हेमा मालिनी ने खोला धापेवाड़ा का हैंडलूम प्रोजेक्ट, 5 हजार महिलाओं को काम देने का लक्ष्य
धापेवाड़ा टेक्सटाइल उद्योग प्रोड्यूसर कंपनी की नई इमारत का लोकार्पण हुआ। गडकरी ने परंपरागत हैंडलूम को फिर बढ़ावा देने की बात कही।
तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं
नागपुर के धापेवाड़ा में धापेवाड़ा टेक्सटाइल उद्योग प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड की नई इमारत का लोकार्पण हुआ। साथ ही हैंडलूम उद्योग की औपचारिक शुरुआत भी हुई। फीता काटने का काम अभिनेत्री और सांसद हेमा मालिनी ने किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने की।
गडकरी ने समारोह में कहा कि पहले हलबा आदिवासी समाज के हर घर में हैंडलूम हुआ करता था, लेकिन वक्त के साथ यह परंपरा खत्म होने की कगार पर पहुंच गई। इसी हाथकरघा उद्योग को उसका पुराना वैभव लौटाने और बुनकर समाज की महिलाओं को रोजगार के नए मौके देने के लिए धापेवाड़ा टेक्सटाइल परियोजना शुरू की गई है। परियोजना के तहत 5 हजार महिलाओं को रोजगार देने का लक्ष्य रखा गया है।
गडकरी के मुताबिक इस पहल की शुरुआत 2021 में हुई थी और तभी महिलाओं को ट्रेनिंग दी गई थी। शुरू में बाजार को लेकर मन में शंकाएं थीं, लेकिन क्वालिटी सुधरने के बाद अब प्रोडक्ट की मांग तेजी से बढ़ी है। उत्पादन बढ़ाने के लिए गड़चिरोली और वाशिम जिलों में भी केंद्र शुरू किए गए हैं। आगे खापा में भी प्रोजेक्ट शुरू करने की योजना है। एआई के जरिए धापेवाड़ा टेक्सटाइल को दुनिया भर में पहुंचाने की कोशिश है।
धापेवाड़ा को विदर्भ का 'मिनी पंढरपुर' कहा जाता है, जो भगवान विट्ठल-रुक्मिणी की आस्था से जुड़ा अहम तीर्थस्थल है। यहां की सदियों पुरानी हथकरघा बुनकरी भी इलाके की समृद्ध परंपरा का हिस्सा है और कई परिवार पीढ़ियों से इससे जुड़े हैं। नई इमारत में बुनकरों के लिए ट्रेनिंग, कामकाज की जगह और उत्पादन से जुड़ी सुविधाएं एक साथ तैयार की जा रही हैं। पूरी पहल में महिलाओं की भागीदारी और आर्थिक आत्मनिर्भरता को खास अहमियत दी गई है। बेकार हो जाने वाले कपड़ों से बनी दरियां और मैट इन महिलाओं के हुनर की मिसाल बन रहे हैं।
पाचगांव हथकरघा परियोजना के जरिए अब तक 350 से ज्यादा महिलाओं को और धापेवाड़ा टेक्सटाइल उद्योग प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड के जरिए 500 से ज्यादा महिलाओं को स्थानीय स्तर पर रोजगार मिला है।
हेमा मालिनी ने पूरे प्रोजेक्ट को बारीकी से देखा और जमकर तारीफ की। उन्हें जो साड़ी सबसे ज्यादा पसंद आई, वह गडकरी ने उन्हें तोहफे में दी। हेमा मालिनी ने कहा कि नागपुर से उनका बहुत पुराना और अटूट रिश्ता है। उन्होंने गडकरी की नई सोच की तारीफ की और कहा कि धापेवाड़ा टेक्सटाइल से महिलाओं को रोजगार तो मिल ही रहा है, फैशन शो जैसे जरिए से अलग-अलग इलाकों की पारंपरिक साड़ियों को अंतरराष्ट्रीय मंच भी मिल रहा है।
केंद्रीय वस्त्र उद्योग मंत्री गिरिराज सिंह ने कहा कि गडकरी सड़क हो, खेती हो या कपड़ा उद्योग, जो भी काम हाथ में लेते हैं, उसे पूरा करके ही छोड़ते हैं। उनके मुताबिक कपड़ा उद्योग में रोजगार पैदा करने की बहुत क्षमता है और धापेवाड़ा प्रोजेक्ट इसमें मील का पत्थर साबित होगा। उन्होंने भरोसा जताया कि इस प्रोजेक्ट से बुनकर परिवारों को सालभर हर महीने 29 से 30 हजार रुपये तक की नियमित आमदनी हो सकेगी।
महाराष्ट्र के वस्त्र उद्योग मंत्री संजय सावकारे ने कहा कि गडकरी ने धापेवाड़ा को नई वैश्विक पहचान दी है और फैशन शो से पारंपरिक कला की मार्केटिंग को बढ़ावा मिलेगा।
कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण मुंबई की पेशेवर मॉडलों का फैशन शो रहा। करवतकाठी तसर सिल्क, सिल्क कॉटन और पट्टी किनार कॉटन साड़ियों के डिजाइन दर्शकों को खूब पसंद आए। जब धापेवाड़ा की स्थानीय बुनकर महिलाएं मुंबई की मॉडलों के साथ रैंप पर उतरीं, तो पूरा हॉल तालियों से गूंज उठा। समारोह में राजीव पोतदार, कांचन गडकरी, चरण सिंह ठाकुर, समीर मेधे, नीता ठाकरे और लीला हाथीबेड भी मौजूद थे।
कमेंट
अभी कोई कमेंट नहीं। पहले आप लिखिए।