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22:50 IST

धाबा पुलिस ने गोजोली की आश्रमशाला में बच्चों को पढ़ाया सायबर और ट्रैफिक सुरक्षा का पाठ

धाबा उपपुलिस स्टेशन ने गोजोली की श्रीराम आदिवासी आश्रमशाला में करीब 380 विद्यार्थियों के लिए जनजागृति कार्यक्रम रखा।

धाबा पुलिस ने गोजोली की आश्रमशाला में बच्चों को पढ़ाया सायबर और ट्रैफिक सुरक्षा का पाठ तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं

गोंडपिपरी तहसील के गोजोली में स्थित श्रीराम आदिवासी आश्रमशाला में धाबा उपपुलिस स्टेशन की तरफ से जनजागृति कार्यक्रम रखा गया। मकसद यह था कि विद्यार्थियों को कानून की जानकारी मिले, वे साइबर अपराधों से बचना सीखें और महिला सुरक्षा, बाल यौन शोषण की रोकथाम और ट्रैफिक नियमों की अहमियत समझें। अलग-अलग स्कूल और कॉलेज के करीब 380 विद्यार्थियों को इस कार्यक्रम में सुरक्षा के बारे में बताया गया।

बच्चों को सिर्फ कानूनों की जानकारी नहीं दी गई। रोज़मर्रा की ज़िंदगी में क्या सावधानी रखनी है, सोशल मीडिया का सुरक्षित इस्तेमाल कैसे करना है, अनजान लोगों से क्यों सतर्क रहना है और मुसीबत के वक्त पुलिस की मदद कैसे लेनी है, इस पर भी मार्गदर्शन हुआ।

आज के डिजिटल दौर में मोबाइल और इंटरनेट का इस्तेमाल बढ़ा है और उसके साथ साइबर धोखाधड़ी का खतरा भी बढ़ रहा है। विद्यार्थियों से कहा गया कि वे किसी अनजान को ओटीपी, पासवर्ड या बैंक खाते से जुड़ी जानकारी न दें। शक वाली लिंक पर क्लिक करने, अनजान लोगों से ऑनलाइन बात करने और निजी जानकारी सोशल मीडिया पर शेयर करने से बचने की सलाह दी गई। अगर कोई साइबर अपराध का शिकार हो जाए तो घबराए बिना फौरन संबंधित एजेंसी के पास शिकायत करने की अपील भी की गई।

महिलाओं से जुड़े अपराध, बच्चों की सुरक्षा के सवाल, बाल यौन अपराध प्रतिबंधक कानून (पोक्सो) और 'गुड टच-बैड टच' जैसे अहम विषयों पर भी बच्चों को समझाया गया। किसी भी तरह का गलत स्पर्श, छेड़छाड़ या शक भरा बर्ताव दिखे तो उसे छिपाए बिना माता-पिता, शिक्षक या पुलिस को बताने को कहा गया। साथ ही यह भी कहा गया कि अपनी सुरक्षा के प्रति जागरूक रहने के साथ-साथ दूसरों की मुश्किलें समझकर सही वक्त पर मदद के लिए आगे आना चाहिए।

सड़क हादसों से बचने के लिए ट्रैफिक नियम मानना ज़रूरी बताया गया। दुपहिया चलाते वक्त हेलमेट पहनना, गाड़ी चलाते हुए मोबाइल का इस्तेमाल न करना, ट्रैफिक सिग्नल मानना और नाबालिग बच्चों का गाड़ी चलाने से दूर रहना, इन बातों की हिदायत दी गई। नशामुक्ति अभियान की अहमियत समझाते हुए नशे की लत से दूर रहने की अपील की गई। बच्चों को यह भी बताया गया कि आपात स्थिति में डायल 112 पर फोन करके पुलिस की मदद ली जा सकती है।

इस कार्यक्रम में चार शैक्षणिक संस्थाओं के विद्यार्थी शामिल हुए: श्रीराम आदिवासी आश्रमशाला, गोजोली; जनता विद्यालय तथा कनिष्ठ महाविद्यालय, धाबा; नवजीवन महाविद्यालय, गोजोली; और स्वामी विवेकानंद आश्रमशाला, किरमिरी। कुल करीब 380 विद्यार्थी और 20 शिक्षक इसमें मौजूद थे।

कार्यक्रम में धाबा उपपुलिस स्टेशन के थानेदार सहायक पुलिस निरीक्षक वीरेंद्र केदारे और चंद्रपुर के दामिनी दल की सहायक पुलिस निरीक्षक प्रज्ञा वाडेकर ने बच्चों को मार्गदर्शन दिया। धाबा के पुलिस कर्मचारी सहायक फौजदार वासुदेव आत्राम, पुलिस हवलदार जीवन आचेवार, पुलिस सिपाही धनराज सयाम, पुलिस सिपाही गजानन तुरेकर, मासूम मेश्राम और संबंधित संस्थाओं के शिक्षक भी हाज़िर थे।

इस कार्यक्रम का मुख्य मकसद विद्यार्थियों में कानून को लेकर जागरूकता लाना, उन्हें अपराध से बचाना और एक सुरक्षित समाज के लिए सजग नागरिक बनाना था। स्कूली उम्र में ही सुरक्षा नियमों की जानकारी मिल जाए तो आगे चलकर वे ज़्यादा जिम्मेदार और जागरूक नागरिक बनेंगे। इसलिए शैक्षणिक संस्थाओं में ऐसे कार्यक्रम नियमित रूप से होने चाहिए।

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