भूदान जमीनों के नए आवंटन पर हाईकोर्ट की रोक, धारा 25 की संवैधानिक वैधता पर सरकार से मांगा जवाब
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हाईकोर्ट ने भूदान जमीनों के किसी भी नए आवंटन पर 2 दिसंबर 2026 तक अंतरिम रोक लगाई और राज्य सरकार सहित सभी प्रतिवादियों से जवाब मांगा।
हाईकोर्ट ने भूदान जमीनों के किसी भी नए आवंटन पर अंतरिम रोक लगा दी है। यह रोक 2 दिसंबर 2026 तक रहेगी। विदर्भ भूदान यज्ञ मंडल ने मध्य प्रदेश भूदान यज्ञ अधिनियम, 1953 की 'धारा 25' की संवैधानिक वैधता को चुनौती दी है। इसी याचिका पर सुनवाई के बाद अदालत ने यह आदेश दिया।
न्यायाधीश अनिल किलोर और न्यायाधीश रजनीश व्यास ने राज्य सरकार सहित सभी प्रतिवादियों को नोटिस जारी किया है। उन्हें अपना जवाब दायर करने को कहा गया है। याचिकाकर्ताओं की ओर से अधि. आरएम भांगड़े और अधि. तेजस बैस ने पैरवी की, जबकि सरकार की ओर से सहायक सरकारी वकील एनएस ऑटकर पेश हुए। यानी मामले में एक तरफ याचिका दायर करने वाले लोग हैं और दूसरी तरफ राज्य सरकार, जिसे अब अदालत में अपना पक्ष रखना होगा।
याचिकाकर्ताओं के वकीलों ने अदालत में दलील दी कि भूदान आंदोलन के तहत भूमिहीन व्यक्तियों को जमीनें दी जाती हैं। लेकिन कानून की धारा 25 के मुताबिक अगर कोई लाभार्थी नियमों का उल्लंघन करता है, तो वह जमीन भूदान मंडल के पास वापस नहीं जाती। वह सीधे राज्य सरकार के पास जमा हो जाती है।
वकीलों का तर्क था कि यह प्रावधान संविधान के अनुच्छेद 14 यानी समानता के अधिकार के खिलाफ है। उनका कहना था कि इससे आचार्य विनोबा भावे के भूदान आंदोलन का मूल उद्देश्य ही खत्म हो जाएगा।
अदालत को यह भी बताया गया कि 4 मई 2026 के एक प्रशासनिक पत्र के अनुसार इन जमीनों को दूसरे लोगों में बांटने की तैयारी चल रही थी।
इसे देखते हुए कोर्ट ने राज्य सरकार को आदेश दिया कि 2 दिसंबर 2026 तक भूदान जमीनों का कोई भी नया आवंटन न किया जाए। यही रोक 4 मई 2026 के पत्र के अनुसार होने वाले किसी भी आवंटन पर भी लागू है। यानी तय तारीख तक न तो आम तौर पर कोई नया आवंटन हो सकेगा और न ही उस पत्र के आधार पर।
कानून की संवैधानिक वैधता का सवाल उठा है, इसलिए अदालत ने महाराष्ट्र राज्य के महाधिवक्ता को भी नोटिस जारी किया है। अब सबकी नजर सरकार के जवाब पर रहेगी।
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