सोम‌वार, 26 अक्टूबर 2026

अभी सब्सक्राइब करें
प्राइम अलर्ट
सारे लाइव अपडेट
AQI 319 | Very Poor 06:57 IST

इथेनॉल के लिए मक्का बढ़ा तो अंडा और चिकन हो सकते हैं महंगे, खरीद के नए नियम से सवाल

तेल कंपनियों की नई निविदा में गन्ने के रस, सिरप और बी-हेवी शीरे से बना इथेनॉल बाहर है। मक्के पर निर्भरता बढ़ी तो खर्च और खाने की थाली, दोनों पर असर पड़ सकता है।

इथेनॉल के लिए मक्का बढ़ा तो अंडा और चिकन हो सकते हैं महंगे, खरीद के नए नियम से सवाल तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं

E20 पेट्रोल को लेकर देश में पहले से ही नाराजगी है। अब सवाल उठ रहा है कि क्या इससे देश के सामने एक नया संकट खड़ा हो सकता है, यानी ईंधन के लिए अनाज का इस्तेमाल बढ़ने से खाने की थाली महंगी हो जाएगी? सरकार के इथेनॉल खरीद के नए नियमों को ऊर्जा की जरूरत और अनाज की महंगाई के बीच संतुलन बनाने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है। आइए समझते हैं कि इस फैसले का आपकी जेब और आपकी थाली पर क्या असर हो सकता है।

तेल कंपनियों ने 2026-27 के सप्लाई साल के लिए करीब 1,100 करोड़ लीटर इथेनॉल खरीदने के लिए निविदाएं मंगवाई हैं। लेकिन इस नई निविदा में गन्ने के रस, सिरप और बी-हेवी शीरे से बना इथेनॉल शामिल नहीं किया गया है। इस फैसले का मुख्य मकसद यह है कि चीनी का रुख इथेनॉल बनाने की तरफ न हो और अनाज की महंगाई काबू में रहे।

गन्ने से बने इथेनॉल के कुछ विकल्पों पर रोक लगने से तेल कंपनियों की खरीद का खर्च बढ़ने की आशंका है। नतीजा यह कि अपनी इथेनॉल की जरूरत पूरी करने के लिए कंपनियों को मक्का और सी-हेवी शीरे जैसे दूसरे विकल्पों पर ज्यादा निर्भर रहना पड़ सकता है।

आंकड़ों के मुताबिक मक्के से बने इथेनॉल की खरीद कीमत 68.86 रुपये प्रति लीटर है, जबकि बी-हेवी शीरे से बने इथेनॉल की कीमत 60.73 रुपये प्रति लीटर है। यानी मक्के का इथेनॉल बी-हेवी शीरे वाले इथेनॉल से करीब 13.4 प्रतिशत महंगा पड़ता है। इससे तेल कंपनियों का खर्च बढ़ सकता है।

असर सिर्फ तेल कंपनियों तक नहीं रुकेगा। इथेनॉल बनाने में मक्के का इस्तेमाल बढ़ेगा तो मुर्गीपालन उद्योग के खर्च पर भी इसका असर पड़ सकता है। वजह यह है कि मक्का मुर्गियों के चारे का एक अहम हिस्सा है। देश में जितना मक्का पैदा होता है, उसका करीब 55 से 60 प्रतिशत हिस्सा मुर्गीपालन उद्योग इस्तेमाल करता है।

अगर इथेनॉल के लिए ज्यादा मक्का लिया गया तो पशुओं के चारे का खर्च बढ़ सकता है। इसका असर अंडे और चिकन के दामों पर पड़ने की संभावना है। हालांकि दाम कितने बढ़ेंगे, यह इस बात पर टिका रहेगा कि मक्का कितना उपलब्ध है और बाजार की हालत कैसी रहती है।

क्या हम इस विज़िट को गिन लें? PT24 गूगल एनालिटिक्स से देखता है कि कौन सी खबरें किस पर पढ़ी जाती हैं। आपके हां कहने तक यह बंद है, आप सोच रहे हैं तब तक कुछ नहीं गिना जाता, और आप You पर कभी भी अपना मन बदल सकते हैं। हम क्या लेंगे