सोम‌वार, 2 नवंबर 2026

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शरद पवार ने बारामती से शुरू किया सूखा दौरा, चार जिलों में किसानों से मिलेंगे

शरद पवार ने बारामती से शुरू किया सूखा दौरा, चार जिलों में किसानों से मिलेंगे तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं
सियासत PT24 टीम

राष्ट्रवादी कांग्रेस (शरदचंद्र पवार) पार्टी के अध्यक्ष शरद पवार अगले तीन दिन सोलापुर, धाराशिव, बीड और अहिल्यानगर में सूखे का जायजा लेंगे। दौरे के बाद वे मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से मिलेंगे।

राज्य में बारिश न होने से खेती को बड़ा नुकसान हुआ है। कई इलाकों में पीने के पानी और मवेशियों के चारे की समस्या गंभीर हो गई है। इसी हालात को देखते हुए वरिष्ठ नेता और राष्ट्रवादी कांग्रेस (शरदचंद्र पवार) पार्टी के अध्यक्ष शरद पवार ने सूखाग्रस्त इलाकों का जायजा लेने के लिए दौरा शुरू किया है।

इस दौरे की शुरुआत बारामती से हुई है। अगले तीन दिनों में पवार सोलापुर, धाराशिव, बीड और अहिल्यानगर जिलों में जाकर वहां के हालात देखेंगे।

सूखे की मार अब सिर्फ खेती तक सीमित नहीं रही। फसलों की पैदावार घट गई है, पानी की किल्लत है, मवेशियों के लिए चारा जुटाने में दिक्कत आ रही है और किसानों पर आर्थिक बोझ भी बढ़ता जा रहा है। गांव-देहात को इन सब परेशानियों से एक साथ जूझना पड़ रहा है। इसलिए पवार किसानों के खेतों की मेड़ तक जाकर उनकी तकलीफें सीधे समझने पर जोर देंगे।

इससे पहले पवार बारामती, पुरंदर और दौंड तालुकों में सूखे की स्थिति देख चुके हैं। उस वक्त किसानों ने फसलों के नुकसान, पीने के पानी की कमी, मवेशियों के चारे और आर्थिक मदद का सवाल उठाया था। यह उम्मीद भी जताई गई थी कि सूखे की गंभीरता को देखते हुए सरकार फौरन कदम उठाए।

सूखे से परेशान किसानों को राहत दिलाने के लिए पवार मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से पहले भी कई मांगें कर चुके हैं। उन्होंने प्रभावित किसानों को प्रति हेक्टेयर एक लाख रुपये की मदद, कर्जमाफी और सूखे के मुद्दे पर विशेष अधिवेशन बुलाने की मांग की थी।

चारों जिलों के दौरे में पवार किसानों, गांव वालों और स्थानीय पदाधिकारियों से बात करेंगे। मकसद यह जानना है कि सूखा कितना गंभीर है और स्थानीय स्तर पर किस चीज की सबसे ज्यादा जरूरत है। दौरे में जो समस्याएं और किसानों की मांगें सामने आएंगी, उन्हें इकट्ठा करके पवार मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से मुलाकात करेंगे, ऐसी जानकारी है।

अब किसानों की नजर इस पर टिकी है कि सूखाग्रस्त इलाकों में उन्हें असल मदद कब मिलेगी, पानी और चारे का इंतजाम कैसे होगा और नुकसान की भरपाई को लेकर सरकार क्या फैसला लेगी।

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