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रविवार, 8 नवंबर 2026

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देश के एक लाख से ज़्यादा स्कूल सिर्फ़ एक टीचर के भरोसे, UDISE+ की ताज़ा रिपोर्ट में खुलासा

देश के एक लाख से ज़्यादा स्कूल सिर्फ़ एक टीचर के भरोसे, UDISE+ की ताज़ा रिपोर्ट में खुलासा तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं
पढ़ाई PT24 टीम

संसद में रखी गई UDISE+ की ताज़ा रिपोर्ट के मुताबिक देश के 1,00,843 स्कूल एक ही टीचर से चल रहे हैं। इन स्कूलों में 29 लाख से ज़्यादा बच्चे पढ़ते हैं।

देश की स्कूली पढ़ाई को लेकर एक चिंता बढ़ाने वाली सरकारी रिपोर्ट सामने आई है। संसद में पेश UDISE+ की ताज़ा रिपोर्ट बताती है कि देश के 1,00,843 स्कूल आज भी सिर्फ़ एक टीचर के भरोसे चल रहे हैं। इनमें सरकारी और सहायता प्राप्त स्कूल तो हैं ही, कुछ प्राइवेट स्कूल भी शामिल हैं।

ऐसे स्कूलों में पूरा बोझ एक ही आदमी पर होता है। वही दफ़्तर का काम देखता है, बच्चों की हाज़िरी दर्ज करता है और पहली से पांचवीं तक की सारी कक्षाओं को एक साथ पढ़ाता है। पिछले शैक्षणिक वर्ष के मुकाबले ऐसे स्कूलों की संख्या 3,282 कम हुई है, यानी करीब 3 प्रतिशत की गिरावट आई है। फिर भी आंकड़ा एक लाख के पार है, और शिक्षा नीति के लिहाज़ से यह बड़ा सवाल खड़ा करता है।

राज्यों के हिसाब से देखें तो आंध्र प्रदेश इस सूची में सबसे ऊपर है। अकेले आंध्र प्रदेश में 16,357 स्कूलों में सिर्फ़ एक टीचर तैनात है। यह देश के कुल ऐसे स्कूलों के 16 प्रतिशत से ज़्यादा है। झारखंड में ऐसे 9,827 स्कूल हैं और महाराष्ट्र में 9,969। इनके अलावा कर्नाटक, हिमाचल प्रदेश और उत्तर प्रदेश के ग्रामीण इलाकों में भी ऐसे स्कूलों की अच्छी-खासी संख्या है।

इन स्कूलों में 29 लाख से ज़्यादा बच्चे पढ़ाई कर रहे हैं। बच्चों के शिक्षा के अधिकार कानून के तहत प्राथमिक स्तर पर हर 30 बच्चों पर और उच्च प्राथमिक स्तर पर हर 35 बच्चों पर एक टीचर होना ज़रूरी है। लेकिन ग्रामीण इलाकों में टीचरों के तबादलों और नियुक्तियों में खामियां हैं। इसी वजह से सबसे निचले स्तर के बच्चों को अच्छी पढ़ाई मिलने में दिक्कत आ रही है।

इस समस्या से निपटने के लिए शिक्षा मंत्रालय उन स्कूलों को पास के बड़े स्कूलों में मिला रहा है, जहां बच्चों की संख्या बहुत कम है या शून्य है। साथ ही दूरदराज़ के इलाकों के स्कूलों में अतिरिक्त टीचरों को दोबारा नियुक्त करने की नीति भी चलाई जा रही है, ताकि बच्चों की पढ़ाई का नुकसान टल सके।

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