इराण पर 'मदर ऑफ ऑल बॉम्ब्स' गिराने पर विचार कर रहा अमेरिका, अंतिम फैसला नहीं
इराण के खिलाफ संभावित कार्रवाई में अमेरिका सबसे बड़े गैर-परमाणु बम MOAB के इस्तेमाल पर विचार कर रहा है, पर अंतिम फैसला नहीं हुआ।
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मध्यपूर्व में अमेरिका और इराण के बीच फौजी तनाव दिन-ब-दिन बढ़ता जा रहा है। पूरी दुनिया की नजर इस इलाके पर टिकी है, और इसी बीच अमेरिका की एक संभावित फौजी रणनीति ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हलचल मचा दी है। सूत्रों और अलग-अलग अंतरराष्ट्रीय रिपोर्टों के हवाले से कहा जा रहा है कि इराण के खिलाफ संभावित कार्रवाई में अमेरिकी सेना 'मदर ऑफ ऑल बॉम्ब्स' यानी MOAB के इस्तेमाल के विकल्प पर गंभीरता से सोच रही है।
यह बम अमेरिका के हथियार भंडार का सबसे बड़ा और तबाही मचाने वाला गैर-परमाणु (Non-nuclear) बम माना जाता है। अगर अमेरिका ने यह चौंकाने वाला फैसला लिया, तो दोनों देशों के बीच की लड़ाई बेकाबू जंग की तरफ जा सकती है। हालांकि यह भी उतना ही अहम है कि अमेरिकी प्रशासन ने इस बम के इस्तेमाल पर अब तक कोई अंतिम या आधिकारिक फैसला नहीं लिया है।
इस तनाव के केंद्र में इराणी रिवोल्यूशनरी गार्ड्स कॉर्प्स (IRGC) की नौसेना के कमांडर, रियर एडमिरल अली अजमाई का सख्त बयान माना जा रहा है। उन्होंने अमेरिका को खुली चेतावनी देते हुए कहा है कि खाड़ी इलाके में अमेरिकी जहाजों की किसी भी उकसाने वाली या आक्रामक हरकत का इराण की तरफ से बेहद कड़ा और सीधा जवाब दिया जाएगा। इराण के इस तेवर के बाद अमेरिकी प्रशासन में अलग-अलग फौजी विकल्पों को टटोला जा रहा है।
सीएनएन ने अमेरिकी रक्षा विभाग के आला अफसरों के हवाले से इन योजनाओं का खुलासा किया है। रिपोर्ट के मुताबिक पेंटागन ने इराण के खास ठिकानों पर हमले के लिए विस्तृत फौजी खाके तैयार रखे हैं। अगर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प एक बार फिर इराण के खिलाफ सीधी फौजी कार्रवाई का आदेश देते हैं, तो इन योजनाओं पर तुरंत अमल हो सकता है। यानी अमेरिका के वॉर-रूम में इराण के खिलाफ बड़े पैमाने पर सख्त हमले के विकल्पों पर गंभीर चर्चा चल रही है।
इस हथियार का आधिकारिक तकनीकी नाम GBU-43/B मैसिव ऑर्डनन्स एयर ब्लास्ट (MOAB) है। यह एटम बम नहीं है, फिर भी इसकी तबाही की ताकत किसी परमाणु हथियार से कम नहीं मानी जाती। इसे खास तौर पर बेहद मजबूत फौजी अड्डों, जमीन के नीचे बने बंकरों और ठोस सैन्य ढांचों को तबाह करने के लिए बनाया गया है।
करीब 20 फीट लंबे इस बम का वजन हजारों किलो होता है। इसकी सबसे बड़ी ताकत यह है कि फटने से पहले यह 200 फीट मिट्टी और 60 फीट कंक्रीट की परतों को भेदकर अंदर जा सकता है। जमीन में गहराई तक जाकर धमाका करने की इसी खूबी की वजह से इराण के जमीन के नीचे बने परमाणु प्रोजेक्ट और फौजी ठिकानों को तबाह करने के लिए इसे सबसे असरदार विकल्प माना जा रहा है।
अगर अमेरिका ने इराण पर MOAB या ऐसे ही किसी बड़े बम से हमला किया, तो इसका असर सिर्फ इन दो देशों तक सीमित नहीं रहेगा। पूरे मध्यपूर्व के तेल से भरपूर देश इस जंग की आग में झुलस सकते हैं। इराण के एनर्जी प्लांट या तेल रिफाइनरियों पर हमला हुआ, तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल (Crude Oil) और प्राकृतिक गैस की सप्लाई पूरी तरह ठप हो सकती है।
इससे दुनिया के बाजार में कच्चे तेल के दाम आसमान छू सकते हैं और अमेरिका, यूरोप और एशिया के कई देशों में भयंकर महंगाई भड़क सकती है। भारत जैसे देश के लिए, जो अपनी कच्चे तेल की जरूरत का 80 फीसदी से ज्यादा हिस्सा आयात से पूरा करता है, यह संकट बहुत गंभीर होगा। ईंधन के दाम बढ़ने पर भारत में ढुलाई का खर्च, अनाज और रोजमर्रा की चीजों के भाव बढ़ेंगे और आम आदमी का बजट बिगड़ सकता है। इसलिए अमेरिका और इराण के बीच का यह संभावित टकराव सिर्फ फौजी नहीं, पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था के लिए खतरे की घंटी बन रहा है।