अल्मोड़ा के चितई गोलू देवता मंदिर में चिट्ठी लिखकर मांगी जाती है मन्नत
उत्तराखंड के अल्मोड़ा में भक्त घंटा चढ़ाते हैं और उस पर अपनी इच्छा लिखी चिट्ठी अर्पित करते हैं।
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रोज की उबाऊ जिंदगी से थक गए हों और धार्मिक पर्यटन का शौक रखते हों, तो उत्तराखंड का अल्मोड़ा एक अच्छा ठिकाना हो सकता है। अल्मोड़ा धार्मिक पर्यटन के साथ-साथ अपनी प्राकृतिक सुंदरता के लिए भी जाना जाता है। भारत में धार्मिक यात्रा के लिए कई सुंदर मंदिर हैं और हर मंदिर की अपनी अलग खासियत होती है।
आम तौर पर लोग देवता के दर्शन करने जाते हैं तो मन में कोई न कोई इच्छा लेकर जाते हैं और दर्शन करते हुए उसे मन ही मन देवता के सामने रखते हैं। लेकिन उत्तराखंड में एक ऐसा अनोखा मंदिर है, जहां इच्छा मन में नहीं रखी जाती। यहां भक्त देवता के नाम चिट्ठी लिखकर अपनी इच्छा जाहिर करते हैं।
यह मंदिर उत्तराखंड के अल्मोड़ा में है और इसका नाम चितई गोलू देवता मंदिर है। अल्मोड़ा हिमालय के सुंदर नजारे, पुराने मंदिरों और शांत माहौल के लिए लोकप्रिय है। भक्त मंदिर परिसर में घंटा अर्पित करते हैं और उस पर अपनी इच्छाएं लिखी चिट्ठियां भी चढ़ाते हैं। अल्मोड़ा से मंदिर तक पहुंचने के लिए आपको लोकल टैक्सी की मदद लेनी पड़ेगी। यहां के पहाड़ों में सूर्योदय और सूर्यास्त का सुंदर नजारा देखा जा सकता है।
अल्मोड़ा शहर में देवी का एक और लोकप्रिय मंदिर है, जिसका नाम नंदा देवी मंदिर है। धार्मिक और सांस्कृतिक, दोनों नजरिए से इसकी बड़ी अहमियत है। मंदिर की वास्तुकला और स्थानीय परंपराएं इस जगह को बाकी पर्यटन स्थलों से अलग बनाती हैं।
अल्मोड़ा से करीब 36 किमी की दूरी पर जागेश्वर मंदिर संकुल देखा जा सकता है। उत्तराखंड पर्यटन विभाग के मुताबिक यहां एक ही जगह पर 124 मंदिरों का समूह है। वहीं भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण ने संकुल के कई मंदिरों को संरक्षित स्मारकों के तौर पर सूचीबद्ध किया है।
मुंबई से अल्मोड़ा जाना हो तो विमान या रेलवे का रास्ता अपनाया जा सकता है। मुंबई से दिल्ली तक सड़क का सफर बहुत लंबा और थकाऊ होगा। विमान से जाना हो तो मुंबई एयरपोर्ट से पंतनगर एयरपोर्ट या दिल्ली एयरपोर्ट के लिए फ्लाइट पकड़ी जा सकती है। रेलवे से जाने के लिए मुंबई से उत्तराखंड के काठगोदाम रेलवे स्टेशन की ट्रेन लेनी होगी। काठगोदाम अल्मोड़ा का सबसे नजदीकी रेलवे स्टेशन है।