अमेरिका में महंगाई की मार, आधे से ज्यादा कर्मचारी हफ्ते में एक बार लंच छोड़ देते हैं
ezCater की 2026 की सालाना लंच रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिका के 54 टक्के कर्मचारी हफ्ते में कम से कम एक बार दोपहर का खाना नहीं खाते।
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अमेरिका में बढ़ती महंगाई अब लोगों की खाने की आदतों पर भी असर डालने लगी है। खाने-पीने की चीजों के दाम चढ़ रहे हैं। दफ्तरों में काम का बोझ और लगातार चलने वाली बैठकें भी हैं। नतीजा यह है कि कर्मचारियों को दोपहर का खाना खाने तक का वक्त नहीं मिल रहा। अमेरिका के आधे से ज्यादा दफ्तरी कर्मचारी हफ्ते में कम से कम एक बार दोपहर का खाना पूरी तरह छोड़ देते हैं।
यह बात ezCater कंपनी की 2026 की सालाना लंच रिपोर्ट में सामने आई है। रिपोर्ट के मुताबिक खाने का खर्च तो बढ़ ही रहा है, काम की जगह का माहौल भी कर्मचारियों को खाने से दूर रख रहा है। इसी वजह से कर्मचारियों की सेहत और काम की उत्पादकता, दोनों को लेकर चिंता जताई जा रही है।
रिपोर्ट कहती है कि अमेरिका के 54 टक्के कर्मचारी हफ्ते में कम से कम एक बार दोपहर का खाना नहीं खाते। लगातार चार साल से यह हिस्सा बढ़ता जा रहा है। 2023 में यह आंकड़ा 48 टक्के था। खाने-पीने की चीजों के बढ़ते दाम का भी इसमें बड़ा हाथ है। पूरे 81 टक्के कर्मचारियों ने बताया कि महंगाई और होटल के मेन्यू में बढ़े दामों की वजह से उन्होंने अपनी खाने की आदतें बदल ली हैं।
इनमें से 42 टक्के कर्मचारी बाहर से खाना मंगवाना कम कर रहे हैं, जबकि 40 टक्के सस्ती खाने की चीजें चुन रहे हैं। काम की जगह पर खाने के लिए कर्मचारी औसतन हफ्ते में 100 डॉलर खर्च करते हैं।
सिर्फ पैसों की तंगी ही वजह नहीं है। दफ्तर के काम का तरीका भी खाना छोड़ने की बड़ी वजह बन रहा है। करीब 31 टक्के कर्मचारियों ने कहा कि कंपनी के कामकाज की संस्कृति और बड़े अफसरों की उम्मीदों के चलते खाने के लिए वक्त निकालना मुश्किल हो जाता है।
हर वक्त ऑनलाइन मौजूद रहने का दबाव है, जिम्मेदारियां बढ़ रही हैं और बैठकें दोपहर के वक्त रख दी जाती हैं। इसलिए बहुत से कर्मचारी अपनी डेस्क पर बैठे-बैठे ही काम करते रहते हैं। रिपोर्ट में लिखा गया है कि खासकर नौजवान कर्मचारियों को बड़े अफसरों की तरफ से ज्यादा दबाव महसूस होता है।
दोपहर का खाना छोड़ने का असर अब कर्मचारियों के काम पर भी दिखने लगा है। रिपोर्ट के 84 टक्के कर्मचारियों ने बताया कि भूख की वजह से उनके काम करने की क्षमता पर बुरा असर पड़ता है। इनमें से 49 टक्के का ध्यान काम से भटक जाता है, 40 टक्के से गलतियां होने की आशंका बढ़ जाती है और 38 टक्के को काम पूरा करने में ज्यादा वक्त लगता है।
इससे साफ हो रहा है कि दोपहर का ब्रेक सिर्फ खाने के लिए नहीं है। दिमागी ताजगी और काम करने की ताकत बनाए रखने के लिए भी यह जरूरी है।
इन हालात में अमेरिका की कंपनियों के सामने कर्मचारियों की सेहत और काम के माहौल का सवाल खड़ा हो गया है। कर्मचारियों को रोज खाने के लिए वक्त देना, दफ्तर में खाने-पीने की सुविधा रखना और दोपहर में गैरजरूरी बैठकें न करना, ऐसे कदमों की जरूरत बताई जा रही है।
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