सोम‌वार, 26 अक्टूबर 2026

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गोंदिया के KTS अस्पताल में साढ़े आठ साल से रोज 700 लोगों को मुफ्त खाना

ताप्ती सेवा समिति की नि:शुल्क भोजन सेवा ने 3000 दिन पूरे किए, समारोह में समिति के कार्यकर्ताओं का सम्मान हुआ।

गोंदिया के KTS अस्पताल में साढ़े आठ साल से रोज 700 लोगों को मुफ्त खाना तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं

गोंदिया के कुंवर तिलक सिंह (KTS) जिला सामान्य अस्पताल परिसर में भूखों को खाना खिलाने की एक सेवा ने अपने 3000 दिन पूरे कर लिए हैं। यह करीब साढ़े आठ साल का सफर है। कहा जाता है कि प्यासे को पानी पिलाने और भूखे को भोजन कराने से बड़ा कोई पुण्य नहीं होता, और यह सेवा उसी सोच की मिसाल बताई जा रही है।

यह नि:शुल्क भोजन सेवा ताप्ती सेवा समिति चलाती है। समिति अस्पताल में भर्ती लाचार मरीजों और उनके परिजनों के लिए खाने का इंतजाम करती है। 3000 दिन पूरे होने के मौके पर संस्था ने एक मार्गदर्शन एवं सम्मान समारोह रखा।

समारोह की प्रस्तावना रखते हुए संस्था के अध्यक्ष कालूराम अग्रवाल ने बताया कि अस्पताल में दाखिल मरीजों और उनके परिजनों को हर रोज दोपहर और शाम, दोनों वक्त गर्मागर्म, शुद्ध सात्विक और पौष्टिक भोजन पूरे आदर के साथ परोसा जाता है। रोजाना करीब 700 जरूरतमंद इस मुफ्त भोजन सेवा का फायदा उठा रहे हैं। उन्होंने यह भी बताया कि इसके साथ संस्था दिव्यांगजनों की सेवा के लिए एक खास उपक्रम भी चला रही है।

कार्यक्रम में धर्म, समाज और राजनीति से जुड़े बड़े चेहरे एक साथ पहुंचे। मुख्य अतिथि के तौर पर पूज्य साईं टेऊंराम आश्रम के महंत भोलाराम जी मौजूद रहे। नगराध्यक्ष सचिन शेंडे भी आए। स्थानीय विधायक विनोद अग्रवाल की प्रतिनिधि के रूप में उनकी धर्मपत्नी सविता अग्रवाल खास तौर पर शामिल हुईं।

मंच पर बैठे सभी मेहमानों ने ताप्ती सेवा समिति की इस निस्वार्थ सेवा की खुले दिल से तारीफ की। वक्ताओं ने कहा कि अस्पताल की भागदौड़ में जब अपने भी हिम्मत हार जाते हैं, तब ताप्ती सेवा समिति परिवार की मजबूत ढाल बनकर खड़ी होती है। उनका कहना था कि 3000 दिनों तक हर दिन दो वक्त चूल्हा जलाकर सैकड़ों भूखों को खाना परोसना कोई साधारण बात नहीं है, बल्कि यह ईश्वरीय संकल्प का साफ सबूत है।

मेहमानों ने समिति के सभी निस्वार्थ कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों का हौसला बढ़ाया। उन्होंने इस सेवा यज्ञ को ऐसी मिसाल बताया, जिससे दूसरे लोग भी सीख ले सकते हैं।

धर्म नगरी गोंदिया की धरती से शुरू हुआ यह अन्नपूर्णा अभियान आज पूरे देश के लिए प्रेरणा बन चुका है, ऐसा कार्यक्रम में कहा गया।

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