एनटीए का दफ्तर ओखला से मिंटो रोड पहुंचा, 5,000 विशेषज्ञों का नया पैनल बना
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पेपर लीक के सवालों के बाद नेशनल टेस्टिंग एजेंसी ने मुख्यालय बदला, विशेषज्ञों का नया पैनल बनाया और सुरक्षा के इंतजाम कड़े किए हैं।
जेईई, नीट और सीयूईटी जैसी बड़ी दाखिला परीक्षाएं करवाने वाली नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए) इन दिनों बड़े बदलाव के दौर से गुजर रही है। पेपर लीक और कई गड़बड़ियों पर सवाल उठने के बाद सरकार और एनटीए ने परीक्षा व्यवस्था को 'फुल-प्रूफ' बनाने की तैयारी की है। इसी के तहत एजेंसी ने अपना पुराना तरीका छोड़कर जमीनी स्तर पर बड़ा प्रशासनिक फेरबदल शुरू किया है। उम्मीद है कि आगे चलकर इससे पारदर्शिता और सुरक्षा में सुधार होगा।
इस सुधार मुहिम में सबसे पहले एनटीए का दफ्तर बदला गया है। एजेंसी का मुख्यालय दक्षिण-पूर्वी दिल्ली के ओखला से हटाकर नई दिल्ली के मिंटो रोड पर भारत सरकार प्रेस बिल्डिंग में ले जाया गया है। नई जगह और आधुनिक सुरक्षा इंतजामों के साथ एजेंसी ने पूरे देश से करीब 5,000 शिक्षाविदों, वैज्ञानिकों, विषय विशेषज्ञों और अनुवादकों का नया पैनल भी तैयार किया है। मकसद सिर्फ दफ्तर बदलना नहीं है, बल्कि यह पक्का करना है कि हर परीक्षा पारदर्शी तरीके से हो।
एनटीए ने देश की बड़ी परीक्षाओं के प्रश्नपत्र बनाने, उनकी जांच करने और अनुवाद की क्वालिटी परखने के लिए इन 5,000 विषय विशेषज्ञों को अपने साथ जोड़ा है। इन शिक्षाविदों और वैज्ञानिकों को चार लेवल की बेहद सख्त वेरिफिकेशन प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है। पहले चरण में आवेदन करने वालों के क्रेडेंशियल्स, पढ़ाई की योग्यता और अनुभव देखे जाते हैं। इसके बाद विषय विशेषज्ञों की एक कमेटी हर उम्मीदवार का पिछला रिकॉर्ड और पेपर बनाने का अनुभव जांचती है।
इस साल मई में नीट यूजी पेपर लीक और दूसरी गड़बड़ियों को लेकर पूरे देश में तीखे प्रदर्शन हुए थे। उसके बाद सरकार और शिक्षा मंत्रालय ने सख्त कदम उठाए और एनटीए में बड़े पैमाने पर फेरबदल किया। करीब 600 संदिग्ध या पुराने विषय विशेषज्ञों को बाहर कर दिया गया। उस अनुभव से सीख लेते हुए अब एजेंसी एक बड़ा प्रश्न बैंक बना रही है। नई व्यवस्था में सवाल इतने रैंडम होंगे कि कोई भी पेपर सेटर या ट्रांसलेटर उन्हें पहले से याद नहीं रख पाएगा और न ही उन्हें लीक कर पाएगा।
एनटीए के इस बड़े बदलाव से छात्रों को राहत मिलने की उम्मीद है। ओखला से मिंटो रोड के नए सरकारी कैंपस में जाने के बाद से वहां सुरक्षा के बहुत कड़े इंतजाम किए गए हैं। गोपनीय दस्तावेज सीआईएसएफ (CISF) के पहरे में रखे जाते हैं। प्रश्नपत्र बनने से लेकर उनकी छपाई और परीक्षा केंद्रों तक पहुंचने की पूरी कड़ी को डिजिटल और फिजिकल सुरक्षा के दोहरे घेरे में रखा गया है। इससे आने वाले सत्रों में परीक्षा का माहौल ज्यादा सुरक्षित, पारदर्शी और भरोसेमंद होगा।
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