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दिल्ली हाईकोर्ट से नेहा बोरा को राहत नहीं, नोटिस के खिलाफ अर्जी खारिज

दिल्ली हाईकोर्ट से नेहा बोरा को राहत नहीं, नोटिस के खिलाफ अर्जी खारिज तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं

दिल्ली हाईकोर्ट ने आइसा (AISA) की अध्यक्ष नेहा बोरा की याचिका खारिज कर दी है। इससे उन्हें कोर्ट से कोई राहत नहीं मिली। बोरा ने स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट के उस नोटिस को चुनौती दी थी, जिसमें 10 हजार रुपये का निजी मुचलका और एक जमानती पेश करने को कहा गया था। दिल्ली पुलिस ने इस मामले में उनकी याचिका का विरोध किया था।

नोटिस की बात करें तो नेहा बोरा को 17 अक्टूबर को भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 126 के तहत यह नोटिस थमाया गया था। उन्हें 19 अक्टूबर को स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट के सामने हाजिर होने के लिए कहा गया था। नोटिस में उनसे यह वजह बताने को कहा गया था कि जांच चलने के दौरान शांति बनाए रखने के लिए 10 हजार रुपये का निजी मुचलका और एक जमानती क्यों न लिया जाए।

इस नोटिस को चुनौती देते हुए बोरा ने कोर्ट से मांग की थी कि नोटिस रद्द किया जाए। साथ ही उन्होंने यह भी चाहा था कि पुलिस को निर्देश दिया जाए कि उनके खिलाफ कोई जबरदस्ती वाली कार्रवाई न की जाए।

सुनवाई के दौरान दिल्ली पुलिस की तरफ से एडिशनल सॉलिसिटर जनरल चेतन शर्मा ने याचिका का विरोध किया। पुलिस की ओर से कहा गया कि बोरा की दलीलें तथ्यों से मेल नहीं खातीं।

बोरा ने BNSS की धारा 163 के लागू होने के दायरे और घटना के वक्त उसके अमल को लेकर सवाल उठाए थे। इस पर पुलिस की दलील थी कि यह धारा लागू थी और उस वक्त पुलिस की तादाद सीमित थी।

कोर्ट ने सुनवाई में अच्छे चाल-चलन की गारंटी मांगने की प्रक्रिया पर भी टिप्पणी की। कोर्ट ने कहा कि जांच पूरी होने तक किसी शख्स से ऐसी गारंटी मांगना उस पर पाबंदी लगाने जैसा हो सकता है। इसके अलावा BNSS की धारा 126 और 130 के तहत नोटिस या आदेश जारी करने की प्रक्रिया पर भी कोर्ट ने सवाल उठाए।

22 अक्टूबर को सुनवाई के बाद कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया था। सभी पक्षों की दलीलें पूरी होने के बाद हाईकोर्ट ने याचिका खारिज कर दी। इस फैसले से नेहा बोरा को नोटिस के खिलाफ जो राहत चाहिए थी, वह नहीं मिली। नोटिस पर आगे की कार्रवाई और उससे जुड़ी कानूनी प्रक्रिया के बारे में आधिकारिक आदेश के ब्योरे अहम होंगे।

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