खर्च तीन गुना से ऊपर गया तो महाराष्ट्र में कैबिनेट की मंजूरी जरूरी, मंजूरी के नियम बदले
तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं
महाराष्ट्र सरकार ने विकास कामों को प्रशासनिक मंजूरी देने के नियम बदल दिए हैं। नियोजन विभाग के नए सरकारी आदेश में खर्च और आर्थिक दायित्व की सख्त जांच तय की गई है।
महाराष्ट्र सरकार ने राज्य के विकास कार्यों को प्रशासनिक मंजूरी देने का तरीका बदल दिया है। नियोजन विभाग ने 30 अक्टूबर 2026 को इस बारे में सरकारी आदेश जारी किया है। इसके तहत सुधारे हुए दिशानिर्देश लागू किए गए हैं।
ये दिशानिर्देश कई तरह के इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट पर लागू होंगे। इनमें सड़क, हाईवे, पुल, रेलवे, एयरपोर्ट और बांध आते हैं। पानी की सप्लाई की योजनाएं, जलाशय, सीवरेज प्रोजेक्ट और सरकारी इमारतों का निर्माण भी इस फैसले में शामिल है।
मंजूरी का स्तर अब दो बातों को देखकर तय होगा। पहली बात संबंधित लेखा मद के तहत पिछले तीन आर्थिक वर्षों में हुआ असल खर्च है। दूसरी बात प्रस्तावित कामों से बनने वाला कुल आर्थिक दायित्व है।
इससे पहले 5 जून 2026 को जो नियम लागू किए गए थे, उन्हीं में अब नया बदलाव किया गया है। सरकार के ध्यान में आया था कि संबंधित लेखा मद के तहत पिछले तीन साल के औसत खर्च के मुकाबले पहले से बनी आर्थिक प्रतिबद्धता और नए प्रस्तावित कामों का खर्च काफी बढ़ रहा है। इसलिए ऐसे प्रस्तावों की ऊंचे स्तर पर छानबीन करके ही फैसला लेना जरूरी बताया गया है।
नए प्रावधान के मुताबिक एक शर्त तय की गई है। अगर मौजूदा दायित्व और नए प्रस्ताव की मिलाकर बनी कीमत पिछले तीन साल के औसत असल खर्च की तीन गुना सीमा से ज्यादा हो जाती है, तो संबंधित प्रशासनिक विभाग को मंत्रिमंडल या मंत्रिमंडल इन्फ्रास्ट्रक्चर समिति की मंजूरी लेनी ही होगी।
प्रस्ताव के साथ अब पूरा ब्योरा भी देना होगा। प्रशासनिक मान्यता के लिए प्रस्ताव भेजते वक्त विभाग को पिछले तीन आर्थिक वर्षों का औसत असल खर्च बताना होगा। मौजूदा आर्थिक दायित्व, प्रस्तावित नए कामों का खर्च और मंजूर हो चुके और चल रहे प्रोजेक्ट पर हो रहा खर्च भी बताना जरूरी किया गया है। अधूरे कामों को पूरा करने के लिए कितना फंड चाहिए, यह जानकारी भी देनी होगी।
इसके अलावा प्रोजेक्ट पूरा होने में जो देरी हुई, उसके कारण और खर्च में आई बढ़ोतरी का विस्तृत विश्लेषण भी प्रस्ताव के साथ पेश करना पड़ेगा।
संशोधित प्रशासनिक मंजूरी के मामलों में वित्त विभाग की 2 जून 2026 की सूचनाओं का पालन करने के निर्देश भी दिए गए हैं। सरकार ने यह भी कहा है कि विकास कार्यों के सारे प्रस्ताव 'विकसित महाराष्ट्र-2047' विजन दस्तावेज़ के लक्ष्यों और प्रावधानों से मेल खाने चाहिए।
इस फैसले के बाद बड़े खर्च वाले विकास प्रोजेक्ट को प्रशासनिक मंजूरी देने से पहले पैसों से जुड़ी बातों की ज्यादा बारीकी से जांच होगी। प्रोजेक्ट का बढ़ता खर्च, कामों में होने वाली देरी और उसके पीछे की वजहों पर संबंधित विभागों को पूरी जानकारी के साथ सफाई देनी होगी।
कमेंट
अभी कोई कमेंट नहीं। पहले आप लिखिए।