गौमाता पर बनी मराठी फिल्म 'धाराऊ' को चंबल फिल्म फेस्टिवल में बेस्ट फीचर फिल्म का अवॉर्ड
पुणे, बुलढाणा, लातूर, परभणी और विदर्भ-मराठवाड़ा में 'धाराऊ' के शो हाउसफुल हैं। फिल्म को अब तक 26 राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार मिल चुके हैं।
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मराठी फिल्म 'धाराऊ' इन दिनों सोशल मीडिया पर खूब चर्चा में है। "धाराऊ... वह गाय नहीं... माँ है!" इस लाइन वाली इस फिल्म के शो पुणे, बुलढाणा, लातूर और परभणी के साथ-साथ विदर्भ और मराठवाड़ा में भी हाउसफुल चल रहे हैं।
फिल्म को चंबल इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में "सर्वोत्कृष्ट फीचर फिल्म" का अवॉर्ड मिला है। इससे पहले भी फिल्म को कुल 26 राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार मिल चुके हैं। खास बात यह है कि पाकिस्तान के पेशावर इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में उसे 'बेस्ट डेब्यू फीचर फिल्म' का पुरस्कार भी दिया गया है।
'धाराऊ' के डायरेक्टर मनीष शिंदे की यह पहली फिल्म है। फिल्म में एक भी बड़ा स्टार नहीं है। सारे कलाकार गाँव-गाँव से आए नए चेहरे हैं। मेहनत, जिद और सपनों के दम पर मनीष शिंदे ने यह फिल्म रिलीज की। थिएटरों में उनके साथ कई और मराठी फिल्में भी लगी हैं, फिर भी फिल्म की अलग कहानी की वजह से उन्हें कई स्क्रीन मिले। यह कामयाबी सिर्फ डायरेक्टर की नहीं, पूरी टीम की भी है।
पुरस्कार के बारे में डायरेक्टर मनीष सुरेश शिंदे कहते हैं, "गौमाता पर आधारित मराठी की यह पहली फिल्म 'धाराऊ' है। इससे पहले मैं 25 से ज्यादा म्यूजिक एल्बम और टीवी ऐड बना चुका हूँ। डायरेक्टर के तौर पर पहली फिल्म करते वक्त मन पर दबाव था, लेकिन जिद थी। गौमाता के प्रति मेरी श्रद्धा भी थी। इसलिए सब कुछ ठीक से बैठ गया।"
वे आगे कहते हैं कि फिल्म थिएटर में हाउसफुल चल रही थी और उसी दौरान चंबल इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में "सर्वोत्कृष्ट फीचर फिल्म" का अवॉर्ड मिला, इसलिए उनकी खुशी दोगुनी हो गई है। उनके मुताबिक सभी दर्शकों से अपनी कला के लिए प्यार और तारीफ मिल रही है।
मनीष शिंदे ने सबसे अपील की है कि वे एक बार थिएटर में जाकर 'धाराऊ' जरूर देखें और अपनी प्रतिक्रिया उन्हें बताएँ।
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