जरीपटका में एसीबी का जाल: तायडे पकड़ा गया, मेश्राम निकल भागा, 20 हजार का पता नहीं
जरीपटका पुलिस स्टेशन में 16 सितंबर को एसीबी की कार्रवाई में पुलिस हवलदार सचिन तायडे पकड़ा गया, मगर लाचकी रकम बरामद नहीं हुई और दूसरा आरोपी मेश्राम अस्पताल से निकल गया।
नागपुर में एंटी करप्शन ब्यूरो (एसीबी) ने 16 सितंबर को जरीपटका पुलिस स्टेशन में जाल बिछाया था। इस कार्रवाई के बाद कई सवाल खड़े हो गए हैं। एसीबी की टीम पुलिस हवलदार सचिन माणिकराव तायडे (48) को रंगेहाथ पकड़ना चाहती थी। तायडे हाथ तो आया, लेकिन रंगेहाथ नहीं।
आरोप है कि तायडे और उसके साथी कॉन्स्टेबल मनीष उत्तम मेश्राम (30) ने रिश्वत मांगी थी। तायडे के पकड़े जाते ही मेश्राम को अचानक फिट आ गई। इलाज के बहाने वह वहां से निकल गया। उसे इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया था, पर वह वहीं से फरार हो गया।
मामला यह है कि 23 साल के एक युवक के खिलाफ उसके एक रिश्तेदार ने जरीपटका पुलिस स्टेशन में शिकायत दी थी। उस पर अदखलपात्र (नॉन-कॉग्निजेबल) अपराध दर्ज हुआ। इसकी जांच एनसी जांच टीम के पुलिस हवलदार सचिन तायडे को सौंपी गई थी। आरोप है कि इस मामले में मदद के नाम पर तायडे और मेश्राम ने 40 हजार रुपये की रिश्वत मांगी। बात आखिर में 20 हजार पर तय हुई।
शिकायतकर्ता ने इसकी शिकायत एसीबी से की और एसीबी ने जाल बिछाया। तय योजना के मुताबिक शिकायतकर्ता ने रकम तायडे की टेबल पर रखी। आरोप है कि तायडे ने अखबार के कागज से रकम उठाकर जेब में रखी और नीचे चला गया। शिकायतकर्ता का इशारा मिलते ही एसीबी की टीम उसके पीछे गई। लेकिन जब तायडे को पकड़ा गया तो उसके पास रिश्वत की रकम नहीं मिली।
एसीबी ने तायडे को कोर्ट में पेश किया। कोर्ट ने पहले पांच दिन की कस्टडी दी और फिर दो दिन की कस्टडी और दी। एसीबी का कहना है कि रकम कहां गई, यह पता करने की कोशिश की गई, मगर तायडे ने जांच में सहयोग नहीं किया। उधर फरार मेश्राम को कोर्ट से अंतरिम जमानत मिल गई है। यानी न रकम मिली और न दूसरा आरोपी हाथ आया।
इस केस का सबसे बड़ा सवाल यही है कि 20 हजार रुपये आखिर गए कहां। शिकायतकर्ता का दावा है कि तायडे ने रकम ली थी, पर कार्रवाई के वक्त वह उससे बरामद नहीं हुई। एसीबी रकम की तलाश में जांच कर रही है। साथ ही तायडे और मेश्राम की भूमिका भी खंगाली जा रही है।
एसीबी के पुलिस अधीक्षक दिगंबर प्रधान ने कहा कि केस की जांच गंभीरता से चल रही है। उन्होंने माना कि रिश्वत की रकम कहां गई, यह अभी साफ नहीं हुआ है। प्रधान के मुताबिक तायडे से जुड़ी रिपोर्ट शहर पुलिस को दी जा रही है। उन्होंने यह भी साफ किया कि एसीबी शिकायतकर्ता के साथ खड़ी है।
शिकायतकर्ता ने डर जताया है कि अगर आरोपी आगे चलकर पुलिस सेवा में लौट आया तो उसे परेशान किया जा सकता है या झूठे मामले में फंसाया जा सकता है। ऐसे में देखना होगा कि कानून उसे कितनी सुरक्षा दे पाता है।
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