आरटीआई में खुलासा: RBI के 197.67 टन सोने का भंडार विदेश में, रखरखाव का खर्च बताने से इनकार
आरटीआई के जवाब में रिजर्व बैंक ने बताया कि मार्च 2026 तक उसके पास 880.52 टन सोना था, जिसमें से 197.67 टन विदेश में रखा है।
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नागपुर: सूचना का अधिकार (आरटीआई) के तहत मिली जानकारी के मुताबिक, मार्च 2026 तक रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) के पास कुल 880.52 मीट्रिक टन सोना था। इसमें से 197.67 टन सोना विदेश में रखा गया है, यानी बैंक ऑफ इंग्लैंड और बैंक फॉर इंटरनेशनल सेटलमेंट्स (BIS) के पास। बाकी 680.05 टन सोना भारत में ही है। 2.80 टन सोना गोल्ड डिपॉजिट की शक्ल में रखा हुआ है।
यह जानकारी सामाजिक कार्यकर्ता अभय कोलारकर ने मांगी थी। उन्होंने RBI से सोने के भंडार, डॉलर के लेनदेन, बैंकिंग फ्रॉड, साइबर क्राइम और बिना दावे वाली जमा रकम के बारे में सवाल पूछे थे।
हालांकि पिछले पांच साल में सोने के रखरखाव, सुरक्षा और ढुलाई पर कितना खर्च हुआ, यह RBI ने नहीं बताया। बैंक का कहना है कि ऐसी जानकारी सामने आने से देश की सुरक्षा और आर्थिक हितों को नुकसान पहुंच सकता है। यानी जवाब में सोना कहां-कहां रखा है, यह तो साफ हुआ, लेकिन उसे रखने, संभालने और लाने-ले जाने पर कितना पैसा लगा, इसका कोई हिसाब नहीं दिया गया।
RBI के सितंबर 2026 के मासिक बुलेटिन के मुताबिक, 28 अगस्त 2026 को उसके सोने के भंडार की कीमत 11,10,438 करोड़ रुपये थी।
आरटीआई के जवाब में डॉलर के लेनदेन का ब्योरा भी है। वित्त वर्ष 2023-24 में RBI ने शुद्ध रूप से 41.271 अरब डॉलर की खरीद की थी। 2024-25 में उसने शुद्ध रूप से 34.511 अरब डॉलर की बिक्री की। इसके बाद 2025-26 में शुद्ध बिक्री 53.132 अरब डॉलर रही। वहीं 2026-27 में 31 जुलाई तक उसने शुद्ध रूप से 4.165 अरब डॉलर की खरीद दर्ज की है। इन आंकड़ों से दिखता है कि 2023-24 की शुद्ध खरीद के बाद अगले दो वित्त वर्षों में बड़ी शुद्ध बिक्री हुई।
फ्रॉड से हुए नुकसान की वसूली पर भी RBI ने कुछ खास नहीं बताया। उसका कहना है कि बैंकिंग और साइबर फ्रॉड से हुए नुकसान में से कितनी रकम वसूली गई, इसका अलग रिकॉर्ड वह नहीं रखता। बिना दावे वाली जमा रकम की कुल कीमत, इन खातों की संख्या और साइबर फ्रॉड से हुए नुकसान की खास जानकारी भी मांगे गए रूप में उपलब्ध नहीं है।
RBI ने यह भी कहा कि आरटीआई कानून के तहत सरकारी संस्थाओं पर ऐसी जानकारी तैयार करने या जोड़ने की जिम्मेदारी नहीं है, जो उनके रिकॉर्ड में पहले से मौजूद न हो।
कुल मिलाकर इस जवाब से देश के सोने के भंडार और विदेशी मुद्रा के लेनदेन की एक झलक मिलती है। साथ ही यह भी दिखता है कि आवेदक ने जो वित्तीय और फ्रॉड से जुड़ी जानकारी मांगी थी, उसमें से कुछ उपलब्ध नहीं है।
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