दिवेआगर के समंदर में आलंदी के आठ छात्र डूबे, एकलौता सुमित भी नहीं रहा
रायगड के दिवेआगर तट पर गुरुवार शाम सहल पर गए आलंदी के आठ विद्यार्थी पानी के बहाव में खिंचकर डूब गए।
रायगड के दिवेआगर समुद्र तट पर गुरुवार शाम आलंदी के आठ विद्यार्थियों की डूबने से मौत हो गई। ये सभी सैर-सपाटे के लिए हंसते-खेलते घर से निकले थे। समुद्र में उतरे विद्यार्थियों में से आठ पानी के बहाव में खिंच गए और उनकी जान चली गई। इस हादसे से विद्यार्थियों, उनके माता-पिता और पूरे इलाके में मातम पसरा है।
मरने वालों में सुमित भरत अहिरे भी था। उसके मामा मुकेश माळी उसे याद करते हुए अपने आंसू नहीं रोक पाए। उन्होंने बताया कि सुमित ने कभी किसी चीज की जिद नहीं की थी। पहली बार उसने दिवेआगर की सहल पर जाने की जिद की और घरवालों ने उसे इजाजत दे दी।
सुमित को इंजिनिअर बनना था। इसके लिए उसने विनर्स अकॅडमी में दाखिला लिया था और ग्यारहवीं से JEE परीक्षा की तैयारी शुरू कर दी थी। वह अपने माता-पिता का एकलौता बेटा था और पढ़ाई के साथ उनकी देखभाल भी करता था। कुछ ही दिन पहले उसका जन्मदिन भी मना था। पर दिवेआगर की यह सहल उसकी आखिरी सहल बन गई।
विनर्स अकॅडमी के 48 विद्यार्थियों और शिक्षकों का ग्रुप रायगड किले और दिवेआगर घूमने गया था। इस ग्रुप में 25 लड़के, 17 लड़कियां और छह शिक्षक थे। दिन भर घूमने के बाद सब दिवेआगर समुद्र तट पहुंचे। शाम को कुछ विद्यार्थी समुद्र में उतर गए। पानी की गहराई और लहरों के बहाव का अंदाजा न होने से कुछ बच्चे पानी में खिंच गए।
इस हादसे में राजवीर वहिले, सोहम भांडवलकर, कौस्तुभ दौंड, यश वानखेडे, कैवल्य वासनकर, तन्मय वहिले, सुमित अहिरे और प्रणव बनसोडे की मौत हुई।
अब सवाल उठ रहे हैं कि सहल की तैयारी करते वक्त विनर्स अकॅडमी ने जरूरी सुरक्षा नियमों का पालन किया था या नहीं। अकॅडमी शुरू करते समय जरूरी इजाजतें ली गई थीं या नहीं, इसकी भी जांच चल रही है। विद्यार्थियों को समुद्र में जाने की इजाजत थी या नहीं, उन्हें लाइफ जैकेट दिए गए थे या नहीं और समुद्र किनारे शिक्षकों की सीधी निगरानी कितनी थी, यह जांच में अहम होगा। यह भी देखा जा सकता है कि अकॅडमी ने ज्वार-भाटा, पानी के बहाव, सुरक्षित इलाके, स्थानीय प्रशासन की चेतावनियों और बचाव इंतजाम के बारे में पहले से जानकारी ली थी या नहीं।
यह सवाल भी उठ रहा है कि बच्चों की सुरक्षा के लिए इमरजेंसी हालात की तैयारी की गई थी या नहीं, और बचाव दल या स्थानीय लाइफगार्ड मिल सकते थे या नहीं, यह देखा गया था या नहीं। इन सब बातों की आधिकारिक जांच के बाद ही हादसे की जिम्मेदारी तय हो पाएगी। इस बीच बच्चों की मौत से उनके परिवारों पर दुख का पहाड़ टूट पड़ा है। हंसते-खेलते सहल पर गए बच्चे घर नहीं लौटे, इसलिए आलंदी इलाके में गम का माहौल है।
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