मंगलवार, 6 अक्टूबर 2026

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17:59 IST

पाकिस्तानी धर्मगुरु ताहिर अशरफी ने हुथियों को कहा आतंकवादी, बोले इस्लाम से कोई रिश्ता नहीं

सऊदी अरब में हुई अंतरराष्ट्रीय परिषद में पाकिस्तान उलेमा परिषद के अध्यक्ष हाफिज मुहम्मद ताहिर अशरफी ने हुथियों पर सीधा हमला बोला।

पाकिस्तानी धर्मगुरु ताहिर अशरफी ने हुथियों को कहा आतंकवादी, बोले इस्लाम से कोई रिश्ता नहीं
एआई से बनाई गई प्रतीकात्मक तस्वीर; यह घटना का वास्तविक फोटो नहीं है | PT24

सऊदी अरब और यमन के हुथी बंडखोरों के बीच सैन्य तनाव पिछले कुछ दिनों में बहुत गंभीर मोड़ पर पहुंच गया है। इसी भड़के हुए संघर्ष के बीच एक जाने-माने पाकिस्तानी धर्मगुरु के बयान से अंतरराष्ट्रीय राजनीति और धार्मिक हलकों में नया विवाद खड़ा हो गया है। पाकिस्तान उलेमा परिषद के अध्यक्ष हाफिज मुहम्मद ताहिर अशरफी ने हुथियों को खुलेआम 'आतंकवादी' कहा है। उन्होंने तीखा आरोप लगाया कि इन बंडखोरों और उनकी हिंसक कार्रवाइयों का इस्लाम धर्म से दूर-दूर तक कोई संबंध नहीं है। (VIDEO VIRAL)

सऊदी अरब में हुई एक अंतरराष्ट्रीय परिषद में दुनिया भर से आए नामी विद्वानों, मुफ्तियों और जानकारों के सामने बोलते हुए अशरफी ने सऊदी अरब की सुरक्षा का मुद्दा बहुत आक्रामक तरीके से उठाया। 'दो पवित्र मस्जिदों की भूमि' यानी मक्का और मदीना वाले सऊदी अरब की सुरक्षा को उन्होंने पाकिस्तान के लिए बेहद संवेदनशील 'रेड लाइन' बताया। यह साफ चेतावनी उन्होंने दुनिया के सभी दोस्तों और दुश्मनों को दी।

अशरफी ने कहा कि सऊदी अरब का दुश्मन पूरे मुस्लिम उम्मा और इस्लाम का दुश्मन माना जाएगा। उन्होंने ऐलान किया कि पाकिस्तान सरकार, फौज और जनता सऊदी की हिफाजत के लिए पूरी तरह वचनबद्ध हैं।

सऊदी अरब और हुथियों की लड़ाई को अक्सर शिया और सुन्नी के बीच धार्मिक जंग का रंग दिया जाता है। लेकिन अशरफी ने इस दावे को पूरी तरह खारिज कर दिया। उनके मुताबिक यह जंग किसी दो धार्मिक पंथों या दो संप्रभु देशों के बीच नहीं है। यह एक वैध पक्ष और एक हिंसक आतंकवादी संगठन के बीच की लड़ाई है।

इसी परिषद में अशरफी ने पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्की के बीच चल रहे नए रक्षा समझौते की जोरदार तारीफ की। उन्होंने कहा कि यह तीन देशों का समझौता पूरे इलाके की सुरक्षा और मुस्लिम दुनिया की स्थिरता के लिए बहुत जरूरी है।

अशरफी के इस बयान के बाद उनके पुराने विवादित बयानों की चर्चा अंतरराष्ट्रीय मीडिया में फिर छिड़ गई है। ये वही धर्मगुरु हैं जिन्होंने 2007 में कुख्यात अल-कायदा प्रमुख ओसामा बिन लादेन की खुलेआम तारीफ की थी। तब उन्होंने लादेन को इस्लाम का सच्चा योद्धा कहा था और उसे 'सैफुल्ला' यानी अल्लाह की तलवार का खिताब देने की मांग की थी।

इसके अलावा वे पाकिस्तान के सख्त ईशनिंदा (Blasphemy) कानूनों के मजबूत समर्थक रहे हैं, जिसके लिए मानवाधिकार संगठन उन पर हमेशा सवाल उठाते रहे हैं। एक तरफ वैश्विक आतंकवाद के समर्थन का इतिहास और दूसरी तरफ हुथियों को आतंकवादी बताना, इसी को लेकर अंतरराष्ट्रीय विश्लेषक अशरफी के दोहरे रुख की आलोचना कर रहे हैं।

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