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अहोई अष्टमी 1 नवंबर को: बच्चों की लंबी उम्र के लिए व्रत, शाम 5:36 बजे से पूजा का मुहूर्त

अहोई अष्टमी 1 नवंबर को: बच्चों की लंबी उम्र के लिए व्रत, शाम 5:36 बजे से पूजा का मुहूर्त तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं
कल्चर PT24 टीम

कार्तिक के कृष्ण पक्ष की अष्टमी पर रविवार, 1 नवंबर को महिलाएं बच्चों की भलाई के लिए अहोई माता की पूजा करेंगी और उपवास रखेंगी।

कार्तिक महीने के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि पर अहोई अष्टमी का व्रत रखा जाता है। पंचांग के मुताबिक यह व्रत इस बार रविवार, 1 नवंबर को रखा जाएगा। यह त्योहार खास तौर पर बच्चों के सुख, समृद्धि, अच्छी सेहत और लंबी उम्र की कामना से जुड़ा है। इस दिन महिलाएं अहोई माता की पूजा करती हैं और अपने बच्चों की भलाई के लिए उपवास रखती हैं।

अष्टमी तिथि 1 नवंबर को दोपहर 2:51 बजे शुरू होगी और 2 नवंबर को दोपहर 1:10 बजे खत्म होगी। इस दिन शाम की पूजा का खास महत्व बताया गया है। महिलाएं पूरे दिन उपवास रखने के बाद शाम को अहोई माता की पूजा करती हैं और बच्चों के कल्याण के लिए प्रार्थना करती हैं।

पूजा का मुहूर्त शाम 5:36 बजे से 6:54 बजे तक है। पूजा के लिए कुल 1 घंटा 18 मिनट का समय मिलेगा।

पूजा की विधि इस तरह बताई गई है। अहोई अष्टमी के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ कपड़े पहनें। इसके बाद बच्चों की भलाई के लिए प्रार्थना करके उपवास का संकल्प लें। शाम को पूजा के लिए मंदिर या घर की कोई भी साफ जगह अच्छी तरह साफ करें और अहोई माता की प्रतिमा स्थापित करें। फिर दीया जलाएं और रोली (कुमकुम), चावल के दाने, फूल और पूजा का बाकी सामान चढ़ाएं।

पूजा के दौरान अहोई माता का ध्यान करें और बच्चों की लंबी उम्र, अच्छी सेहत और सुखी जीवन के लिए प्रार्थना करें। उसके बाद अहोई अष्टमी के व्रत की कथा खुद पढ़ें या परिवार के किसी सदस्य से सुनें। कथा के बाद देवी की आरती करें और श्रद्धा से प्रसाद चढ़ाएं। शाम को जब तारे दिखने लगें, तब अपने परिवार की परंपरा के मुताबिक उन्हें जल अर्पित करें और बच्चों के कल्याण की प्रार्थना करें। इसके बाद उपवास खोलें।

अहोई अष्टमी का त्योहार मां और बच्चे के बीच प्यार, भरोसे और कल्याण का प्रतीक माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार इस दिन अहोई माता की पूजा करने और कड़ा उपवास रखने से बच्चों के जीवन में खुशी और शांति आती है। महिलाएं बच्चों की लंबी उम्र, अच्छी सेहत, तरक्की और उज्ज्वल भविष्य के लिए प्रार्थना करती हैं। यह व्रत देवी पार्वती की पूजा से भी जुड़ा है, और कई घरों में अहोई माता की पूजा देवी पार्वती के रूप में की जाती है।

व्रत रखने वाली महिलाएं दिन भर सख्त नियम का पालन करती हैं और शाम की पूजा के दौरान अहोई माता की कथा सुनती हैं। उत्तर भारत के कई हिस्सों में यह त्योहार बड़े उत्साह से मनाया जाता है। कुछ इलाकों में परिवार की परंपरा के मुताबिक महिलाएं तारे देखने के बाद अपना उपवास खोलती हैं।

धर्म, ज्योतिष, वास्तु और फेंगशुई जैसे विषयों से जुड़ी जानकारी सिर्फ पाठकों की जानकारी के लिए है। इनसे जुड़ा कोई भी प्रयोग करने से पहले जानकारों की सलाह लेना जरूरी है।

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