बुधवार, 7 अक्टूबर 2026

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22:17 IST

ब्रेंट क्रूड 100 डॉलर के पार, पेट्रोल-डीजल और माल ढुलाई पर महंगाई की मार का डर

अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर निकल गया है। मध्य पूर्व के तनाव से सप्लाई पर दबाव है और G7 ने करीब 10 करोड़ बैरल स्टॉक उपलब्ध कराने का फैसला किया है।

ब्रेंट क्रूड 100 डॉलर के पार, पेट्रोल-डीजल और माल ढुलाई पर महंगाई की मार का डर तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं

दुनिया के तेल बाजार में एक बार फिर बड़ी हलचल मच गई है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड का भाव 100 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर चला गया है। बुधवार को यह करीब 101 से 102 डॉलर के स्तर पर पहुंच गया।

कच्चे तेल की सप्लाई को लेकर चिंता बढ़ने की कई वजहें हैं। मध्य पूर्व में तनाव बढ़ रहा है, तेल की ढुलाई वाले रास्तों पर खतरा है और अमेरिका के खाड़ी इलाके में तूफान की आशंका भी जताई गई है। तेल महंगा होने का सीधा असर पेट्रोल और डीजल के दाम पर, ढुलाई के खर्च पर और आखिर में महंगाई पर पड़ने की संभावना है।

मध्य पूर्व के संघर्ष का असर तेल बाजार में साफ दिख रहा है। यमन के हूथी की तरफ से सऊदी अरब पर हमले हो रहे हैं और खाड़ी इलाके में जहाजों की सुरक्षा को लेकर भी फिक्र पैदा हुई है। इन वजहों से तेल की सप्लाई चेन पर दबाव बढ़ गया है।

दूसरी तरफ ईरान और अमेरिका के बीच चल रहे संघर्ष की वजह से होर्मुज जलडमरूमध्य समेत अहम समुद्री रास्तों पर अनिश्चितता बनी हुई है। बाजार के निवेशकों को डर है कि इस इलाके से होने वाली तेल की ढुलाई में रुकावट आ सकती है।

कच्चे तेल के दाम बढ़ने का असर सिर्फ पेट्रोल और डीजल तक सीमित नहीं रहता। ट्रक, बस, जहाज और हवाई जहाज का ईंधन खर्च बढ़ता है तो माल ढुलाई महंगी हो जाती है। इसके चलते अनाज, औद्योगिक सामान और रोजमर्रा की चीजों के दाम पर भी दबाव बन सकता है।

खास तौर पर डीजल के बाजार में इस वक्त काफी तंगी है। यूरोप में डीजल की कीमत एक ही दिन में 13 फीसदी बढ़ने की बात सामने आई है। इससे महंगाई घटाने की कोशिश कर रहे देशों के सामने नई चुनौती खड़ी हो गई है।

तेल के चढ़ते दाम को काबू में रखने के लिए अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) और यूरोपीय देशों ने इमरजेंसी तेल और डीजल स्टॉक बाजार में छोड़ने पर बातचीत शुरू की है। G7 देशों ने भी करीब 10 करोड़ बैरल तेल और ईंधन का स्टॉक उपलब्ध कराने का फैसला लिया है।

हालांकि इस कदम से फिलहाल थोड़ी राहत ही मिल सकती है। अगर सप्लाई की असली दिक्कतें बनी रहीं तो तेल के दाम फिर चढ़ सकते हैं। इसलिए आने वाले वक्त में मध्य पूर्व का संघर्ष और तेल ढुलाई के रास्तों के हालात दुनिया की अर्थव्यवस्था के लिए निर्णायक साबित होंगे।

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