अमरावती के जरूड में ठेकेदार सुनील वागद्रे की मौत, अढ़ाई करोड़ के बिल अटके होने का दावा
जरूड के ठेकेदार सुनील वागद्रे की मौत के बाद सरकारी कामों के अटके बिलों का मुद्दा फिर उठा है।
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अमरावती जिले के वरुड तहसील के जरूड गांव के ठेकेदार सुनील वागद्रे की मौत से पूरे राज्य में हलचल मच गई है। सरकारी कामों के करोड़ों रुपये के बिल अटकने से वे आर्थिक संकट में थे। दावा किया जा रहा है कि करीब अढ़ाई करोड़ रुपये के सरकारी बिल बाकी थे और बढ़ते कर्ज का बोझ भी उन पर था। उनकी मौत के बाद बकाया बिलों का सवाल फिर सामने आ गया है और ठेकेदार संगठनों ने सरकार के कामकाज पर सवाल उठाए हैं।
सुनील वागद्रे सरकार से मान्यता प्राप्त ठेकेदार थे और अलग-अलग विकास कामों का ठेका लेते थे। बताया गया है कि उन्होंने सार्वजनिक निर्माण विभाग के तहत सड़कों के काम किए थे। ठेकेदार संगठनों का दावा है कि आदिवासी विकास विभाग और ग्रामविकास विभाग से जुड़े कामों के बिल भी अटके हैं। कहा जा रहा है कि वागद्रे के सरकारी कामों के करीब अढ़ाई करोड़ रुपये सरकार के पास बाकी थे। यह रकम पाने के लिए वे कुछ समय से संबंधित अधिकारियों और विभागों के पीछे लगे थे। खबर है कि बिल के लिए उन्होंने मुंबई के मंत्रालय के भी कई चक्कर लगाए, लेकिन दावे के मुताबिक उनकी कोशिशों का मनचाहा नतीजा नहीं निकला।
बकाया सरकारी बिलों के साथ-साथ वागद्रे पर कर्ज भी था। कुछ खबरों में बताया गया है कि प्राइवेट बैंक का करीब 30 लाख रुपये, बैंक के कैश क्रेडिट खाते का 30 लाख रुपये और निर्माण के लिए उधार लिए गए करीब 50 लाख रुपये का कर्ज उन पर था। कहा जा रहा है कि कर्ज चुकाने के दबाव और सरकारी कामों का पैसा न मिलने से उनकी हालत बिगड़ गई थी। हालांकि कर्ज की सही स्थिति और मौत की वजह आधिकारिक जांच से साफ होना जरूरी है।
बताया जाता है कि वागद्रे ने मौत से पहले एक चिट्ठी लिखी थी, जिसका मजमून सामने आया है। चिट्ठी में उन्होंने बड़े भतीजे घनश्याम से परिवार की जिम्मेदारी संभालने को कहा है। छोटे भाई-बहनों की पढ़ाई, चाची की देखभाल और परिवार की आगे की जिम्मेदारियों का भी उसमें जिक्र बताया गया है। चिट्ठी में यह भी लिखा बताया जाता है कि बकाया बिल पाने के लिए संबंधित लोगों से संपर्क रखा जाए और कर्ज चुकाने के लिए संपत्ति की देखभाल की जाए या उसे बेचा जाए। चिट्ठी के मजमून और उसके पूरे संदर्भ की आधिकारिक तौर पर पुष्टि होना जरूरी है।
वागद्रे की मौत के बाद ठेकेदार संगठनों ने कड़ी नाराजगी जताई है। उनका आरोप है कि सरकारी काम पूरे करने के बाद भी बिल समय पर नहीं मिलते, इसलिए ठेकेदार आर्थिक संकट में फंस रहे हैं। खबर है कि अमरावती में सार्वजनिक निर्माण विभाग के दफ्तर के सामने सरकार का विरोध करने वाले बैनर लगाए गए। संगठन का कहना है कि "यह आत्महत्या नहीं, सरकार द्वारा लिया गया बलि है।" यह संगठन का आरोप है, इसे आधिकारिक निष्कर्ष नहीं माना जाना चाहिए। मांग की जा रही है कि बकाया बिलों से पैदा हुई आर्थिक परेशानियों की जांच हो और जिम्मेदारी तय की जाए।
ठेकेदार संगठन का दावा है कि महाराष्ट्र के सरकारी ठेकेदारों के करीब 86 हजार करोड़ रुपये के बिल बाकी हैं। संगठनों की शिकायत है कि सार्वजनिक निर्माण, ग्रामविकास, आदिवासी विकास और जलजीवन मिशन समेत कई विभागों में बिल समय पर नहीं मिल रहे। इस आंकड़े की स्वतंत्र आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। संगठनों के मुताबिक वागद्रे की मौत बकाया बिलों के मुद्दे से जुड़ा राज्य का नौवां कथित मामला है। इस दावे की भी स्वतंत्र आधिकारिक पड़ताल जरूरी है। संगठन मुख्यमंत्री और संबंधित विभागों से मांग कर रहे हैं कि बकाया बिलों का मसला तुरंत सुलझाया जाए और संकट में फंसे ठेकेदारों को राहत दी जाए।
आगे का रुख तय करने के लिए महाराष्ट्र राज्य ठेकेदार महासंघ, राज्य अभियंता संगठन और महाराष्ट्र राज्य जलापूर्ति ठेकेदार संगठन के पदाधिकारियों की 10 अक्टूबर को दोपहर चार बजे ऑनलाइन बैठक होगी। इसमें अगले आंदोलन की दिशा तय की जाएगी। अब ठेकेदारों की नजर इस पर है कि शिकायतों पर सरकार क्या कदम उठाती है। वागद्रे के पीछे पत्नी, बेटी और बेटा हैं।