दशहरे पर रावण दहन में बंटी को मारना चाहता था पवन, पुलिस बंदोबस्त देख बदला प्लान
छत्रपती संभाजीनगर में देवेश उर्फ बंटी दीक्षित की हत्या के आरोपी पवन पराशर को कोर्ट ने दस दिन की पुलिस कस्टडी में भेजा है।
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छत्रपती संभाजीनगर में देवेश उर्फ बंटी दीक्षित की सरेराह हत्या करने वाले पवन पराशर ने इसकी साजिश पहले ही रच ली थी। जांच में सामने आया है कि वह रामलीला मैदान पर होने वाले रावण दहन के कार्यक्रम में ही बंटी को खत्म करना चाहता था। इसके लिए वह दांडिया कार्यक्रम में जाकर रेकी भी कर आया था।
लेकिन उस कार्यक्रम में राजस्थान के राज्यपाल हरिभाऊ बागडे आने वाले थे, इसलिए वहां पुलिस का सख्त बंदोबस्त था। यह देखकर पवन ने अपना प्लान बदल दिया। शुक्रवार को कोर्ट ने उसे दस दिन की पुलिस कस्टडी सुनाई।
बंटी और पवन के बीच कई महीनों से झगड़ा चल रहा था। दोनों में दबदबे की लड़ाई थी और पवन के मन में इस बात का गुस्सा था कि इस लड़ाई में बंटी उस पर भारी पड़ रहा है। उसे मालूम था कि रामलीला मैदान के रावण दहन कार्यक्रम में बंटी सक्रिय रहता है, इसलिए उसने वहीं हमला करने की योजना बनाई थी।
दशहरे के मौके पर हुए इस कार्यक्रम में राजस्थान के राज्यपाल हरिभाऊ बागडे मुख्य अतिथि के तौर पर आने वाले थे। इसलिए रामलीला मैदान के आसपास भारी पुलिस बंदोबस्त था। दांडिया कार्यक्रम में जाकर इलाके का जायजा लेने के बाद पवन ने वहां हत्या करने का इरादा छोड़ दिया। मगर बंटी के प्रति उसका गुस्सा कम नहीं हुआ और बाद में एन-7 इलाके में बंटी की हत्या कर दी गई।
हत्या के बाद पवन सीधे पुलिस थाने नहीं गया। वह एन-8 में सरकारी अस्पताल की गली की तरफ गया। औरंगाबाद जिला सहकारी बैंक के सामने के खाली मैदान के पास से गुजरते हुए उसने चलती गाड़ी से देसी कट्टा और नौ कारतूस फेंक दिए। कट्टा सड़क किनारे की घास में गिरा, इसलिए आसानी से किसी की नजर में नहीं आया। इसके बाद पवन खुद सिडको पुलिस थाने में हाजिर हो गया।
गिरफ्तारी के बाद पूछताछ में पवन ने बताया कि हथियार कहां फेंका था। इसी जानकारी पर सब-इंस्पेक्टर अनिल नाणेकर और हवलदार मंगेश पवार की टीम ने इलाके में तलाश की और देसी कट्टा बरामद कर लिया। जांच अधिकारी योगेश गायकवाड ने हथियार जब्त होने की जानकारी दी। पुलिस इंस्पेक्टर अतुल येरमे ने बताया कि कोर्ट ने आरोपी को दस दिन की पुलिस कस्टडी सुनाई है।
सूत्रों के मुताबिक पवन लॉकअप में भी दबदबे की ही बातें कर रहा है। उसका कहना है कि बंटी हर काम में अड़ंगा डालता था और खुद को बड़ा भाई समझता था, जबकि वह भी किसी से कम नहीं है, यह उसे दिखाना था।
इस बीच शुक्रवार दोपहर सेंट्रल नाका श्मशान घाट में बंटी दीक्षित का अंतिम संस्कार किया गया। गमगीन माहौल में हुए इस अंतिम संस्कार में लोगों की बड़ी भीड़ जमा थी।
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