आठ साल की बच्ची से यौन शोषण में 21 साल के युवक को 20 साल की सश्रम कैद
लातूर की विशेष अदालत ने आरोपी को 20 साल सश्रम कारावास और पांच हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई।
लातूर की विशेष जिला व सत्र अदालत ने आठ साल की नाबालिग बच्ची के साथ यौन शोषण करने के मामले में आरोपी को 20 साल के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने आरोपी पर पांच हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है।
सजा पाने वाले आरोपी का नाम चुंबल्या उर्फ रितेश राजनंद कसबे है। उसकी उम्र 21 साल है और वह चाकूर तालुका के वडवळ नागनाथ, जिला लातूर का रहने वाला है। उसने बच्ची को मोबाइल दिखाने का लालच देकर यह जुर्म किया था।
विशेष जिला व सत्र न्यायाधीश एस. ए. सय्यद ने 22 अक्टूबर 2026 को यह फैसला दिया। घटना चाकूर पुलिस थाने की सीमा में आने वाले वडवळ नागनाथ में 9 फरवरी 2025 को हुई थी। बच्ची उस वक्त दूसरे बच्चों के साथ खेल रही थी। तभी आरोपी ने मोबाइल दिखाने का लालच देकर उसे अपने पास बुलाया और उसके साथ यौन शोषण किया। अगले दिन, यानी 10 फरवरी 2025 को पीड़ित बच्ची की मां ने चाकूर पुलिस थाने में शिकायत दर्ज कराई।
मामले की जांच तब के पुलिस उपनिरीक्षक पंकज निळकंठे ने की थी। जांच के दौरान जमा किए गए सबूतों और गवाहों के बयानों के आधार पर अदालत में चार्जशीट दाखिल की गई। सुनवाई के दौरान चश्मदीद गवाहों, सरकारी पंचों, मेडिकल अफसर और जांच अधिकारी की गवाही अहम साबित हुई। सरकारी पक्ष ने मौखिक गवाहियों के साथ वैज्ञानिक सबूत भी अदालत में पेश किए। इन्हीं सबूतों के आधार पर अदालत ने आरोपी को दोषी करार देकर सजा सुनाई।
मुकदमे के दौरान आरोपी ने अपने बचाव में पीड़ित बच्ची की मां पर आरोप लगाए। लेकिन सरकारी पक्ष की ओर से पेश गवाहों के बयान और मेडिकल व वैज्ञानिक सबूतों के सामने उसका बचाव अदालत ने नहीं माना।
सरकार की तरफ से पैरवी विशेष सरकारी अभियोक्ता अॅड. मंगेश महिंद्रकर ने की। उन्होंने जिला सरकारी वकील शिवकुमार गिरवलकर के मार्गदर्शन में यह काम किया। उनके साथ अॅड. सोमेश्वर बिराजदार, अॅड. विद्या वीर और अॅड. पल्लवी यादव ने भी सहयोग दिया। पुलिस अधीक्षक अमोल तांबे और अपर पुलिस अधीक्षक मंगेश चव्हाण के मार्गदर्शन में ट्रायल मॉनिटरिंग सेल ने भी मुकदमे की कार्यवाही में योगदान दिया।
कमेंट
अभी कोई कमेंट नहीं। पहले आप लिखिए।