ब्रेस्ट कैंसर को हराने वाली 55 महिलाओं का सम्मान, वॉकहार्ट हॉस्पिटल्स ने किया कार्यक्रम
मुंबई सेंट्रल के वॉकहार्ट हॉस्पिटल्स में सोमवार को हुए जागरूकता कार्यक्रम में 30 से 80 साल की उम्र की 55 महिलाओं को सम्मानित किया गया।
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मुंबई: वॉकहार्ट हॉस्पिटल्स, मुंबई सेंट्रल ने सोमवार को स्तन के कैंसर पर जागरूकता का एक कार्यक्रम रखा। इसमें 30 से 80 साल की उम्र की 55 ऐसी महिलाओं का खास सम्मान किया गया, जिन्होंने स्तन के कैंसर को मात दी है। महिलाओं की जिद और हिम्मत की कद्र करना इस पहल का मकसद था।
कार्यक्रम में कैंसर का जल्दी पता चलने, वक्त पर इलाज होने और पूरे इलाज के सफर में भावनात्मक सहारे की अहमियत पर जोर दिया गया।
स्तन के कैंसर को हराने वाली ये महिलाएं एक जगह इकट्ठा हुईं। उन्होंने अपने सफर की खुशी मनाई और इस बीमारी के बारे में ज्यादा से ज्यादा जागरूकता फैलाने का संदेश दिया। यह बीमारी भारत में सार्वजनिक सेहत के सामने बड़ी चुनौती बनी हुई है।
केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय ने फरवरी 2026 में राज्यसभा में राष्ट्रीय कैंसर रजिस्ट्री कार्यक्रम (NCRP) का अनुमान पेश किया था। इसके मुताबिक 2025 में भारत में महिलाओं में स्तन के कैंसर के 2,40,381 मामले दर्ज होने का अनुमान था। इनमें महाराष्ट्र के 21,843 मामले शामिल थे। 2025 में देश में स्तन के कैंसर से महिलाओं की मौत का अनुमानित आंकड़ा 1,03,363 था। ये आंकड़े बताते हैं कि जागरूकता, वक्त पर डॉक्टर की सलाह और सही इलाज कितना जरूरी है।
वॉकहार्ट हॉस्पिटल्स, मुंबई सेंट्रल की कंसल्टेंट ऑन्कोसर्जन डॉ. मेघल संघवी ने कहा, "स्तन के कैंसर के बारे में जागरूकता का मतलब सिर्फ यह जानना नहीं कि यह बीमारी होती है। शरीर में हुए बदलाव पहचानना और देर किए बिना डॉक्टर की सलाह लेना भी उतना ही जरूरी है। स्तन में गांठ महसूस होना, आकार या बनावट में बदलाव, त्वचा पर गड्ढा पड़ना, निप्पल में बदलाव या असामान्य स्राव दिखना, इनको नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। यह समझना भी जरूरी है कि जिन महिलाओं के परिवार में यह बीमारी पहले कभी नहीं हुई, उन्हें भी स्तन का कैंसर हो सकता है।
वक्त पर जांच करवाने से बीमारी का पता चलता है और सही समय पर इलाज शुरू हो पाता है। हम अपील करते हैं कि महिलाएं अपने स्तनों की सेहत को लेकर सतर्क रहें, सेहत की चिंता बताने में झिझकें नहीं और अपनी उम्र व निजी जोखिम के हिसाब से जांच की सिफारिशों का पालन करें।"
वॉकहार्ट हॉस्पिटल्स के रीजनल बिजनेस हेड इंडिया और ग्रुप हेड इंटरनेशनल बिजनेस डॉ. वीरेंद्र चौहान ने कहा, "स्तन के कैंसर का हर किसी का सफर अलग होता है। हर बीमारी के पीछे एक इंसान होता है, जो अनिश्चितता, मुश्किल फैसलों और इलाज के दौरान आने वाली भावनात्मक चुनौतियों से जूझ रहा होता है। इस पहल से हम इन 55 महिलाओं की हिम्मत का सम्मान करना चाहते थे और अस्पताल से बाहर भी उनके सफर की जिद का जश्न मनाना चाहते थे।
इलाज की अपनी अहम भूमिका है, लेकिन भावनात्मक सहारा, अपनों का हौसला और संवेदनशीलता से दी गई स्वास्थ्य सेवा भी मरीजों के लिए इस दौर से गुजरने में उतनी ही जरूरी है। हमें उम्मीद है कि इन महिलाओं की कहानियां दूसरों को वक्त पर डॉक्टर की सलाह लेने, स्तन के कैंसर पर खुलकर बात करने और यह समझने की प्रेरणा देंगी कि इस सफर में किसी को अकेले नहीं जूझना पड़ना चाहिए।"
इस पहल के जरिए वॉकहार्ट हॉस्पिटल्स, मुंबई सेंट्रल ने स्तन के कैंसर पर जागरूकता और मरीज को केंद्र में रखकर स्वास्थ्य सेवा देने की अपनी प्रतिबद्धता फिर दोहराई। कार्यक्रम में वक्त पर डॉक्टर की सलाह, सही जांच और मरीजों के साथ उनके परिवार को भावनात्मक सहारा देने की अहमियत बताई गई। इन 55 महिलाओं की हिम्मत और जिद का सम्मान करते हुए यह संदेश भी दिया गया कि जागरूकता, वक्त पर कदम और संवेदनशील स्वास्थ्य सेवा से स्तन के कैंसर के खिलाफ सफर में बड़ा फर्क पड़ सकता है।
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