IDBI बैंक के कर्मचारी दो दिन की देशव्यापी हड़ताल पर, निजीकरण का विरोध
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निजीकरण की प्रक्रिया रद्द करने की मांग को लेकर IDBI बैंक के 10 हजार से ज्यादा कर्मचारी दो दिन की हड़ताल में शामिल हो रहे हैं। हड़ताल का दूसरा दिन मंगलवार 3 नवंबर को है।
पुणे: IDBI बैंक के निजीकरण की प्रक्रिया के खिलाफ बैंक के कर्मचारी दो दिन की देशव्यापी हड़ताल पर जा रहे हैं। यूनाइटेड फोरम ऑफ आईडीबीआई ऑफिसर्स एंड एम्प्लॉइज नाम के संगठन ने प्रेस नोट जारी करके यह जानकारी दी। संगठन के मुताबिक देश भर में दो हजार से ज्यादा शाखाओं में काम करने वाले 10 हजार से ज्यादा कर्मचारी इस हड़ताल में हिस्सा लेंगे।
हड़ताल की सबसे बड़ी मांग यही है कि बैंक के निजीकरण की प्रक्रिया रद्द की जाए। कर्मचारी संगठन का कहना है कि IDBI बैंक जनता के पैसे से दोबारा खड़ा हुआ है, इसलिए उसका भविष्य भी जनता के हित को देखकर ही तय होना चाहिए। संगठन के हिसाब से बैंक का नियंत्रण किसी विदेशी संस्था को सौंपने का फैसला सार्वजनिक जवाबदेही और राष्ट्रीय हित, दोनों के नजरिए से सही नहीं है।
संगठन ने बैंक के पिछले सालों का ब्योरा भी रखा है। रिज़र्व बैंक के तब के गवर्नर डॉ. रघुराम राजन के कार्यकाल में एसेट क्वालिटी रिव्यू शुरू हुआ था। उसके बाद बैंक के डूबे हुए कर्जों की असली हालत सामने आई। फिर 2016 से 2020 के बीच बैंक को घाटा झेलना पड़ा। इसी दौरान केंद्र सरकार और भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी) ने बैंक में 46 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा की पूंजी लगाई। संगठन का कहना है कि उस मुश्किल दौर में भी कर्मचारियों ने ग्राहकों का भरोसा टूटने नहीं दिया और बैंक की सेवाएं चालू रखने की कोशिश की।
संगठन की ओर से दिए गए आंकड़ों के मुताबिक पिछले छह साल में बैंक ने 30 हजार 106.43 करोड़ रुपये का शुद्ध मुनाफा कमाया है। सकल एनपीए यानी सकल अनुत्पादक संपत्तियों का अनुपात 2018 में 31.78 प्रतिशत था, जो अब घटकर 2.30 प्रतिशत रह गया है। शुद्ध एनपीए 0.16 प्रतिशत है। कैपिटल एडेक्वेसी रेशियो 26.38 प्रतिशत और प्रॉविजन कवरेज रेशियो 99.31 प्रतिशत बताया गया है। कर्मचारियों की दलील है कि जब बैंक की आर्थिक हालत सुधर चुकी है, तब निजीकरण का फैसला नहीं लेना चाहिए।
कर्मचारी संगठन ने यह भी कहा है कि बैंक का भविष्य सिर्फ आर्थिक मुनाफे के पैमाने पर तय नहीं होना चाहिए, क्योंकि बैंक को सार्वजनिक निवेश और कर्मचारियों की मेहनत ने फिर से खड़ा किया है। उसकी मांग है कि बैंक का सार्वजनिक क्षेत्र वाला स्वरूप बना रहे और ग्राहकों व जमाकर्ताओं के हित सुरक्षित रखे जाएं। हड़ताल का दूसरा दिन मंगलवार, 3 नवंबर को है। कर्मचारी निजीकरण का फैसला वापस लेने की अपनी मांग पर कायम हैं।
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