बाइनेंस से 20 मिनट में 6.36 अरब डॉलर की क्रिप्टो चोरी, उत्तर कोरिया के हैकर ग्रुप पर शक
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हैकर्स ने 20 मिनट में 6.36 अरब डॉलर की क्रिप्टोकरेंसी उड़ाई। टीआरएम और चेनालिसिस ने उत्तर कोरिया से जुड़े ग्रुप पर शक जताया है।
दुनिया के सबसे बड़े क्रिप्टोकरेंसी एक्सचेंज माने जाने वाले बायनान्स (Binance) पर बड़ा साइबर हमला हुआ है। शुरुआती जानकारी के मुताबिक हैकर्स ने बहुत सोच-समझकर प्लान बनाया और सिर्फ 20 मिनट में अलग-अलग डिजिटल वॉलेट से 6.36 अरब डॉलर की क्रिप्टोकरेंसी उड़ा ली। भारतीय करेंसी में यह रकम करीब 60,000 करोड़ रुपये से ज्यादा बैठती है। इस चोरी के बाद दुनिया भर के क्रिप्टो निवेशकों में घबराहट है और अमेरिकी जांच एजेंसियों के साथ अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा संस्थाएं भी चौकन्नी हो गई हैं।
अमेरिकी ब्लॉकचेन इंटेलिजेंस फर्म टीआरएम (TRM) की रिपोर्ट के मुताबिक हैकर्स ने यह काम बड़ी चालाकी से किया। लूटी गई संपत्ति को तेजी से 10 अलग-अलग ब्लॉकचेन नेटवर्क पर भेज दिया गया, ताकि उसका पीछा करना बेहद मुश्किल हो जाए। वारदात इतनी बड़ी थी कि पूरी दुनिया का ध्यान फौरन इसी पर चला गया। इससे पहले फरवरी 2025 में बायबिट (Bybit) एक्सचेंज से 1.5 अरब डॉलर की चोरी हुई थी, लेकिन बायनान्स पर हुए इस हमले ने पिछले सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं।
इस हमले की जांच कर रही अमेरिकी ब्लॉकचेन कंपनियों टीआरएम और चेनालिसिस (Chainalysis) ने उत्तर कोरिया से जुड़े हैकर ग्रुप ट्रेडरट्रेटर (TraderTraitor) की तरफ उंगली उठाई है। अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि उत्तर कोरिया के हैकर ग्रुप पिछले कुछ सालों से लगातार दुनिया के बड़े क्रिप्टो एक्सचेंजों को निशाना बना रहे हैं। यह आरोप हमेशा लगता रहा है कि चोरी के ऐसे अरबों डॉलर उत्तर कोरिया की खुफिया आर्थिक गतिविधियों और परमाणु कार्यक्रम को पैसा देने में लगाए जाते हैं।
बायनान्स ने अब तक किसी खास देश या संस्था पर सीधे और आधिकारिक तौर पर इल्जाम नहीं लगाया है। फिर भी व्हाइट हाउस और एफबीआई (FBI) इस मामले को बहुत गंभीरता से ले रहे हैं। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने पत्रकारों से बात करते हुए साफ किया कि मामले की गहरी जांच चल रही है। हमले के दायरे को देखते हुए इसमें अंतरराष्ट्रीय राजनीति और परमाणु कार्यक्रम के पैसों का कनेक्शन होने की पूरी संभावना जताई जा रही है।
बायनान्स के को-सीईओ (Co-CEO) रिचर्ड टेंग ने इस घटना पर सफाई दी। उनके मुताबिक शुरुआती जांच में शक है कि कंपनी के एक कर्मचारी के लैपटॉप में सुरक्षा की खामी की वजह से हैकर्स भीतर घुस आए। हैकर्स ने कंपनी के हॉट वॉलेट्स (Hot Wallets) को निशाना बनाया। क्रिप्टो की दुनिया में हॉट वॉलेट सीधे इंटरनेट से जुड़े होते हैं और ग्राहकों के रोज के लेन-देन और खरीद-बिक्री में इस्तेमाल होते हैं। इसके उलट कोल्ड वॉलेट्स (Cold Wallets) इंटरनेट से पूरी तरह अलग और ऑफलाइन रहते हैं, इसलिए उन्हें ज्यादा सुरक्षित माना जाता है। हैकर्स ने इंटरनेट से जुड़े हॉट वॉलेट्स की सुरक्षा में सेंध लगाकर 6.36 अरब डॉलर का यह फंड उड़ाया। विश्लेषकों का दावा है कि रकम छिपाने के लिए हैकर्स ने मिक्सर्स और टंबलर टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया।
अरबों डॉलर गायब होने के बाद बायनान्स के करोड़ों ग्राहकों में चिंता फैल गई थी। लेकिन कंपनी ने तुरंत बयान जारी कर ग्राहकों को राहत दी। बायनान्स का कहना है कि ग्राहकों की जमा रकम पूरी तरह सुरक्षित है और इस हमले से हुआ सारा नुकसान कंपनी अपने इमरजेंसी फंड (Emergency Funds) से भरेगी।
कंपनी के मुताबिक ब्लॉकचेन पार्टनर्स और दूसरी अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं की मदद से चोरी हुई कुल रकम में से करीब 3 अरब डॉलर (अंदाजन 50% रकम) अलग-अलग खातों में फ्रीज (Freeze) करने में बायनान्स कामयाब रहा है। बाकी फंड का पता लगाने के लिए कंपनी अभी दुनिया भर की जांच एजेंसियों के साथ काम कर रही है। बंद पड़ी सेवाओं को जल्द ही चरणबद्ध तरीके से फिर शुरू करने का वादा भी किया गया है।
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