शुक्रवार, 16 अक्टूबर 2026

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05:29 IST

दिवाली में एसटी का 15 फीसदी भाड़ा बढ़ाने का प्रस्ताव मंत्री सरनाईक ने ठुकराया

परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक ने दिवाली की भीड़ के लिए प्रस्तावित 15 प्रतिशत हंगामी भाड़ावृद्धि नामंजूर कर दी।

दिवाली में एसटी का 15 फीसदी भाड़ा बढ़ाने का प्रस्ताव मंत्री सरनाईक ने ठुकराया तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं

मुंबई: परिवहन मंत्री और एसटी महामंडल के अध्यक्ष प्रताप सरनाईक ने दिवाली की भीड़ के सीजन के लिए प्रस्तावित 15 प्रतिशत हंगामी भाड़ावृद्धि नामंजूर कर दी है। उन्होंने सवाल उठाया कि सूखे की मार झेल रहा किसान, महंगाई से जूझता आम आदमी और परिवार का पेट पालने में थक चुके लोग, ऐसे हालात में जनता पर भाड़े का अतिरिक्त बोझ क्यों डाला जाए।

हर साल दिवाली की भीड़ के दौरान एसटी के यात्री भाड़े में हंगामी बढ़ोतरी की जाती है। इस बार भी एसटी प्रशासन ने 1 से 15 नवंबर 2026 के बीच यात्री भाड़े में सीधे 15 प्रतिशत की बढ़ोतरी का प्रस्ताव मंत्री सरनाईक के पास भेजा था। लेकिन मंत्री का कहना था कि जो जनता पहले से आर्थिक संकट में है, उस पर और बोझ डालना ठीक नहीं है, इसलिए उन्होंने यह प्रस्ताव ठुकरा दिया।

सरनाईक ने साफ कहा, "पहले से संकटों में घिरी जनता को भाड़ावृद्धि का झटका देकर उसके जख्मों पर नमक छिड़कना मुझे मंजूर नहीं है।" इस तरह उन्होंने जनहित को पहले रखा।

उन्होंने कहा कि एसटी महामंडल को भले ही आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा हो, पर उसकी भरपाई आम यात्रियों से करना सही नहीं होगा। एसटी की लालपरी ग्रामीण महाराष्ट्र के लाखों लोगों की रोज की जिंदगी का हिस्सा है। किसान, खेत मजदूर, विद्यार्थी, नौकरीपेशा, बुजुर्ग और मेहनतकश तबके के लिए यह सस्ते सफर का बड़ा सहारा है। भाड़ा बढ़ता तो इसका सीधा असर उनके रोजमर्रा के खर्च पर पड़ता। खासकर सूखे से परेशान परिवारों के लिए यह अतिरिक्त बोझ उठाना मुश्किल हो जाता।

मंत्री सरनाईक ने भरोसा जताते हुए कहा, "यह सरकार संवेदनशील है। संकट के समय किसानों और आम जनता को बेसहारा नहीं छोड़ेगी।" उन्होंने कहा कि जनता की दिक्कतें समझकर उसे राहत देना सरकार की जिम्मेदारी है। आर्थिक हिसाब-किताब जरूरी है, लेकिन लोगों की तकलीफ और उनके जीने के संघर्ष पर भी सोचना होगा।

सरनाईक के मुताबिक एसटी महामंडल की आर्थिक दिक्कतों से निपटने के लिए दूसरे उपाय खोजने चाहिए। दूर-दराज के गांवों से लेकर शहरों तक सुरक्षित, भरोसेमंद और किफायती यात्री सेवा देना महामंडल का बुनियादी कर्तव्य है। इसलिए घाटे का बोझ सीधे यात्रियों पर डालने के बजाय दूसरे रास्तों से हल निकालने की जरूरत है।

उन्होंने कहा, "जनता के संकट के समय उसकी जेब में हाथ डालने से ज्यादा जरूरी है उसकी आंखों के आंसू पोंछना। एसटी की आर्थिक अड़चनों से निपटने के लिए दूसरे रास्ते खोजेंगे, लेकिन मुश्किल में फंसी जनता को राहत देने का कर्तव्य नहीं भूलेंगे।" इसी सोच के साथ उन्होंने प्रस्तावित भाड़ावृद्धि को नकारते हुए आम यात्रियों को राहत देने का फैसला किया।

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