गुरूवार, 5 नवंबर 2026

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कल्याण के के. एम. अग्रवाल कॉलेज में नियुक्तियों पर आरोप, प्राचार्या समेत 12 पर केस दर्ज

कल्याण के के. एम. अग्रवाल कॉलेज में नियुक्तियों पर आरोप, प्राचार्या समेत 12 पर केस दर्ज तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं
जुर्म PT24 टीम

खडकपाडा पुलिस ने धोखाधड़ी और फर्जी कागजात बनाने के आरोप में 12 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया है। आरोप साबित नहीं हुए हैं, जांच जारी है।

कल्याण के जाने-माने के. एम. अग्रवाल कला, वाणिज्य और विज्ञान महाविद्यालय में कथित गैरकानूनी नियुक्तियों और सरकारी रिकॉर्ड में हेराफेरी का मामला सामने आया है। आरोप है कि नियमों को ताक पर रखकर नियुक्तियां की गईं और सरकारी HTE प्रणाली में जाली एंट्री तैयार की गईं। इस मामले में खडकपाडा पुलिस ने कॉलेज की प्राचार्या, उच्च शिक्षा विभाग के अधिकारियों, संस्था के पदाधिकारियों और कर्मचारियों समेत कुल 12 लोगों के खिलाफ धोखाधड़ी और जाली कागजात तैयार करने का मामला दर्ज किया है।

यह मामला 4 नवंबर को मुंबई यूनिवर्सिटी एंड कॉलेज टीचर्स एसोसिएशन के जनसंपर्क प्रमुख रामचंद्र परशुराम यादव (36) की शिकायत पर दर्ज हुआ। शिकायत के मुताबिक कॉलेज में 1998 से अशोक कुमार लालबिहारी मिश्रा की नियुक्ति बिना कोई विज्ञापन दिए, बिना चयन समिति की प्रक्रिया चलाए और जरूरी अनापत्ति प्रमाणपत्र लिए बिना की गई, ऐसा आरोप है। शिकायतकर्ता का दावा है कि नियुक्ति में जरूरी नियमों का पालन नहीं हुआ।

शिकायत में एक और गंभीर आरोप लगाया गया है। दावा है कि प्रयोगशाला सहायक के पद को नियमों के खिलाफ जाकर कनिष्ठ लिपिक के पद में बदल दिया गया। यह बदलाव नियमों के मुताबिक दिखाने के लिए सरकारी HTE प्रणाली से छेड़छाड़ करके जाली एंट्री बनाई गईं, ऐसा शिकायत में कहा गया है। अगर सरकारी प्रणाली में रिकॉर्ड सचमुच इस तरह बदले गए, तो इसके पीछे किसकी भूमिका थी और संबंधित कागजात को किसने मंजूरी दी, इसकी जांच अब पुलिस करेगी।

इसी मामले में कर्मचारी सुहास महादेव भगत की नियुक्ति पर भी सवाल उठाए गए हैं। शिकायतकर्ता का आरोप है कि जरूरी शैक्षणिक योग्यता और टाइपिंग की अर्हता न होने के बावजूद मिलीभगत से उनकी नियुक्ति की गई। जांच के दौरान यह देखा जा सकता है कि इस नियुक्ति में नियमों का पालन हुआ था या नहीं और जरूरी योग्यता पूरी की गई थी या नहीं।

जिन 12 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज हुआ है, उनमें कॉलेज की प्राचार्या डॉ. अनिता अरुण मन्ना, उच्च शिक्षा विभाग के तत्कालीन विभागीय सहसंचालक विजय नारखेडे और मौजूदा विभागीय संचालक डॉ. किरणकुमार बोंदर शामिल हैं। संस्था की तरफ से अध्यक्ष विजय नारायण पंडित, सचिव ओमप्रकाश पांडे, कार्याध्यक्ष रमाशंकर तिवारी, उपाध्यक्ष लक्ष्मीकांत उपाध्याय, अनंत गवळी और अनिल पंडित तथा कोषाध्यक्ष दिनेश सोमानी के नाम हैं। इनके अलावा अशोक कुमार मिश्रा और सुहास भगत भी इस सूची में हैं। सभी पर भारतीय न्याय संहिता की अलग-अलग धाराओं में मामला दर्ज किया गया है। हालांकि मामला दर्ज होने का मतलब यह नहीं कि आरोप साबित हो गए हैं। सच्चाई जांच से ही सामने आएगी।

कॉलेज प्रशासन का पक्ष जानने के लिए उपप्राचार्या अनघा राणे से बात की गई। उन्होंने कहा कि उन्हें इस मामले की कोई जानकारी नहीं है। उन्होंने यह भी बताया कि फिलहाल कॉलेज में कोई मौजूद नहीं है।

मामले की आगे की जांच सहायक पुलिस निरीक्षक अमोल खोंडे कर रहे हैं। पुलिस यह पता लगाएगी कि कथित नियुक्तियों में किसकी क्या भूमिका थी, HTE प्रणाली में एंट्री किस स्तर पर बदली गईं और इन नियुक्तियों को किसने मंजूरी दी। आरोप है कि यह कथित सिलसिला 28 साल से चल रहा था, और इसी वजह से शिक्षा जगत में हलचल मची है। पुलिस की जांच से ही इस मामले की असल तस्वीर साफ होगी।

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