गुरूवार, 5 नवंबर 2026

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हैंडलूम कपड़े पसंद, पर धोने के डर से रोज़ नहीं पहनते जेन ज़ी और मिलेनियल्स

कल्चर PT24 संस्कृति डेस्क

गोदरेज अप्लायंसेस के सर्वे में 95 प्रतिशत युवाओं ने हैंडलूम पहनने पर गर्व जताया, लेकिन कपड़े खराब होने का डर उन्हें रोज़ के इस्तेमाल से रोक रहा है।

भारत का पारंपरिक हैंडलूम, यानी हथकरघा कपड़ा उद्योग एक बार फिर नई ताकत के साथ उभर रहा है। देश के जेन ज़ी (Gen Z) और मिलेनियल्स (Millennials) में हैंडलूम कपड़ों का शौक साफ़ बढ़ता दिख रहा है। लेकिन गोदरेज अप्लायंसेस की एक ताज़ा स्टडी बताती है कि एक चिंता नौजवानों को इन कपड़ों का रोज़ इस्तेमाल करने से रोक रही है: कपड़े खराब न हो जाएं, इसलिए इन्हें धोएं कैसे?

गोदरेज एंटरप्राइजेज ग्रुप के अप्लायंसेस कारोबार ने ट्वेंटीफाई इंडिया (Twentify India) के साथ मिलकर "द हैंडलूम डिलेमा" (Handloom Dilemma) नाम से यह ग्राहक सर्वे कराया था।

सर्वे में शामिल 95 प्रतिशत जेन ज़ी और मिलेनियल लोगों ने कहा कि हैंडलूम कपड़े पहनना भारतीय संस्कृति और परंपरा की निशानी है और उन्हें इस पर गर्व है। फास्ट फ़ैशन (Fast Fashion) के दौर के बाद अब नौजवानों का झुकाव पारंपरिक हथकरघा कपड़ों की तरफ़ तेज़ी से बढ़ रहा है। पिछले 2 से 3 साल के मुकाबले 88 प्रतिशत से ज़्यादा युवा अब हैंडलूम कपड़ों की ओर काफ़ी खिंच रहे हैं।

फिर भी ये कपड़े ज़्यादातर रोज़ नहीं पहने जाते। युवा इन्हें मुख्य रूप से त्योहारों, पारिवारिक कार्यक्रमों या खास मौकों पर पहनना पसंद करते हैं। करीब 70 प्रतिशत लोग हैंडलूम सिर्फ़ पारिवारिक कार्यक्रमों में ही पहनते हैं।

असली अड़चन धुलाई है। कपड़े खरीदने और पहनने की इच्छा के बावजूद उनकी देखभाल और धोने का तरीका (Washing Anxiety) युवाओं की सबसे बड़ी परेशानी बन गया है। ज़्यादातर युवा मानते हैं कि मशीन में धोने से नाज़ुक हैंडलूम कपड़ा खराब हो जाएगा, इसलिए वे घर पर हाथ से धोना पसंद करते हैं।

खराब होने के डर से 50 प्रतिशत से ज़्यादा युवा इन कपड़ों को 2 से 3 बार पहनने के बाद ही धोते हैं। कई लोग धुलाई को लंबे समय तक टालते रहते हैं, या सिर्फ़ दाग साफ़ करके अथवा हवा में सुखाकर दोबारा पहन लेते हैं। 97 प्रतिशत युवाओं ने साफ़ कहा कि अगर हैंडलूम कपड़े मशीन में सुरक्षित और आसानी से धोए जा सकें, तो वे ज़्यादा हैंडलूम कपड़े खरीदेंगे और नियमित पहनेंगे।

गोदरेज अप्लायंसेस ने 1958 में भारत का पहला रेफ्रिजरेटर बनाया था। वॉशिंग मशीन, एसी और माइक्रोवेव ओवन समेत कई उत्पादों में कंपनी ने ग्राहकों की ज़रूरत और पर्यावरण के अनुकूल तकनीक (Planet-centric design) का तालमेल बिठाया है। देश में उसके 950 से ज़्यादा सर्विस सेंटर और 4000 से ज़्यादा 'स्मार्टकेयर' विशेषज्ञ हैं। इस सर्वे के आधार पर कंपनी का ज़ोर आगे नाज़ुक हैंडलूम कपड़ों की सुरक्षित धुलाई के आसान उपाय खोजने पर रहेगा।

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