इंडोनेशिया से थाईलैंड तक, कई देशों में रामलीला की धूम
शारदीय नवरात्रि में भारत भर में रामलीला होती है, लेकिन बाहर के कई देशों में भी रामायण की परंपरा जिंदा है।
शारदीय नवरात्रि में पूरे देश में रामलीला होती है और दशहरे पर रावण के दहन के साथ इसका समापन होता है। भारत के कई हिस्सों में रामलीला का आयोजन होता है, जहां लोगों की बड़ी भीड़ जुटती है। लेकिन क्या आपको पता है कि भारत के बाहर भी कई देशों में रामलीला पेश की जाती है और लोग खुशी के साथ उत्सव मनाते हैं? आइए जानते हैं कि भारत के अलावा और किन देशों में यह उत्सव मनाया जाता है।
इंडोनेशिया में जावा और बाली में रामायण पर आधारित नृत्य और नाट्य प्रयोग पेश किए जाते हैं। बहुत कम लोगों को पता होगा कि इंडोनेशिया में भी रामलीला का आयोजन होता है। यह मुस्लिम आबादी वाला देश है, फिर भी रामायण वहां की संस्कृति में गहराई से रची-बसी है। वहां भगवान राम को किसी एक धर्म का नहीं, बल्कि मानवीय आदर्शों का प्रतीक माना जाता है। जावा और बाली में रामलीला खूबसूरत नृत्य और नाटक के प्रदर्शन के जरिए पेश की जाती है।
थाईलैंड की संस्कृति में भी रामायण का गहरा असर दिखता है। वहां रामायण को 'रामकियन' के नाम से जाना जाता है, जो देश का राष्ट्रीय महाकाव्य भी है। रामायण के प्रसंग नृत्य और संगीत की ताल पर बहुत सुंदर ढंग से पेश किए जाते हैं। रामायण पेश करते वक्त कलाकार एक खास मुखौटा पहनते हैं, जिसे 'खोन' कहा जाता है।
कंबोडिया का इतिहास हिंदू संस्कृति से जुड़ा माना जाता है। वहां रामायण को 'रीमकेर' के नाम से जाना जाता है और यह परंपरा मशहूर है। वहां के मंदिरों और ऐतिहासिक जगहों पर रामायण के दृश्यों का बहुत खूबसूरती से प्रदर्शन किया जाता है। कलाकार सुंदर पोशाक और गहने पहनकर रामलीला पेश करते हैं।
त्रिनिदाद और टोबैगो तथा गयाना में भारतीय मूल के समुदायों ने रामलीला की परंपरा को संभालकर रखा है। इतिहास के मुताबिक 19वीं सदी में ब्रिटिश राज के दौरान भारत से गिरमिटिया मजदूरों को गन्ने के खेतों में काम करने के लिए इन देशों में भेजा गया था। ये मजदूर अपने साथ अपनी संस्कृति भी ले गए। उन्होंने उन देशों में रामलीला पेश की और तभी से वह वहां लोकप्रिय हो गई।