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इटली में मेलोनी सरकार का नया सुरक्षा अध्यादेश, हिंसक प्रदर्शन पर सख्ती, मां-बाप पर भी जिम्मेदारी

इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी की सरकार ने हिंसक प्रदर्शनों, तोड़फोड़ और लूटपाट रोकने के लिए नए सुरक्षा अध्यादेश को मंजूरी दी है।

इटली में मेलोनी सरकार का नया सुरक्षा अध्यादेश, हिंसक प्रदर्शन पर सख्ती, मां-बाप पर भी जिम्मेदारी तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं

इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी (Giorgia Meloni) की सरकार ने हिंसक प्रदर्शनों पर लगाम कसने के लिए एक नए 'सुरक्षा अध्यादेश' (Security Ordinance) को आधिकारिक मंजूरी दे दी है। लोकतंत्र में विरोध जताना और शांति से प्रदर्शन करना हर किसी का हक माना जाता है। लेकिन जब यही प्रदर्शन हिंसक दंगे, सार्वजनिक संपत्ति की तोड़फोड़ और दुकानों की लूटपाट में बदल जाएं, तो प्रशासन को सख्त कदम उठाने पड़ते हैं। नए नियमों से उपद्रवी प्रदर्शनकारियों और कानून हाथ में लेने वालों में खलबली है।

नए अध्यादेश के मुताबिक प्रदर्शन के दौरान हिंसा करना, पुलिस पर हमला करना या सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाना अब भारी पड़ेगा। दोषी पाए जाने पर जेल तो होगी ही, साथ में 20,000 यूरो का जुर्माना भी लगेगा। भारतीय करेंसी में यह रकम अंदाजन 21 लाख रुपये से ज्यादा बैठती है। इस फैसले के बाद खासकर यूरोप में सार्वजनिक संपत्ति की हिफाजत के नियमों पर नए सिरे से बहस छिड़ गई है।

इस कानून का सबसे ज्यादा चर्चा में रहने वाला हिस्सा नाबालिगों से जुड़ा है। अक्सर प्रदर्शनों के दौरान 14 से 17 साल की उम्र के किशोर भीड़ की आड़ में तोड़फोड़, गाड़ियों में आगजनी या दुकानों में लूटपाट करते पाए जाते हैं। पहले उम्र की वजह से उन्हें कानून से छूट मिल जाती थी। अब नए अध्यादेश के तहत अगर नाबालिग ऐसी किसी हिंसक वारदात में शामिल साबित हुए, तो उनके मां-बाप पर सीधे कानूनी कार्रवाई होगी और उनसे भारी आर्थिक जुर्माना वसूला जाएगा।

इसके अलावा इतालवी पुलिस को 14 से 17 साल के ऐसे किशोरों को संदिग्ध हरकतों के आधार पर हिरासत में लेने (Detain) के खास अधिकार भी दिए गए हैं, जो सार्वजनिक सुरक्षा के लिए खतरा बन सकते हैं। सरकार ने इस नियम से साफ संदेश दिया है कि बच्चों को अच्छे संस्कार देना और उन्हें हिंसा के रास्ते पर जाने से रोकना मां-बाप की पहली जिम्मेदारी है।

सोशल मीडिया पर वायरल एक पोस्ट में मेलोनी के हवाले से कहा गया है कि प्रदर्शन के दौरान पांच या उससे ज्यादा लोग इकट्ठा होकर पत्थर, पटाखे या डंडे फेंकें, तो उन्हें पांच साल तक की जेल और 20,000 यूरो तक का जुर्माना हो सकता है। पोस्ट में यह भी कहा गया है कि सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने वाले को उसकी कीमत चुकानी होगी और नाबालिग के जुर्म पर मां-बाप आर्थिक रूप से जिम्मेदार होंगे।

सरकार के इस सख्त फैसले की वजह उत्तर इटली की घटनाएं बताई गई हैं। इटली की आर्थिक राजधानी माने जाने वाले मिलान (Milan) में हाल ही में तीखे प्रदर्शन हुए थे। प्रदर्शन के नाम पर उपद्रवी तत्वों ने शहर में उत्पात मचाया। सड़कों पर दुकानों में तोड़फोड़ हुई, कारोबारी ठिकाने लूटे गए और शांति बनाए रखने की कोशिश कर रही पुलिस पर सीधे हमले किए गए। इससे शहर को भारी आर्थिक नुकसान हुआ और आम लोगों में डर फैल गया।

इस घटना को गंभीरता से लेते हुए प्रधानमंत्री मेलोनी ने साफ किया, "चोरी, तोड़फोड़ और हिंसा को आंदोलन या विरोध का हिस्सा बताकर कभी जायज नहीं ठहराया जा सकता। नागरिक सुरक्षा और कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए सरकार कोई समझौता नहीं करेगी।" इसके फौरन बाद मंत्रिमंडल ने इस सुरक्षा अध्यादेश को हरी झंडी दे दी।

नए नियमों के तहत प्रदर्शन के दौरान सार्वजनिक सुरक्षा को खतरे में डालने या डर का माहौल बनाने वाले कम से कम 5 लोगों के समूह का हिस्सा बनने वाले किसी भी शख्स को 5 साल तक की जेल हो सकती है। साथ ही पहचान छिपाने के लिए मुंह पर रुमाल, मास्क या हेलमेट बांधकर चेहरा ढकने पर भी सख्त पाबंदी लगाई गई है। हिंसा करके भागने वाले और सुरक्षा एजेंसियों को चकमा देने वाले उपद्रवियों को ढूंढना आसान हो, इसी मकसद से यह कदम उठाया गया है।

हिंसा या तोड़फोड़ में जितनी सार्वजनिक या निजी संपत्ति का नुकसान हुआ हो, उसकी सही पड़ताल करके पूरी भरपाई संबंधित प्रदर्शनकारियों या उनके संगठन से वसूलने का कानूनी हक स्थानीय प्रशासन को दिया गया है। इससे 'सरकारी संपत्ति यानी किसी की नहीं' वाली सोच पर रोक लगेगी।

इटली सरकार के इस फैसले की तुलना दुनिया के अलग-अलग देशों के कानूनों से की जा रही है। भारतीय मीडिया और सियासी गलियारों में इसे भारत के उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) राज्य के सार्वजनिक संपत्ति नुकसान वसूली कानून से जोड़ा जा रहा है। उत्तर प्रदेश में भी दंगाइयों और तोड़फोड़ करने वालों से नुकसान की भरपाई वसूलने और उनकी संपत्तियों पर कड़ी कार्रवाई का प्रावधान है।

हालांकि इटली और भारत, दोनों देशों का संवैधानिक ढांचा, कानूनी प्रक्रिया और पुलिस व्यवस्था एक-दूसरे से बिल्कुल अलग है। फिर भी सार्वजनिक संपत्ति की हिफाजत और प्रदर्शन के नाम पर होने वाले अपराध रोकने के मुद्दे पर दोनों देशों के नजरिए में समानता दिख रही है। इटली का यह नया कानून दूसरे यूरोपीय देशों के लिए भी मिसाल बन सकता है।

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