अवमानना केस में संजय राऊत को 17 नवंबर को कोर्ट में हाज़िर होने का आदेश, वागले को वर्चुअल छूट
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सुप्रीम कोर्ट ने फौजदारी अवमानना मामले में संजय राऊत को 17 नवंबर को सशरीर पेश होने को कहा है, जबकि निखिल वागले अगली सुनवाई में वर्चुअल तरीके से जुड़ सकेंगे।
नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने अवमानना के एक मामले में शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) पार्टी के राज्यसभा सांसद संजय राऊत को 17 नवंबर को खुद अदालत में हाज़िर होने का निर्देश दिया है। वहीं पत्रकार निखिल वागले को अगली सुनवाई में वर्चुअल माध्यम से शामिल होने की इजाज़त दे दी गई है। यह निर्देश सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (SCBA) की तरफ से दायर फौजदारी अवमानना केस में दिए गए हैं।
सुनवाई के दौरान निखिल वागले की ओर से वरिष्ठ वकील इंदिरा जयसिंह ने अदालत में दलील रखी। उन्होंने बताया कि वागले ने संबंधित सोशल मीडिया पोस्ट हटा दी है और हलफनामे के ज़रिए बिना शर्त माफी भी मांग ली है। जयसिंह के मुताबिक अदालत का नोटिस मिलते ही वागले ने जितनी जल्दी हो सका, वह पोस्ट डिलीट कर दी। उन्होंने कोर्ट से यह भी कहा कि वागले ने अपने किए को सही ठहराने की कोशिश नहीं की।
जयसिंह ने यह भी बताया कि वागले करीब पांच दशकों से पत्रकारिता में हैं। वे किसी राजनीतिक पार्टी से जुड़े नहीं हैं और पत्रकारिता में उन्हें कई पुरस्कार मिल चुके हैं, ऐसी दलील उनके वकील ने दी। जयसिंह ने कहा कि मौका मिलते ही वागले ने बिना शर्त माफी मांग ली थी।
दूसरी तरफ सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष प्रदीप राय ने उस सोशल मीडिया पोस्ट की भाषा पर ऐतराज़ जताया। उन्होंने अदालत के सामने कहा कि पोस्ट में असभ्य भाषा का इस्तेमाल किया गया था। राय ने यह दावा भी किया कि नोटिस मिलने तक वह पोस्ट हटाई नहीं गई थी।
सुनवाई में वह सोशल मीडिया पोस्ट अदालत के सामने पेश भी की गई। वकील राहुल कौशिक ने भी इस मामले में अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि देश की सबसे बड़ी अदालत के बारे में इस तरह की भाषा और रवैये को गंभीरता से लिया जाना चाहिए।
मामले की अगली सुनवाई 17 नवंबर को होगी। उस दिन संजय राऊत को खुद अदालत में मौजूद रहना होगा, जबकि निखिल वागले को वर्चुअल तरीके से हाज़िरी की इजाज़त मिली है। अब सबकी नज़र इस पर है कि उस सुनवाई में अदालत क्या रुख अपनाती है।
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