चांदा इंडस्ट्रियल इस्टेट की सड़कों और गेट पर 3 करोड़ खर्च, मुनगंटीवार का आभार
चंद्रपुर की चांदा इंडस्ट्रियल को-ऑपरेटिव्ह इस्टेट में मुख्य सड़क, अंदर की सड़कें और मुख्य प्रवेशद्वार का काम पूरा हुआ है।
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चंद्रपुर की चांदा इंडस्ट्रियल को-ऑपरेटिव एस्टेट में मुख्य सड़क, अंदर की सड़कें और मुख्य प्रवेशद्वार का काम पूरा हो गया है। इन कामों पर कुल 3 करोड़ रुपये खर्च हुए। काम पूरा होने पर संस्था के संचालक मंडल ने विधायक सुधीर मुनगंटीवार का आभार माना और उन्हें इसके लिए बुलाया।
इस मौके पर मुनगंटीवार ने कहा कि इन कामों को पूरा करने का मौका मिलना उनके लिए खुशी और संतोष का पल है। संचालक मंडल ने आभार जताने के लिए बुलाया, इसकी उन्हें दिल से खुशी है। उन्होंने कहा कि सबने जो प्यार से स्वागत किया और अपनापन जताया, वह उनके लिए बहुत कीमती है, क्योंकि आखिर में इंसान के साथ वही लोग रहते हैं जो उसने कमाए हैं, उनका प्यार और उनका भरोसा।
मुनगंटीवार ने बताया कि एक जमाने में चांदा इंडस्ट्रियल एस्टेट चंद्रपुर के औद्योगिक वैभव में अहम भर जोड़ने वाला इलाका था। लेकिन जरूरी बुनियादी सुविधाओं की कमी की वजह से इस परिसर के विकास को उम्मीद के मुताबिक रफ्तार नहीं मिल सकी। आज भी कुछ काम बाकी हैं और आने वाले कुछ महीनों में उन्हें निपटाने की उनकी कोशिश रहेगी।
उन्होंने भरोसा दिलाया कि यहां के उद्यमियों को जरूरी सुविधाएं मिलें, उद्योगों के विकास के लिए अच्छा माहौल बने और चांदा इंडस्ट्रियल एस्टेट फिर से औद्योगिक क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बनाए, इसके लिए वे पूरी मजबूती से कोशिश करते रहेंगे।
मुनगंटीवार के मुताबिक चंद्रपुर शहर को 500 साल से ज्यादा की ऐतिहासिक विरासत मिली है। गोंड राजा खांडक्या बल्लाळशाह और रानी हिराई के योगदान से बने इस शहर को आधुनिक विकास से जोड़ने के लिए कई अहम प्रोजेक्ट सामने आए हैं। बांस अनुसंधान और प्रशिक्षण केंद्र, वन अकादमी, सरकारी मेडिकल कॉलेज, कैंसर हॉस्पिटल, सैनिक स्कूल और बॉटनिकल गार्डन जैसे प्रोजेक्ट से जिले के विकास के अलग-अलग क्षेत्रों को नई दिशा मिली है।
शिक्षा के क्षेत्र में भी नए मौके बनाने की कोशिश जारी है। मूल में 50 एकड़ परिसर में एसएनडीटी विश्वविद्यालय का केंद्र, पॉलिटेक्निक कॉलेज और कृषि महाविद्यालय खड़ा करने की दिशा में प्रयास हो रहे हैं। उच्च शिक्षा की सुविधाएं बेहतर करने के लिए बाबूपेठ परिसर में आठ एकड़ जगह पर गोंडवाना विश्वविद्यालय का उपकेंद्र बनाने का काम भी हाथ में लिया गया है।
आवागमन के क्षेत्र में मोरवा हवाई अड्डे का नवीनीकरण कर उसे उड़ान योजना में शामिल करने के लिए प्रयास किए गए। चंद्रपुर और बल्लारपुर रेलवे स्टेशनों के सौंदर्यीकरण से यात्रियों को बेहतर सुविधाएं देने की कोशिश हुई। बल्लारपुर-मुंबई ट्रेन को 'ताडोबा एक्सप्रेस' नाम देने की पहल से चंद्रपुर जिले की पहचान मुंबई तक पहुंचाने का प्रयास भी किया जा रहा है। मुनगंटीवार ने बताया कि इन सबके पीछे यह व्यापक सोच है कि चंद्रपुर सिर्फ ऐतिहासिक शहर न रहे, बल्कि शिक्षा, स्वास्थ्य, उद्योग, पर्यटन और आवागमन के क्षेत्रों में सक्षम आधुनिक शहर बने।
चांदा इंडस्ट्रियल एस्टेट के विकास से स्थानीय उद्यमियों को राहत मिलने और यहां की औद्योगिक गतिविधियों को रफ्तार मिलने की उम्मीद है। सड़कें और प्रवेशद्वार जैसी बुनियादी सुविधाएं औद्योगिक विकास की अहम सीढ़ी हैं। बाकी बुनियादी सुविधाओं की पूर्ति, उद्यमियों की दिक्कतों का हल और पूरे परिसर का विकास भी उतना ही जरूरी है।
मुनगंटीवार ने कहा कि आज सबने उनका आभार माना है, लेकिन वे इसे सिर्फ आभार समारोह की तरह नहीं देखते। उनके मुताबिक यह सम्मान आगे के विकास कामों को पूरा करने के लिए मिली ऊर्जा और बढ़ी हुई जिम्मेदारी है। उन्होंने चंद्रपुर के ऐतिहासिक वैभव को आधुनिक विकास से जोड़ने, औद्योगिक क्षेत्र के लंबित सवाल सुलझाने और स्थानीय उद्यमियों को जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराने के सफर को और तेज करने का संकल्प जताया।
इस मौके पर महापौर संगीता खांडेकर, डॉक्टर मंगेश गुलवाडे, राहुल पावडे, कल्पना पालिकुंडवार, पद्मकुमार नायर, मनोज सिंघवी, रवी लोणकर, सुनीता जयस्वाल, रुद्रनारायण तिवारी के साथ इंडस्ट्रियल एस्टेट का संचालक मंडल मौजूद था।