आदित्य अनघा की 15वीं सालाना सभा, कर्मचारियों ने खुद किया नाटक 'सीता - सिया राम की'
आदित्य अनघा मल्टी-स्टेट क्रेडिट को-ऑपरेटिव सोसायटी ने 15वां वार्षिक समारोह मनाया, 54 कर्मचारियों का सम्मान हुआ।
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आदित्य अनघा मल्टी-स्टेट क्रेडिट को-ऑपरेटिव सोसायटी लिमिटेड ने अपना 15वां वार्षिक समारोह धूमधाम से मनाया। इस शाम में उपलब्धियों की सराहना हुई, संस्कृति की झलक दिखी और सोसायटी के सफर को आकार देने वाला साथ-साथ चलने का जज़्बा भी नज़र आया।
शाम का एक अहम हिस्सा संस्था में बेहतरीन काम करने वालों का सम्मान रहा। बेस्ट स्टाफ, बेस्ट ब्रांच, बेस्ट डिपार्टमेंट और बेस्ट रीजन समेत कई श्रेणियों में पुरस्कार दिए गए। ये पुरस्कार उन कर्मचारियों और टीमों को मिले जिन्होंने शानदार प्रदर्शन, लगन और प्रतिबद्धता दिखाई। इससे पूरे स्टाफ को और ऊंचा लक्ष्य रखने और सोसायटी की तरक्की में हाथ बँटाने की प्रेरणा भी मिली।
समारोह में उन लोगों को भी खास तौर पर याद किया गया जो सोसायटी के साथ-साथ आगे बढ़े हैं। आदित्य अनघा के साथ 10 साल की निष्ठापूर्ण सेवा पूरी करने वाले 54 कर्मचारियों का इस मौके पर सत्कार किया गया। सोसायटी के पुराने और अनुभवी कर्मचारी माने जाने वाले ये लोग बरसों की प्रतिबद्धता, वफादारी और डटे रहने से बनी एक कीमती संस्थागत विरासत की नुमाइंदगी करते हैं।
दस साल का यह साथ सिर्फ सेवा का एक पड़ाव नहीं है। यह भरोसे, निरंतरता और तरक्की के साझा सफर को दिखाता है। यह सत्कार उन कर्मचारियों के प्रति दिल से जताया गया आभार था जिन्होंने सोसायटी को आगे बढ़ते देखा और उसमें योगदान दिया। वे इसकी बुनियाद, संस्कृति और कामयाबी का अहम हिस्सा हैं।
शाम का सांस्कृतिक आकर्षण आदित्य अनघा के बहुप्रतीक्षित मेगा नाटक 'सीता - सिया राम की' का पांचवां संस्करण रहा। इस साल की प्रस्तुति इसलिए खास थी कि इसे सोसायटी के अपने कर्मचारियों की सक्रिय भागीदारी से तैयार किया गया और उन्होंने ही मंच पर उतारा।
कर्मचारी अपनी रोज़ की भूमिकाओं से आगे बढ़कर अभिनेता, कलाकार और रचनात्मक सहयोगी बने और कहानी को मंच पर जीवंत किया। इस तरह यह प्रस्तुति महज़ नाटक नहीं थी, बल्कि आदित्य अनघा परिवार की प्रतिभा, रचनात्मकता और जुनून की सामूहिक अभिव्यक्ति थी।
प्रस्तुति को और निजी रंग इस बात से मिला कि 'सीता - सिया राम की' के गीत मौलिक थे और स्टाफ टीम के सदस्यों ने ही लिखे थे। इससे संगीत उन्हीं लोगों की असली रचना बन गया जो इस प्रस्तुति का हिस्सा थे, और कहानी तथा आदित्य अनघा परिवार का रिश्ता और गहरा हुआ।
नाटक में सीता और राम की सदाबहार कथा को दमदार नाट्य रूप में पेश किया गया। इसमें सीता को साहस, ताकत और हिम्मत वाली महिला के रूप में खास तौर पर दिखाया गया, यानी अपने आप में एक योद्धा। सीता को सिर्फ त्याग के पारंपरिक नज़रिए से दिखाने के बजाय प्रस्तुति ने उनकी भीतरी ताकत, गरिमा, दृढ़ विश्वास और मुश्किलों का असाधारण हिम्मत से सामना करने की क्षमता को उभारने की कोशिश की।
असरदार अभिनय, मौलिक संगीत और कहानी कहने के ढंग से नाटक में गरिमा, साहस, भक्ति, त्याग, ताकत और धर्मपरायणता जैसे विषय टटोले गए। दर्शकों को सीता के किरदार और उनकी असाधारण यात्रा को नए नज़रिए से देखने का मौका मिला।
मेगा नाटक आदित्य अनघा के वार्षिक समारोहों की एक अलग परंपरा बन चुका है। हर प्रस्तुति दर्शकों के लिए नई कहानी, नया नज़रिया और नया संदेश लेकर आती है। सिलसिला 'मै तुलसी तेरे आंगन की' से शुरू हुआ, जो काशीबाई और बाजीराव के जीवन से प्रेरित था। इसके बाद गजानन महाराज के जीवन और शिक्षाओं पर आधारित 'गणू' आया। फिर सोसायटी ने 'जोकर' पेश किया, जिसमें कामयाबी की ओर बढ़ते एक आम आदमी की सोच और सफर को दिखाया गया। उसके बाद महाभारत के प्रभावशाली और निःस्वार्थ किरदार को टटोलता 'कर्ण' आया।
'सीता - सिया राम की' के साथ पांचवीं मेगा प्रस्तुति ने भारतीय संस्कृति, अर्थपूर्ण कहानी, मौलिक रचनात्मकता और कर्मचारियों की भागीदारी को साथ लाने की इस परंपरा को आगे बढ़ाया।
इस तरह 15वां वार्षिक समारोह सिर्फ एक पड़ाव का जश्न नहीं रहा। यह लोगों, उनकी लगन, प्रतिभा और मकसद का जश्न था, जिसमें सोसायटी के सफर में योगदान देने वालों का सम्मान हुआ, पूरे स्टाफ की बेहतरीन कारगुज़ारी को सराहा गया और कर्मचारियों को अपनी रचनात्मकता दिखाने का मंच मिला।
दस साल पूरे करने वाले 54 कर्मचारियों के सत्कार से लेकर कर्मचारियों के खुद अभिनेता और रचनाकार बनकर मंच पर छा जाने तक, समारोह का संदेश साफ था: आदित्य अनघा को उसके लोगों ने बनाया है, और वह उनकी प्रतिभा का जश्न भी मनाती है, उसे पहचानती है और उसे मंच भी देती है।