मंगलवार, 6 अक्टूबर 2026

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17:59 IST

एक थाने की डीबी टीम पर 70 हजार की रिश्वत मांगने का आरोप, पैसे लेते वक्त बना वीडियो

एक पुलिस थाने की डीबी टीम पर बैन मांगुर मछली के कारोबार को बचाने के बदले पैसे मांगने का आरोप लगा है, हालांकि पुलिस की तरफ से अभी कोई पुष्टि नहीं आई है।

एक थाने की डीबी टीम पर 70 हजार की रिश्वत मांगने का आरोप, पैसे लेते वक्त बना वीडियो
एआई से बनाई गई प्रतीकात्मक तस्वीर; यह घटना का वास्तविक फोटो नहीं है | PT24

एक जिले के पुलिस थाने की डीबी टीम में तैनात एक पुलिस उपनिरीक्षक और साथ के कुछ पुलिस वालों पर गंभीर आरोप लगे हैं। सूत्रों का कहना है कि बैन किए गए मांगुर मछली के धंधे को चलने देने के एवज में इन पुलिस वालों ने पैसे मांगे। यह पूरा मामला अभी सिर्फ आरोपों तक सीमित है, इसकी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है और संबंधित पुलिस वालों की तरफ से भी कोई सफाई सामने नहीं आई है।

जानकारी के मुताबिक मांगुर मछली का धंधा करने वाले एक व्यापारी से कथित तौर पर 70 हजार रुपये मांगे गए, ताकि पुलिस की कार्रवाई से उसे बचाया जा सके और धंधा बिना रुकावट चलता रहे। सूत्र बताते हैं कि मांग के बाद व्यापारी ने पहली किस्त के तौर पर 40 हजार रुपये दिए। खास बात यह रही कि आरोपी पुलिस वाले खुद पैसे लेने नहीं आए, बल्कि एक निजी आदमी को बीच में रखकर पैसे मंगवाए गए।

चर्चा है कि पैसे देते वक्त व्यापारी ने उस निजी आदमी का वीडियो बना लिया था। जैसे ही आरोपी पुलिस वालों को इस वीडियो की भनक लगी, कहा जा रहा है कि उन्होंने व्यापारी को बुलाकर वह वीडियो डिलीट करवा दिया। इसके बाद बाकी बचे 30 हजार रुपये की मांग की गई, ऐसा दावा किया जा रहा है।

अगर इन आरोपों में सच्चाई निकलती है, तो यह मामला सिर्फ बैन मांगुर मछली के गैरकानूनी कारोबार तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पुलिस कार्रवाई का डर दिखाकर वसूली करने जैसा गंभीर सवाल भी खड़ा करेगा। पुलिस महकमे में इस मामले की चर्चा गुपचुप तरीके से जोरों पर चल रही है। बताया जा रहा है कि पैसे मांगने और संबंधित पुलिस वालों की भूमिका की जानकारी वरिष्ठ अफसरों तक भी पहुंच गई है, जिसके बाद अब सबकी नजर इस पर है कि वरिष्ठ अफसर आगे क्या जांच और कार्रवाई करते हैं।

अगर यह आरोप सच साबित होते हैं, तो सवाल यह उठता है कि कानून की रखवाली करने वाले पुलिस वाले ही अगर ऐसे गैरकानूनी मांगुर कारोबार को बचाने के लिए पैसों की सौदेबाजी करते दिखें, तो इसकी वजह क्या रही। यह भी साफ नहीं है कि इस पूरे मामले में कोई निजी बिचौलिया वाकई सक्रिय था या नहीं। पहली किस्त के तौर पर दिए गए 40 हजार रुपये की असल सच्चाई क्या है और बाकी 30 हजार रुपये किसके कहने पर मांगे गए, यह भी अभी साफ नहीं है।

इन सारे सवालों के जवाब निष्पक्ष जांच के बाद ही सामने आ सकते हैं। इसीलिए यह जरूरी माना जा रहा है कि वरिष्ठ पुलिस अफसर इस पूरे मामले की गहराई से जांच करें और संबंधित पुलिस वालों की भूमिका को साफ करें।

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