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कंपनी के लिए सही एचआरएमएस कैसे चुनें, दस बातें जो पहले परखनी चाहिए

एचआरएमएस का फैसला कंपनी के बड़े फैसलों में गिना जाता है। फीचर की लंबी लिस्ट से ज्यादा जरूरी है कि सॉफ्टवेयर आज की और अगले पांच साल की जरूरत पर फिट बैठे।

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किसी भी कंपनी के लिए ह्यूमन रिसोर्स मैनेजमेंट सिस्टम यानी एचआरएमएस चुनना सबसे अहम फैसलों में से एक है। इसे कंपनी का हर कर्मचारी इस्तेमाल करता है, हर महीने वक्त पर पेमेंट इसी से होता है और स्थानीय श्रम कानूनों का पालन भी इसी के सहारे चलता है।

गलत सॉफ्टवेयर खरीद लिया जाए तो दिक्कतें चुपचाप बढ़ती हैं। कर्मचारी नए प्रोग्राम की जगह अपना डेटा एक्सेल शीट में लिखने लगते हैं, मैनेजर पोर्टल पर जानकारी अपडेट करना छोड़ देते हैं और एचआर विभाग को पहले से दोगुना कागजी काम करना पड़ता है।

एचआरएमएस चुनने का सबसे बड़ा पैमाना फीचर्स की भारी-भरकम लिस्ट नहीं है। देखना यह है कि आपको आज क्या चाहिए और अगले पांच साल में क्या चाहिए होगा, और कौन सा सिस्टम आपकी मौजूदा हकीकत और आगे की योजना दोनों पर खरा उतरता है।

सबसे पहले वेंडर से बात करने से पहले अपनी असली दिक्कतें लिख लें। क्या पेरोल की गणना में बार-बार हाथ से सुधार करना पड़ता है? क्या नए कर्मचारी का ऑनबोर्डिंग बार-बार एक जैसे कागजात और डेटा एंट्री में अटकता है? क्या छुट्टी की मंजूरी ईमेल की लंबी कड़ियों में फंसी रहती है? क्या शीर्ष प्रबंधन को एट्रिशन और वर्कफोर्स खर्च के सही और ताजा आंकड़े नहीं मिलते? हर समस्या की कीमत घंटों, सीधे खर्च या कर्मचारियों की नाराजगी के हिसाब से आंकें। यही हर डेमो का पैमाना बनेगा, और जो फीचर इन समस्याओं को नहीं छूता, वह स्क्रीन पर कितना भी चमकदार लगे, उसे किनारे रखा जा सकता है।

दूसरी बात, शुरू से ही अलग-अलग विभागों को साथ लें। फाइनेंस को पेरोल फीड और लेजर मिलान चाहिए। आईटी डेटा गवर्नेंस, सिंगल साइन-ऑन और आइडेंटिटी मैनेजमेंट की नीतियों का सख्ती से पालन चाहता है। लाइन मैनेजरों को शिफ्ट प्लानिंग, छुट्टी और अप्रेजल के लिए आसान मंजूरी प्रक्रिया चाहिए। कर्मचारी सेल्फ-सर्विस पोर्टल पर खर्च का क्लेम करते हैं, हाजिरी लगाते हैं और पेस्लिप देखते हैं। सबकी जरूरतें पहले जमा हो जाएं तो आखिरी वक्त पर फाइनेंस और आईटी की तरफ से आने वाली अड़चनें टल जाती हैं, जो एचआर सिलेक्शन प्रोजेक्ट में देरी की सबसे आम वजहों में हैं।

तीसरी बात कंपनी के आकार और फैलाव की है। एक ही दफ्तर और 150 कर्मचारियों वाली कंपनी की जरूरत उस कंपनी से काफी अलग होती है जिसके 5,000 कर्मचारी अलग-अलग इलाकों, फ्री जोन या इकाइयों में काम करते हैं। देखें कि प्लेटफॉर्म कई इकाइयां, करेंसी और अधिकार क्षेत्र, इलाके के हिसाब से शिफ्ट और भत्ते, और अलग-अलग नोटिस पीरियड, प्रोबेशन और छुट्टियां खुद संभालता है या नहीं। ये सुविधाएं आज मौजूद हों, भविष्य के वादों पर न टिकी हों। बढ़ती मिड-मार्केट कंपनियों को मॉड्यूलर प्राइसिंग भी देखनी चाहिए, ताकि गैर-जरूरी एंटरप्राइज फीचर के पैसे न देने पड़ें।

चौथी कसौटी पेरोल है, जो एचआर ढांचे का सबसे कम माफ करने वाला हिस्सा है। पेरोल उसी डेटाबेस पर बना हो जिस पर कोर एचआर, टाइम ट्रैकिंग और लीव मैनेजमेंट हैं, बाद में जोड़ा हुआ न हो। इससे हाथ से डेटा ले जाने और उससे होने वाली गलतियों से बचाव होता है। कानूनी अनुपालन की ठोस जांच करें। मिडिल ईस्ट में वेज प्रोटेक्शन सिस्टम, दक्षिण एशिया में प्रोविडेंट फंड और टैक्स फाइलिंग जैसी जरूरतें सिस्टम को अपने आप संभालनी चाहिए। किसी जटिल पेरोल रन का लाइव डेमो मांगें, जिसमें महीने के बीच में जुड़े कर्मचारी, आनुपातिक भत्ते और पिछली तारीख से सुधार हों। सटीकता की असली परीक्षा वहीं होती है।

पांचवीं बात भर्ती की है। उम्मीदवार से कर्मचारी बनने के बीच अक्सर डेटा की गड़बड़ी होती है। भर्ती सॉफ्टवेयर एचआरएमएस के भीतर ही जुड़ा हो तो ऑफर लेटर मंजूर होते ही उम्मीदवार की जानकारी बिना दोबारा एंट्री के कर्मचारी डेटाबेस में पहुंच जाती है। मल्टी-चैनल जॉब पोस्टिंग, ब्रांडेड करियर पेज, एप्लिकेंट ट्रैकिंग, इंटरव्यू का ऑटोमैटिक शेड्यूल, पैनल फीडबैक, ऑफर अप्रूवल और पहले दिन से पहले दस्तावेज जांच के डिजिटल पोर्टल जैसी चीजें देखें। ज्यादा भर्ती वाले माहौल में बल्क कैंडिडेट हैंडलिंग और कॉस्ट-पर-हायर व टाइम-टू-फिल जैसे एनालिटिक्स भी चाहिए।

छठी बात इस्तेमाल में आसानी और मोबाइल ऐप की है। सॉफ्टवेयर की कामयाबी का असली पैमाना यही है कि लोग उसे अपनाते हैं या नहीं। जो प्लेटफॉर्म बैक-ऑफिस एचआर के लिए ठीक हो पर लाइन मैनेजरों और आम स्टाफ के लिए बोझिल निकले, वह निवेश का फायदा नहीं दे पाएगा। वेंडर की मदद के बिना सैंडबॉक्स में खुद आजमाएं। जियो-फेंस या बायोमेट्रिक चेक-इन से हाजिरी, चलते-फिरते छुट्टी और खर्च की मंजूरी, और पेस्लिप, सालाना टैक्स डिक्लेरेशन और आधिकारिक पत्र मोबाइल पर मिलते हैं या नहीं, यह परखें। यह भी नापें कि मैनेजर को रोज की मंजूरी में कितना वक्त लगता है।

सातवीं और आठवीं बात इंटीग्रेशन, सुरक्षा और इम्प्लीमेंटेशन सपोर्ट की है। सिस्टम अकेला नहीं चलता, इसलिए ओपन एपीआई और पहले से बने इंटीग्रेशन से ईआरपी, अकाउंटिंग टूल और आइडेंटिटी सिस्टम के साथ सुरक्षित डेटा लेन-देन होना चाहिए। कर्मचारियों की पहचान, सैलरी ढांचे और बैंक डिटेल्स यहीं रहते हैं, इसलिए सुरक्षा पर समझौता नहीं हो सकता। एन्क्रिप्शन, मल्टी-फैक्टर ऑथेंटिकेशन, रोल-बेस्ड एक्सेस कंट्रोल, ऑडिट लॉग और स्थानीय डेटा सुरक्षा कानूनों का पालन लिखित में मांगें। रोलआउट अक्सर सॉफ्टवेयर की कमी से नहीं, कमजोर इम्प्लीमेंटेशन सपोर्ट से अटकते हैं। कॉन्ट्रैक्ट पक्का करने से पहले तय कर लें कि कॉन्फिगरेशन वेंडर की अपनी टीम करेगी या कोई तीसरी पार्टी, पुराने डेटा के माइग्रेशन की समय-सीमा क्या है, ट्रेनिंग क्या मिलेगी और गो-लाइव के बाद सपोर्ट के घंटे, एसएलए और एस्केलेशन का रास्ता क्या होगा। भरोसेमंद वेंडर ये वादे लिखित में देते हैं।

नौवीं बात कुल लागत की है। शुरुआती लाइसेंस सब्सक्रिप्शन असली खर्च का आईना शायद ही होता है, इसलिए तीन से पांच साल का टोटल कॉस्ट ऑफ ओनरशिप यानी टीसीओ निकालें। इसमें सेटअप, कस्टमाइजेशन, डेटा माइग्रेशन, प्रीमियम ऐड-ऑन मॉड्यूल, एपीआई कनेक्टर और कस्टम इंटीग्रेशन की फीस, कर्मचारी बढ़ने पर यूजर के हिसाब से बढ़ने वाला खर्च, और मेंटेनेंस, प्रीमियम सपोर्ट और अपग्रेड का खर्च शामिल होना चाहिए।

दसवीं बात, किसी एक बिजनेस यूनिट में कंपनी के असली डेटा से पायलट प्रोजेक्ट चलाएं। इससे वे दिक्कतें सामने आती हैं जो चमकदार सेल्स डेमो में छिप जाती हैं, और असली कामकाज में वेंडर की तकनीकी तत्परता भी दिखती है। साथ ही, उतने ही आकार और जटिलता वाली कंपनियों से, जो वही सिस्टम इस्तेमाल कर रही हैं, सीधे बात करें। उनसे प्लेटफॉर्म की स्थिरता, इम्प्लीमेंटेशन की गुणवत्ता और बिक्री के बाद की सर्विस पर बेबाक राय मिलती है।

आखिर में फैसला निष्पक्ष रखने के लिए एक स्कोरकार्ड बनाएं, जिसमें शुरू में तय सारे कामकाजी पैमाने हों। एचआर, फाइनेंस और आईटी के प्रमुख मिलकर इन स्कोरकार्ड का आकलन करें। इस तरीके से चलने पर कंपनी ऐसा एचआरएमएस अपना सकती है जिसमें पूरा इंटीग्रेशन हो, भर्ती के मजबूत टूल हों और एंटरप्राइज स्तर की सुरक्षा हो। यह नींव राह में रोड़े नहीं अटकाती, अनुपालन पक्का रखती है और एचआर विभाग को अपना टैलेंट पूल बढ़ाने में मदद करती है।

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