सोम‌वार, 19 अक्टूबर 2026

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09:13 IST

सोने में और गिरावट आएगी या फिर रिकॉर्ड बनेगा? जानिए जानकारों का अंदाज़ा

अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना रिकॉर्ड 5,602 डॉलर प्रति औंस से नीचे आ चुका है। जानकार 4% से 7% और गिरावट की बात कर रहे हैं, पर केंद्रीय बैंकों की खरीद सोने को सहारा भी दे रही है।

सोने में और गिरावट आएगी या फिर रिकॉर्ड बनेगा? जानिए जानकारों का अंदाज़ा तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं

दुनिया की अर्थव्यवस्था को लेकर बनी अनिश्चितता, शेयर बाजार की गिरावट और महंगाई की बढ़ती चिंता ने निवेशकों की नज़र फिर से सोने की तरफ मोड़ दी है। एक तरफ सुरक्षित निवेश के तौर पर सोने की मांग बनी हुई है। दूसरी तरफ अमेरिका की ब्याज दरें, डॉलर की मजबूती और सरकारी बॉन्ड पर बढ़ता रिटर्न इसके भाव पर दबाव डाल रहे हैं।

अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना प्रति औंस 5,602 डॉलर का रिकॉर्ड स्तर छू चुका है। उसके बाद भाव में बड़ी गिरावट आई है। अंदाज़ा लगाया जा रहा है कि सोना अभी 4% से 7% और नीचे जा सकता है। फिर भी केंद्रीय बैंकों की खरीद और दुनिया में चल रहे तनाव से उसे सहारा भी मिल रहा है। इसलिए सोना फिर रिकॉर्ड पर जाएगा या और सस्ता होगा, यह समझने के लिए बाजार के कुछ अहम इशारों को देखना पड़ेगा।

मांग बढ़ने की वजह यह रही कि अमेरिका की बड़ी टेक्नोलॉजी और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस कंपनियों के शेयर हाल में काफी गिरे। इसका असर सिर्फ अमेरिका तक नहीं रहा। दक्षिण कोरिया के KOSPI और जापान के Nikkei 225 जैसे एशियाई शेयर बाजार भी इसकी चपेट में आए। बिकवाली का दबाव बढ़ा तो निवेशकों ने अपना पैसा सुरक्षित रखने के लिए सरकारी बॉन्ड और सोने की ओर रुख किया।

इस बढ़ी हुई मांग से सरकारी बॉन्ड पर रिटर्न घटा और डॉलर इंडेक्स भी नीचे आया। नतीजा यह हुआ कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने को 4,150 डॉलर प्रति औंस के आसपास सहारा मिला। लेकिन अमेरिका में महंगाई के आंकड़े उम्मीद से ज़्यादा रहे और ब्याज दर बढ़ने की संभावना भी है। इसलिए जानकारों को सोने में लगातार तेज़ी आने पर शक है। अमेरिकी फेडरल रिज़र्व का सख्त रुख, मजबूत डॉलर और बॉन्ड पर बढ़ता रिटर्न सोने के सामने बड़ी रुकावट बन सकते हैं।

भारत में मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज यानी MCX पर सोना प्रति 10 ग्राम 1,76,306 रुपये तक गया था। 16 अक्टूबर तक के उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना 4,185 डॉलर प्रति औंस पर था, जो ऐतिहासिक ऊंचाई से करीब 25% नीचे है। उसी वक्त MCX पर भाव प्रति 10 ग्राम 1,45,511 रुपये था, यानी देश के बाजार में सोना ऊंचाई से करीब 17% गिरा। भारत में गिरावट कम रहने के पीछे रुपये की हालत और आयात शुल्क जैसे कारण अहम रहे हैं।

कोटक सिक्योरिटीज़ के कमोडिटी रिसर्च हेड अनिंद्य बनर्जी के मुताबिक इसी साल सोने का फिर ऐतिहासिक ऊंचाई छूना मुश्किल हो सकता है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में रिकॉर्ड स्तर पर लौटने के लिए 3 महीने से कम वक्त में भाव को करीब 34% चढ़ना होगा। मौजूदा ऊंची ब्याज दरों और बॉन्ड रिटर्न के बीच इतनी बड़ी बढ़त आसान नहीं है। इसलिए सुरक्षित निवेश की मांग के बावजूद यह मान लेना ठीक नहीं होगा कि भाव में फौरन बड़ी तेज़ी आ जाएगी। भारत में भाव रुपये के विनिमय दर और आयात शुल्क पर भी निर्भर रहेंगे।

गिरावट कितनी हो सकती है, इस पर अंदाज़ा है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में 4,100 से 4,110 डॉलर प्रति औंस सोने के लिए अहम सपोर्ट है। भाव इस स्तर के नीचे जाकर वहीं बंद हुआ तो गिरावट की आशंका बढ़ सकती है। 4,100 डॉलर का सपोर्ट टूटा तो अगला सपोर्ट 4,000 डॉलर और उसके बाद 3,880 से 3,900 डॉलर के आसपास हो सकता है। मौजूदा स्तर से यह गिरावट करीब 4% से 7% की होगी। अंतरराष्ट्रीय भाव और गिरे तो भारत में सोना प्रति 10 ग्राम 1,43,500 रुपये और फिर 1,40,000 रुपये तक आ सकता है।

ऑग्मोंट की चीफ रिसर्च ऑफिसर डॉ. रेनीशा चिनानी के मुताबिक अगर अमेरिकी फेडरल रिज़र्व ने एक से ज़्यादा बार ब्याज दर बढ़ाई, तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना 3,800 डॉलर प्रति औंस तक फिसल सकता है। भारत में इसका असर प्रति 10 ग्राम 1,36,000 से 1,37,000 रुपये के स्तर के रूप में दिख सकता है। उनका कहना है कि इससे बड़ी गिरावट की संभावना कम है।

भाव गिरने के बावजूद खरीदारों का जोश पूरी तरह ठंडा नहीं पड़ा है। सितंबर में खत्म हुई तिमाही में दुनिया भर के गोल्ड एक्सचेंज ट्रेडेड फंड यानी Gold ETF में रिकॉर्ड 31 अरब डॉलर का निवेश आया। केंद्रीय बैंक भी सोना खरीद रहे हैं। अगस्त में उन्होंने 39 टन सोना खरीदा था और दी गई जानकारी के मुताबिक सितंबर में खरीद की रफ्तार और बढ़ी। भारत जैसे देशों में त्योहारों के मौसम में गहनों और दूसरे रूपों में असली सोने की मांग भी मायने रखती है। इसलिए अंतरराष्ट्रीय बाजार में भाव गिरे हों, तब भी केंद्रीय बैंकों, निवेशकों और ग्राहकों की तरफ से मांग बनी रह सकती है।

आगे की चाल के लिए तीन इशारे अहम हैं। पहला, अमेरिकी फेडरल रिज़र्व की ब्याज दरें। अक्टूबर की FOMC बैठक में दरें न बदलने की संभावना 85% से ज़्यादा बताई गई है। अक्टूबर में दर बढ़ोतरी टली तो सोने को राहत मिल सकती है। पर दिसंबर में दर बढ़ने की संभावना 70% से ज़्यादा होने का अंदाज़ा भी जताया गया है। असली फैसले के बाद बाजार की प्रतिक्रिया अहम होगी।

दूसरा इशारा अमेरिका के 10 साल के सरकारी बॉन्ड का रिटर्न और डॉलर है। यह रिटर्न 5% के आसपास बताया गया है। रिटर्न और डॉलर इंडेक्स घटे तो सोने को सहारा मिल सकता है। उलटे, डॉलर मजबूत रहा और बॉन्ड रिटर्न बढ़ा तो सोने पर दबाव बना रह सकता है। तीसरा इशारा भू-राजनीतिक तनाव है। अमेरिका और ईरान के बीच तनाव और कच्चे तेल के बढ़े दाम दुनिया की महंगाई और बाजार के माहौल पर असर डाल सकते हैं। अनिश्चितता बढ़ी तो सुरक्षित निवेश के तौर पर सोने की मांग बढ़ सकती है। लेकिन तेल के दाम से महंगाई बढ़ी और ब्याज दरें लंबे वक्त तक ऊंची रहीं, तो सोने की बढ़त की एक सीमा बन सकती है।

निवेशकों के लिए बात यह है कि सोने के बाजार में अभी दो उलटी ताकतें काम कर रही हैं। केंद्रीय बैंकों की खरीद और दुनिया की अनिश्चितता सहारा दे रही हैं, जबकि ऊंची ब्याज दरें, मजबूत डॉलर और बॉन्ड का बढ़ता रिटर्न भाव पर दबाव डाल रहे हैं। लंबे वक्त के निवेशकों को रोज़ के उतार-चढ़ाव देखकर जल्दबाज़ी में फैसला नहीं करना चाहिए। पोर्टफोलियो में सोने को सीमित और सही मात्रा में रखने से विविधीकरण में मदद मिल सकती है, पर सोने का निवेश भी जोखिम से पूरी तरह मुक्त नहीं है।

थोड़े वक्त के सौदे करने वालों को ज़्यादा सतर्क रहना होगा, क्योंकि आने वाले दिनों में सोने के भाव में बड़े उतार-चढ़ाव हो सकते हैं। खरीदने या बेचने का फैसला करते वक्त ताज़ा बाजार भाव, अपने आर्थिक लक्ष्य और जोखिम उठाने की क्षमता को ध्यान में रखना चाहिए।

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