जयपुर पिंक, जोधपुर ब्लू, नागपुर ऑरेंज: रंगों वाले शहरों के नाम की कहानी
देश के कई शहरों को उनकी खासियत की वजह से रंगों पर आधारित नाम मिले हैं।
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भारत के हर शहर की अपनी एक अलग कहानी होती है। देश में कुछ शहर ऐसे हैं जिन्हें रंगों के नाम से एक खास पहचान मिली है। शहरों के अपने नाम तो चलन में हैं ही, लेकिन बाद में मिले ये नाम लोगों के बीच ज्यादा मशहूर माने जाते हैं। इन शहरों को उनकी अपनी खासियत की वजह से ये नाम मिले हैं। किसी को पिंक सिटी कहा गया तो किसी को ऑरेंज सिटी। इन नामों के पीछे इतिहास, संस्कृति, कारोबार और कुदरती खूबसूरती की दिलचस्प कहानी है। आइए जानते हैं कि इन शहरों को ये नाम कैसे मिले।
पिंक सिटी के नाम से राजस्थान की राजधानी जयपुर जानी जाती है। इसका इतिहास 1876 से शुरू होता है। बताया जाता है कि महाराजा सवाई राम सिंह द्वितीय ने वेल्स के राजकुमार प्रिंस अल्बर्ट एडवर्ड और क्वीन विक्टोरिया के भव्य स्वागत के लिए पूरे शहर को टेराकोटा गुलाबी रंग से रंगवा दिया था। तभी से इसे पिंक सिटी का नाम मिल गया।
जोधपुर देश का वह शहर है जिसे ब्लू सिटी कहा जाता है। यहां पहुंचने पर ज्यादातर जगहें नीले रंग में रंगी हुई दिखाई देती हैं। कहा जाता है कि घरों को नीला रंग देने की शुरुआत ब्राह्मणों ने की थी। इसके पीछे उनका मूल मकसद खुद को एक अलग पहचान देना था। आगे चलकर यह रिवाज यहां और बढ़ता चला गया।
गुजरात के सूरत को डायमंड सिटी के नाम से जाना जाता है। दुनिया भर में सूरत हीरों के लिए मशहूर है। दरअसल इस शहर में 1900 के दशक में हीरे काटने और पॉलिश करने का काम शुरू हुआ था। आगे चलकर यह कारोबार यहां तेजी से बढ़ने लगा।
महाराष्ट्र का नागपुर मीठे और रसीले संतरों के लिए दुनिया भर में लोकप्रिय है। यहां हर साल लाखों टन संतरों की पैदावार होती है। इसी वजह से यह शहर देश की सबसे बड़ी संतरा थोक मंडी बन गया है। संतरे को अंग्रेजी में ऑरेंज कहते हैं और इसी से नागपुर को ऑरेंज सिटी का नाम पड़ा।
केरल की राजधानी तिरुवनंतपुरम को भारत की एवरग्रीन सिटी कहा जाता है। यह नाम महात्मा गांधी ने दिया था। यहां की हरियाली और कुदरती खूबसूरती देखकर शहर को यह नाम दिया गया।