बुधवार, 4 नवंबर 2026

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पानी के संकट के बीच NMC का 365 टैबलेट पर 1.48 करोड़ रुपये खर्च करने का प्रस्ताव

पानी के संकट के बीच NMC का 365 टैबलेट पर 1.48 करोड़ रुपये खर्च करने का प्रस्ताव तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं
शहर PT24 टीम

नागपुर महानगरपालिका 365 एंड्रॉइड टैबलेट खरीदना चाहती है, जबकि तोतलाडोह में पानी तेजी से घटा है और पुराने टैबलेट का हिसाब नहीं मिला है।

नागपुर: शहर में पानी की किल्लत गहराती जा रही है और जलाशयों का स्तर तेजी से नीचे जा रहा है। ऐसे में नागपुर महानगरपालिका (NMC) ने पार्षदों और नगर निगम अधिकारियों के लिए 365 एंड्रॉइड टैबलेट खरीदने का प्रस्ताव तैयार किया है। इस पर कुल 1.48 करोड़ रुपये खर्च होंगे। प्रस्ताव सामने आते ही खर्च की प्राथमिकता, जवाबदेही और पिछली बार बांटे गए टैबलेट के हाल पर सवाल उठने लगे हैं।

प्रस्ताव के मुताबिक एक टैबलेट की कीमत 38,999 रुपये है और 1.48 करोड़ रुपये का अनुमानित खर्च टैक्स मिलाकर है। स्थायी समिति की बैठक का एजेंडा मंगलवार को जारी हुआ और प्रस्ताव शुक्रवार की बैठक में विचार के लिए रखा गया है। नगर निगम आयुक्त इसे 13 अक्टूबर को मंजूरी दे चुके हैं।

खरीद ई-टेंडरिंग से होगी। टैबलेट के साथ डिजिटल पेन भी मिलेंगे। ये महापौर, उपमहापौर, स्थायी समिति के अध्यक्ष, सत्ता पक्ष और विपक्ष के नेताओं और सभी पार्टियों के पार्षदों को दिए जाएंगे। नगर निगम के अधिकारियों को भी मिलेंगे, जिनमें विभाग प्रमुख, कार्यकारी अभियंता (Executive Engineer) और जूनियर इंजीनियर शामिल हैं।

सूचना प्रौद्योगिकी विभाग ने इस खरीद का बचाव किया है। विभाग का कहना है कि वर्क मॉड्यूल, ई-ऑफिस सिस्टम, MIS पोर्टल, वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग और दूसरी तकनीकी एप्लीकेशन पर काम की निर्भरता बढ़ती जा रही है। प्रशासन ने यह भी वजह बताई है कि लैपटॉप देने की पुरानी सेवा बंद हो चुकी है, इसलिए अब टैबलेट की तरफ जाना पड़ रहा है। खबर में यह भी कहा गया है कि सभा ने बाद में खरीद के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी।

असली सवाल यह है कि पुराने टैबलेट का क्या हुआ। स्थायी समिति के तत्कालीन अध्यक्ष अविनाश ठाकरे के कार्यकाल में नगर निगम ने पार्षदों को टैबलेट खरीदकर बांटे थे। नए एजेंडा नोट में खुद माना गया है कि उनमें से ज्यादातर टैबलेट आखिर में चलना बंद हो गए। कई पार्षदों को उन्हें ठीक से चलाने में भी दिक्कत आई।

इसके बावजूद प्रशासन वही काम अब और बड़े पैमाने पर दोहराने जा रहा है। प्रस्ताव में ऐसा कोई भरोसेमंद खाका भी नहीं दिखता कि नए टैबलेट सच में इस्तेमाल होंगे, उनकी देखभाल होगी और उन पर नजर रखी जाएगी। वरना ये भी महंगे इलेक्ट्रॉनिक बोझ बनकर रह जाएंगे।

खर्च का वक्त भी खटकने वाला है। नागपुर का मुख्य जल स्रोत तोतलाडोह जलाशय 31 अक्टूबर को अपनी जीवित जल क्षमता के सिर्फ 31.34 प्रतिशत पर आ गया। पिछले साल इसी तारीख को यह 92.42 प्रतिशत था। पानी की उपलब्धता में इतनी तेज गिरावट से आने वाली किल्लत के लिए शहर की तैयारी पर चिंता बढ़ी है। पानी बचाने, लीकेज रोकने और जल प्रबंधन को सुधारने पर फौरन ध्यान देने की जरूरत है।

नागपुर के लोगों के सामने सीधा सवाल है कि जब शहर सबसे जरूरी चीज पानी के लिए जूझ रहा है, तब नगर निगम करोड़ों रुपये ऐसे गैजेट पर खर्च करने को क्यों तैयार है, जिनके पुराने रूप काम नहीं आए। करदाताओं को पुराने टैबलेट के हश्र, उनके इस्तेमाल, दोबारा खरीद की वजह और आगे ऐसी नाकामी से बचने के इंतजाम पर जवाब चाहिए।

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