दिल्ली हाईकोर्ट में नेहा बोरा की याचिका पर सुनवाई, निजी मुचलके की नोटिस को चुनौती
आइसा की अध्यक्ष नेहा बोरा ने स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट की 10,000 रुपये के निजी मुचलके वाली नोटिस को हाईकोर्ट में चुनौती दी है। उनके वकील गोपाल शंकरनारायणन ने कहा कि कनॉट प्लेस के प्रदर्शन का आह्वान उन्होंने नहीं किया था।
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दिल्ली हाईकोर्ट में आइसा (AISA) की अध्यक्ष नेहा बोरा की याचिका पर सुनवाई हुई। याचिका में स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट (SEM) की उस नोटिस को चुनौती दी गई है, जिसमें उनसे 10,000 रुपये का निजी मुचलका भरने और शांति बनाए रखने को कहा गया है।
नेहा बोरा की तरफ से वकील गोपाल शंकरनारायणन ने जोरदार दलील रखी। उनका कहना था कि यह नोटिस असंवैधानिक है और कानून की नजर में भी टिकती नहीं। उन्होंने साफ कहा कि नेहा बोरा ने कनॉट प्लेस में प्रदर्शन का कोई आह्वान किया ही नहीं था।
इस पर कोर्ट ने नेहा बोरा के वकील से सवाल किया। जजों ने पूछा, "आप संविधान के अनुच्छेद 22 के तहत हाईकोर्ट में जो मुद्दा उठा रहे हैं, क्या वह धारा 135(3) के तहत मजिस्ट्रेट की जिम्मेदारी नहीं है? इस नोटिस का मकसद ही यह है कि जांच के दौरान मजिस्ट्रेट को संतुष्ट किया जाए कि मुचलका क्यों न लिया जाए। क्या हम इस पर विस्तार से सुनवाई करें, या धारा 126 की नोटिस और उसके कारणों तक ही सीमित रहें?"
जवाब में गोपाल शंकरनारायणन ने कहा, "यह नोटिस सिर्फ कॉपी-पेस्ट का मामला है। निजी मुचलके की मांग से पहले गहरी जांच करना जरूरी है। सुप्रीम कोर्ट की सात जजों की बेंच का भी यही फैसला है। जांच पूरी होने तक मजिस्ट्रेट मुचलका नहीं मांग सकते।"
वकील ने यह भी कहा कि सरकारी फैसलों के खिलाफ देश भर में प्रदर्शन हो रहे हैं। उनके मुताबिक, "मेरी मुवक्किल (नेहा बोरा) ने कभी हिंसा भड़काने की बात नहीं की। उनका रुख पूरी तरह शांतिपूर्ण था। वह सुधारों की मांग कर रही थीं और सोशल मीडिया के जरिए लोगों से जुटने की अपील कर रही थीं।"
तारीखों का ब्योरा देते हुए उन्होंने बताया कि 15 अक्टूबर को नेहा बोरा ने प्रेस क्लब में प्रेस कॉन्फ्रेंस की थी। 16 अक्टूबर को जंतर मंतर को अचानक अधिसूचित न किए जाने के विरोध में उन्होंने शाम को मंडी हाउस पर सभा रखी थी। वकील का कहना था, "इन पोस्ट से न हिंसा भड़कने की बात बनती है, न कानून टूटा और न शांति भंग हुई।"
शंकरनारायणन ने दोहराया कि कनॉट प्लेस (सीपी) का प्रदर्शन किसी दूसरे संगठन ने आयोजित किया था। नेहा बोरा ने सिर्फ मंडी हाउस के प्रदर्शन का आह्वान किया था।
नोटिस में "बिना इजाजत राष्ट्रध्वज फहराने" का जिक्र है। वकील के मुताबिक तिरंगा फहराने के लिए किसी इजाजत की जरूरत ही नहीं होती। उन्होंने यह बात भी उठाई कि नोटिस जारी करने वाले मजिस्ट्रेट (एसईएम) खुद पुलिस अधिकारी (एसीपी) हैं, और यह प्रक्रिया वरिष्ठ अधिकारियों के कहने पर शुरू की गई।
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