दिवेआगर हादसे के बाद रायगड के समुद्रतटों पर स्थायी सुरक्षा की पंडित पाटील की मांग
दिवेआगर में पुणे के आठ विद्यार्थियों की डूबने से मौत के बाद भाजपा नेता और पूर्व विधायक पंडित पाटील ने समुद्रतटों पर पर्यटकों की सुरक्षा के लिए स्थायी और सक्षम व्यवस्था की मांग की है।
अलीबाग: रायगड जिले के दिवेआगर समुद्रतट पर पुणे के आठ विद्यार्थियों की डूबने से मौत हो गई। इस हादसे के बाद जिले के समुद्रतटों पर पर्यटकों की सुरक्षा का सवाल फिर से उठ खड़ा हुआ है। भाजपा नेता और पूर्व विधायक पंडित पाटील ने इसी पृष्ठभूमि में प्रशासन और स्थानीय जनप्रतिनिधियों के कामकाज पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने मांग की है कि समुद्रतटों पर स्थायी और सक्षम सुरक्षा व्यवस्था खड़ी की जाए।
रायगड जिले को लंबा समुद्रतट मिला है। मुरुड, काशिद और दिवेआगर समेत कई तट पर्यटकों को खींचते हैं। पंडित पाटील का दावा है कि इन जगहों पर भारी भीड़ होने के बावजूद पर्यटकों की सुरक्षा के लिए जितने स्थायी इंतजाम चाहिए, उतने दिखाई नहीं देते।
पाटील ने बताया कि समुद्रतटों पर खतरनाक जगहों की साफ जानकारी देने वाले बोर्ड, प्रशिक्षित जीवरक्षक, पुलिस बंदोबस्त, बचाव के उपकरण और आपात स्थिति में काम करने वाली व्यवस्था जरूरी है। हाल के दिवेआगर हादसे के बाद भी समुद्रतटों की सुरक्षा पर चर्चा इन्हीं मुद्दों के इर्द-गिर्द चल रही है।
इस बीच, काशिद समुद्रतट पर पहले बचाव के लिए रोबोटिक बुई का इस्तेमाल हुआ था और उससे पर्यटकों की जान बचाई गई थी। पाटील की मांगों के संदर्भ में यह बात रेखांकित होती है कि ऐसे आधुनिक बचाव उपकरणों का इस्तेमाल दूसरे संवेदनशील समुद्रतटों पर भी बढ़ाना जरूरी है।
पंडित पाटील ने मांग की है कि राज्य सरकार रायगड के समुद्रतटों के लिए अलग, स्थायी और एकजुट सुरक्षा व्यवस्था खड़ी करे। उन्होंने साफ किया कि इस मामले में वे सरकार को आधिकारिक पत्र देकर पीछे लगे रहेंगे।
पाटील ने सरकार, प्रशासन और जनप्रतिनिधियों की भी आलोचना की। उन्होंने 2017-18 के आसपास मुरुड में पुणे के पर्यटकों के डूबने की घटना का हवाला दिया। उनके मुताबिक उस हादसे के बाद कुछ उपाय किए गए थे, लेकिन वे न काफी थे और न स्थायी किस्म के थे।
पाटील ने यह भी कहा कि सिर्फ एक वॉचटावर खड़ा कर देना या हादसे के बाद बचाव कार्य करना पर्यटकों की सुरक्षा का स्थायी हल नहीं हो सकता। उनका कहना है कि हादसे हों ही नहीं, इसके लिए पहले से रोकथाम के उपाय करना जरूरी है।
वहीं खबर है कि दिवेआगर हादसे के बाद जिला प्रशासन ने समुद्रतटों पर जीवरक्षक बढ़ाने के उपाय शुरू किए हैं। प्रशासन की ओर से बताया गया है कि ग्रामपंचायत, आपदा प्रबंधन व्यवस्था और पुलिस के जरिए सुरक्षा इंतजाम को और मजबूत करने की प्रक्रिया चल रही है।
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