गोंदिया में जमीन अधिग्रहण रद्द करने की मांग, किसान संगठन की आंदोलन की चेतावनी
किसान संगठन (रघुनाथ पाटील प्रणीत) के विदर्भ अध्यक्ष लक्ष्मीकांत कौठकर ने गोंदिया जिले में भूमि अधिग्रहण रद्द न होने पर पूरे विदर्भ में आंदोलन की चेतावनी दी।
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गोंदिया: किसान संगठन (रघुनाथ पाटील प्रणीत) के विदर्भ अध्यक्ष लक्ष्मीकांत कौठकर ने पत्रकार वार्ता में चेतावनी दी कि गोंदिया जिले में किसानों की उपजाऊ जमीन का भू-अधिग्रहण अगर सरकार ने तुरंत रद्द नहीं किया, तो विदर्भ में तीव्र जन आंदोलन छेड़ा जाएगा। कौठकर ने कहा कि अंग्रेजों के जमाने के भूमि अधिग्रहण कानून में 2013 में सुधार हुआ, फिर भी कोई किसान अपनी जमीन देने को तैयार न हो तो उससे न्याय मांगने का अधिकार इस कानून ने छीन लिया है। उनका कहना है कि गोंदिया जिले की उपजाऊ जमीनों पर बलपूर्वक भू-अधिग्रहण चल रहा है।
कौठकर के मुताबिक 2013 के कानून में जमीन के अधिग्रहण के लिए कम से कम 70 प्रतिशत किसानों की सहमति जरूरी होती है। उन्होंने आरोप लगाया कि 2018 में तत्कालीन सरकार ने संशोधन करके "विशेष कारण" दिखाया और सहमति लिए बिना भू-अधिग्रहण का अधिकार अपने पास ले लिया। कौठकर ने कहा कि गुदमा, दागुटोला, खमारी, हरबटोला, तुमखेडा खुर्द, कारंजा, डव्वा, गनखेडा, हिरडामाली और गोरेगाव गांवों में भू-अधिग्रहण का काम तेजी से चल रहा है और इससे स्थानीय किसानों में तीव्र असंतोष है।
उन्होंने सवाल उठाया कि बड़े शहरों में विकास कार्य करते समय सरकार अंडरपास जैसे विकल्प खोजती है, तो गांवों के कमजोर और गरीब किसानों की उपजाऊ जमीन बचाने के लिए ऐसे विकल्प क्यों नहीं अपनाए जाते। कौठकर ने कहा कि ये किसान सदियों से इसी पुरखों की जमीन पर गुजर-बसर कर रहे हैं। उनका कहना था कि सरकार को जबरदस्ती जमीन छीनने के बजाय पड़ती जमीन पर विचार करना चाहिए।
कौठकर ने केंद्र और राज्य सरकार की दूसरी नीतियों पर भी कड़ी आलोचना की। उनके मुताबिक आवश्यक वस्तु कानून की वजह से कृषि उपज के आयात-निर्यात पर पाबंदी लगाकर भाव गिराए जा रहे हैं, जबकि वन्यजीव संरक्षण कानून 1972 से किसानों का भारी नुकसान हो रहा है। उन्होंने कहा कि हिंसक वन्यजीवों के हमले बढ़े हैं और बार-बार निवेदन व आंदोलन के बावजूद सरकार जानबूझकर इसकी अनदेखी कर रही है, ऐसा उनका आरोप है।
कौठकर ने कहा कि पूरे विदर्भ और महाराष्ट्र में सूखे के हालात हैं। उनके मुताबिक बैंक अधिकारी कर्जदार किसानों का अपमान कर रहे हैं और सरकार थोड़ी सी मदद देकर मुक्त हो गई है। उन्होंने यह भी कहा कि पानी का संकट होते हुए अधिकारी खेत में कौन सी फसल लेनी है इसकी सलाह देते हैं, पर कारखानों का पानी बंद नहीं करते। गांव-गांव में लग रहे स्मार्ट मीटर से आम नागरिक और किसान बहुत तनाव में हैं, ऐसा भी उन्होंने बताया।
कौठकर ने यह भी कहा कि राज्य मार्गों के सीमेंट रोड बनाते समय सार्वजनिक निर्माण विभाग (PWD) के अधिकार हटाकर महाराष्ट्र राज्य सड़क विकास महामंडल (MSRDC) को दे दिए गए हैं। तालुका स्तर पर PWD का दफ्तर होने से लोगों के लिए शिकायत करना आसान था, लेकिन MSRDC का मुख्य दफ्तर नागपुर में है, इसलिए आम आदमी शिकायत करने नहीं जा पाता। उन्होंने आरोप लगाया कि ठेकेदार घटिया काम कर रहे हैं और अधिकारी उनका बचाव कर रहे हैं।
आखिर में लक्ष्मीकांत कौठकर ने अंतिम चेतावनी देते हुए कहा कि किसानों पर हो रहे इस अन्याय पर अगर सरकार ने तुरंत गंभीरता से संज्ञान नहीं लिया और गोंदिया जिले का भू-अधिग्रहण रद्द नहीं किया, तो किसान संगठन पूरे विदर्भ में व्यापक और तीव्र आंदोलन खड़ा करेगा। इस मौके पर संगठन के अफमल भास्कर, अमित अग्रवाल, एल. डी. चंद्रिकापुरे, धनराज बिसेन, लोकचंद टेंभरे, दीपक टेंभुर्णे, संतोष लिल्हारे, अजय खानोरकर, अश्विन पटले, दिलीप पाटील, बाबूलाल उके, राजकुमार पटले, भारती तुरकर, भूमेश्वर बावनकर, रतन निर्विकार समेत कई पदाधिकारी और कार्यकर्ता बड़ी संख्या में मौजूद थे।