिससे मुझे एक अद्भुत सकारात्मक ऊर्जा का एहसास हुआ।"
उर्वी ने आगे कहा, "तुलजाभवानी की ममता और अन्याय के खिलाफ लड़ने वाला रौद्र रूप, ये दोनों पहलू मुझे बहुत पसंद आए। मेरा स्वभाव मूल रूप से शांत है, इसलिए उनका रौद्र रूप निभाना मेरे लिए अलग चुनौती थी। मॉनिटर पर खुद को देवी के रूप में देखा तो मेरी आंखें भर आईं और गहरा एहसास हुआ कि देवी मेरे साथ हैं। कोल्हापुर की महालक्ष्मी हमारी कुलस्वामिनी हैं। माँ महालक्ष्मी और माँ तुलजाभवानी के प्रति मेरे मन में अपार श्रद्धा है। देवी के आशीर्वाद से ही मैं आज यहां तक पहुंची हूं। अभी तक मुझे तुलजापुर जाकर माँ तुलजाभवानी के दर्शन का मौका नहीं मिला, पर दिल से चाहती हूं कि यह जल्दी हो। शूटिंग की शुरुआत में ही हुए दिव्य अनुभवों से मेरी श्रद्धा और भक्ति और पक्की हो गई है।"
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