दीक्षाभूमि परिसर का यूनेस्को मानकों पर विकास हो, नितिन राऊत ने रखे सुझाव, पीस पार्क बनाने की मांग
पूर्व कैबिनेट मंत्री नितिन राऊत ने दीक्षाभूमि परिसर के विकास प्रारूप पर सुझाव दिए, वास्तुशिल्पी संदीप कांबले ने प्रस्तुतीकरण दिया।
नागपुर के दीक्षाभूमि परिसर का आधुनिकीकरण और सौंदर्याकरण होने जा रहा है, लेकिन इस दौरान मूल स्तूप की ऐतिहासिक वास्तुकला और संरचना को जरा भी नुकसान नहीं पहुंचना चाहिए। यह विकास यूनेस्को के विश्व धरोहर मानकों के मुताबिक ही किया जाए, ऐसा कहना है पूर्व कैबिनेट मंत्री और विधायक नितिन राऊत का।
जिला नियोजन भवन में पालक मंत्री की अध्यक्षता में एक बैठक हुई थी। इसके बाद पालक मंत्री के निर्देश पर परियोजना के वास्तुशिल्पी संदीप कांबले ने विधायक नितिन राऊत के कार्यालय में प्रस्तावित विकास प्रारूप का विस्तृत प्रस्तुतीकरण दिया।
इस मौके पर राऊत ने अलग-अलग क्षेत्रों के जानकारों और पदाधिकारियों की मौजूदगी में लंबी चर्चा की और कई अहम सुझाव रखे। उन्होंने बताया कि दीक्षाभूमि के साथ उनका पिछले 45 सालों से गहरा नाता रहा है। 'संकल्प' संस्था के जरिए उन्हें यहां 39 साल तक सेवा करने का मौका मिला। उनका कहना है कि दीक्षाभूमि सिर्फ एक इमारत नहीं है, बल्कि दुनियाभर के करोड़ों अनुयायियों के लिए वैचारिक ऊर्जा का केंद्र है।
राऊत ने सरकार की इस विकास पहल का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि दिवंगत मशहूर वास्तुशिल्पी शिवदान मला ने एशिया का एकमात्र हॉलो मूल धम्मचक्र स्तूप बनाया था, और इसकी ऐतिहासिक पवित्रता व पहचान को बचाए रखना सबसे बड़ी प्राथमिकता है।
राऊत के सुझावों में गर्भगृह से ध्यान भटकाने वाली सभी चीजें हटाकर उस जगह को विश्व स्तरीय विपश्यना केंद्र के तौर पर विकसित करने की बात शामिल है। साथ ही अंदर के हिस्से में एकरूपता के लिए दो मूर्तियों की जगह बीच में एक भव्य और तेजस्वी बुद्ध प्रतिमा लगाई जाए, जहां तथागत गौतम बुद्ध और डॉ. बाबासाहब आंबेडकर की अस्थियों के दर्शन हो सकें। स्तूप के आधार के आसपास के इलाके को जीरो-एक्सकेवेशन जोन घोषित करने का भी सुझाव दिया गया है।
इसके अलावा दीक्षाभूमि स्तूप के चारों तरफ के पूरे परिसर को 'नो कंक्रीट जोन' घोषित कर वहां प्राकृतिक और खूबसूरत 'बुद्धिस्ट पीस पार्क' बनाने की मांग रखी गई है। सेंट्रल बाजार रोड, दक्षिण अंबाझरी, बजाजनगर, उत्तर अंबाझरी और लक्ष्मीनगर चौक जैसी प्रमुख जगहों से स्तूप बिना किसी रुकावट के भव्य रूप से दिखे, इसके लिए 360 डिग्री पैनोरामिक विजुअल कॉरिडोर बनाने का सुझाव दिया गया है।
राऊत ने कहा कि इस परियोजना को असल में पूरा करने के लिए महाराष्ट्र राज्य सरकार को तुरंत केंद्र सरकार से जरूरी सलाह-मशविरा कर उस भूखंड को दीक्षाभूमि के लिए अधिग्रहित और हस्तांतरित कराने की कोशिश करनी चाहिए। ऐसा किए बिना यह परियोजना पूरी नहीं मानी जा सकती। इस मौके पर कुलदीप रामटेके, प्रदीप नगरारे, शैलेश नारनवरे, रवि बनकर, प्रशांत पाटिल, बंडोपंत टेंभुर्णे और अनिल नगरारे मौजूद थे।
खबर छप चुकी है, लेकिन लाइव थ्रेड अभी शुरू नहीं हुआ। डेस्क कोई अपडेट डालते ही वह यहाँ दिखेगा।