शक फिर पूरा बैंक खाता नहीं होगा फ्रीज, RBI ने ग्राहकों के लिए नया प्लान रखा
RBI के नए प्रस्तावित नियम के तहत बैंक अब पूरा खाता फ्रीज नहीं कर पाएंगे, सिर्फ शक वाली रकम पर रोक लगेगी।
साइबर फ्रॉड और शक वाले लेनदेन से जुड़े मामलों में बैंक ग्राहकों को बड़ी राहत मिलने वाली है। भारतीय रिजर्व बैंक ने एक नया आराखड़ा प्रस्तावित किया है, जिसके तहत बैंक में कोई शक वाला ट्रांजैक्शन दिखने पर बैंक पूरा का पूरा खाता फ्रीज नहीं कर पाएगा। बैंक को सिर्फ उतनी ही रकम पर अस्थायी रोक लगानी होगी, जिस पर विवाद है या साइबर फ्रॉड का शक है।
प्रस्तावित नियम के मुताबिक, अगर किसी खाते में 1,000 रुपये या उससे ज्यादा का कोई असामान्य ट्रांजैक्शन 'म्यूल अकाउंट' या साइबर फ्रॉड से जुड़ा दिखता है, तो बैंक सिर्फ उस रकम पर ही अस्थायी रोक लगा सकेंगे। बाकी खाते का लेनदेन पहले की तरह चलता रहेगा। रिजर्व बैंक ने ये प्रस्तावित नियम पब्लिक फीडबैक के लिए जारी किए हैं। नई गाइडलाइन 1 अप्रैल 2027 से लागू करने का प्रस्ताव है।
इस नई व्यवस्था में बैंक ग्राहक को शक वाले ट्रांजैक्शन की कानूनी वैधता साबित करने के लिए 20 कैलेंडर दिन का वक्त देगा। ग्राहक अपनी पहचान, ट्रांजैक्शन का मकसद और पैसे का सोर्स बताने वाले कागजात देकर रकम की वैधता साबित कर सकेगा। इसके बाद बैंक को ग्राहक का जवाब और दिए गए कागजातों की जांच करने के लिए 10 कैलेंडर दिन मिलेंगे।
अगर ग्राहक 20 दिन के अंदर जवाब नहीं देता, या उसके जवाब से साइबर फ्रॉड का शक दूर नहीं होता, तो बैंक यह मामला संबंधित पुलिस को सौंप देगा। ऐसी हालत में बैंक उस रकम को अपने स्तर पर अनिश्चित समय तक फ्रीज करके नहीं रख पाएगा। मामला पुलिस के पास जाने के बाद इसकी पूरी जिम्मेदारी कानून लागू करने वाली एजेंसी की होगी। पुलिस को मामला मिलने के 30 दिन के अंदर आधिकारिक कानूनी रोक के आदेश जारी करने होंगे।
RBI का यह प्रस्तावित आराखड़ा शक वाले म्यूल अकाउंट के मामलों में पूरा खाता फ्रीज करने के बजाय सिर्फ शक वाली या विवादित रकम पर ही टारगेटेड कार्रवाई का रास्ता अपनाने वाला है। नए फ्रेमवर्क के तहत बैंकों को AI आधारित ट्रांजैक्शन मॉनिटरिंग सिस्टम का इस्तेमाल करना होगा। इस सिस्टम से ऐसे ट्रांजैक्शन पहचाने जाएंगे, जो ग्राहक की सामान्य प्रोफाइल के मुकाबले अचानक या असामान्य हैं। इसके अलावा, ग्राहक की बताई गई इनकम या प्रोफाइल के मुकाबले बहुत बड़े या पहले से पहचाने गए साइबर फ्रॉड नेटवर्क से जुड़े ट्रांजैक्शन पर भी बारीकी से नजर रखी जाएगी।