चंदनखेडा में 41 हेक्टेयर पर मुरुम खुदाई, परमिट पर राजस्व विभाग चुप
तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं
भद्रावती तालुका के चंदनखेडा सांजा में सर्वे नंबर 360 की करीब 41 हेक्टेयर जमीन पर बड़े पैमाने पर मुरुम की खुदाई चल रही है। यह राजस्व क्षेत्र की जमीन है। खुदाई के लिए जरूरी परमिशन ली गई है या नहीं, खुदाई की सीमा कितनी तय है, असल में कितनी खुदाई हो चुकी है और लाइसेंस किसके नाम पर है, इन सवालों पर राजस्व प्रशासन की तरफ से अब तक कोई साफ जवाब नहीं आया है। इसी वजह से पूरे मामले को लेकर शक का माहौल बन गया है।
चर्चा यह भी है कि दिन में कम और रात के अंधेरे में खुदाई किया हुआ गौण खनिज ज्यादा ढोया जा रहा है। इससे मामला और गंभीर हो गया है। अगर खुदाई वैध है, तो राजस्व विभाग को परमिशन, मंजूर क्षेत्र, खुदाई की तय सीमा, रॉयल्टी और ढुलाई के नियम सबके सामने रखने चाहिए।
गांव वाले पूछ रहे हैं कि जब इतने बड़े पैमाने पर खुदाई हो रही है और गाड़ियां आ-जा रही हैं, तो संबंधित तलाठी, मंडल अधिकारी, ग्रामसेवक और राजस्व यंत्रणा को क्या इसकी खबर नहीं है? अगर खबर है तो कार्रवाई क्यों नहीं हुई, और अगर खबर नहीं है तो स्थानीय राजस्व यंत्रणा की निगरानी व्यवस्था और अवैध गौण खनिज के लिए बना भरारी पथक आखिर करता क्या है? गांव में लोग गुस्से में कह रहे हैं कि तलाठी सच में सो रहे हैं या सोने का नाटक कर रहे हैं।
गैरकानूनी या नियम के खिलाफ खुदाई से इलाके में जमीन का कटाव, धूल का प्रदूषण, ढुलाई से सड़कों की बदहाली और पर्यावरण के संतुलन पर असर पड़ने की आशंका रहती है। इसलिए इसे सिर्फ राजस्व का मामला न मानकर पर्यावरण के नजरिए से भी जांचा जाना जरूरी है।
अगर खुदाई वैध है, तो परमिट या मंजूरी किसके नाम पर है, कितने क्षेत्र के लिए दी गई है, कितनी मात्रा में खुदाई की इजाजत है, अब तक कितनी खुदाई हुई और सरकार को कितना राजस्व मिला, इन सबके जवाब राजस्व विभाग को जनता के सामने रखने चाहिए। और अगर परमिशन के बिना खुदाई चल रही है, तो जिम्मेदार लोगों पर तुरंत कार्रवाई क्यों नहीं हो रही, यह सवाल भी उठ रहा है।
इलाके में यह चर्चा भी चल रही है कि क्या इस खुदाई को किसी राजनीतिक संरक्षण का सहारा है, या अवैध कारोबारियों और यंत्रणा के कुछ लोगों के बीच मिलीभगत है। हालांकि इस चर्चा की अब तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए प्रशासन को पारदर्शी जांच करके सच्चाई सामने रखनी चाहिए।
गांव वालों की मांग है कि मौके पर जाकर पंचनामा बनाया जाए, खुदाई की नपाई हो, परमिशन की जांच हो और ढुलाई के रिकॉर्ड खंगाले जाएं। अब पूरे इलाके की नजर भद्रावती के तहसीलदार पानमंद पर है कि वे इस मामले का संज्ञान लेकर क्या कार्रवाई करते हैं।
अवैध खुदाई को किसका संरक्षण है, और अगर खुदाई वैध है तो राजस्व विभाग उसकी मात्रा, परमिशन और नियम बताएगा या नहीं, इन सवालों के जवाब अब प्रशासन को देने ही होंगे।