पुणे में सफाई ठेकों की मियाद सिर्फ तीन महीने बढ़ी, 15 वार्ड ऑफिस के लिए नए टेंडर
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पुणे महानगरपालिका प्रशासन ने स्थायी समिति के एक साल के विस्तार को घटाकर तीन महीने कर दिया है।
पुणे, 4 नवंबर 2026: पुणे महानगरपालिका (PMC) प्रशासन ने परफॉर्मेंस पर आधारित सड़क सफाई ठेकों की मियाद सिर्फ तीन महीने के लिए बढ़ाई है। स्थायी समिति ने मौजूदा ठेकेदारों को एक साल का विस्तार देने का फैसला किया था, लेकिन प्रशासन ने उसे नहीं माना। महानगरपालिका आयुक्त ने तय किया है कि इसी अवधि में शहर के सभी 15 वार्ड ऑफिस के लिए नए सिरे से टेंडर निकाले जाएंगे और अगले एक साल के लिए नए ठेकेदार नियुक्त होंगे।
यह फैसला ऐसे वक्त आया है जब पूर्व पार्षदों ने बॉम्बे हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। उनका एतराज है कि नए टेंडर बुलाए बिना मौजूदा ठेके बढ़ाए जा रहे हैं। वे बिना प्रतिस्पर्धी बोली के विस्तार देने की वैधता पर सवाल उठा रहे हैं।
PMC ने शहर की सड़कों और सार्वजनिक जगहों की सफाई के लिए 1 अगस्त से तीन महीने का पायलट प्रोजेक्ट शुरू किया था। यह पायलट 31 अक्टूबर को खत्म हो गया। उससे पहले 30 अक्टूबर की बैठक में स्थायी समिति ने मौजूदा ठेकेदारों को एक साल का विस्तार मंजूर कर दिया था।
अतिरिक्त महानगरपालिका आयुक्त प्रजीत नायर ने कहा कि प्रशासन इन तीन महीनों में नई टेंडर प्रक्रिया पूरी करेगा और उसके बाद वाले साल के लिए ठेकेदार नियुक्त करेगा। नई व्यवस्था में PMC के हर एक वार्ड ऑफिस के लिए अलग टेंडर निकलेगा। इससे ठेकेदारों को सीधे विस्तार के बजाय प्रतिस्पर्धी बोली में हिस्सा लेना होगा।
इस बीच पूर्व विपक्ष नेता उज्ज्वल केसकर ने स्थायी समिति के प्रस्ताव में बदलाव करने पर प्रशासन से सवाल किए हैं। उनका कहना है कि स्थायी समिति एक बार प्रस्ताव मंजूर कर दे तो प्रशासन उसे अपनी मर्जी से नहीं बदल सकता। ऐसे बदलाव के लिए राज्य सरकार की इजाजत जरूरी है।
पुणे के कई हिस्सों में सड़कों की ठीक से सफाई न होने की शिकायतें बार-बार आती रही हैं। पार्षद पहले आरोप लगा चुके हैं कि ठेकेदार तय संख्या से कम सफाई कर्मचारी लगा रहे थे, जिससे सफाई की क्वालिटी पर असर पड़ा। बिना नए टेंडर के सीधे एक साल का विस्तार देने से जवाबदेही और पारदर्शिता पर भी सवाल उठे हैं।
नए टेंडर के साथ PMC ठेकेदारों के काम पर नजर रखने के लिए सख्त शर्तें लाने की तैयारी में है। भुगतान को सीधे कर्मचारियों की हाजिरी से जोड़ा जाएगा। प्रस्तावित व्यवस्था में सफाई कर्मचारियों की हाजिरी 85 फीसदी तक पहुंचे तो ठेकेदार को पूरा भुगतान मिलेगा। हाजिरी 85 फीसदी से नीचे गई तो भुगतान उसी हिसाब से घटेगा। हाजिरी 70 फीसदी से नीचे जाने पर ठेकेदार पर कार्रवाई होगी।
प्रशासन ने यह भी प्रस्ताव रखा है कि ठेकेदारों को दी जाने वाली सुपरविजन फीस मौजूदा आठ फीसदी से घटाकर छह फीसदी की जाए। साथ ही हर 25 से 30 सफाई कर्मचारियों पर एक सुपरवाइजर रखना जरूरी होगा।
नई शर्तों में ठेकेदारों को ऑनलाइन हाजिरी रिकॉर्ड रखना होगा और शिकायत निवारण के लिए अलग व्यवस्था बनानी होगी। सड़कों, सार्वजनिक जगहों, बार-बार कचरा फैलने वाली जगहों (जिन्हें क्रॉनिक स्पॉट कहा जाता है) और खाली प्लॉट की नियमित सफाई और डीप क्लीनिंग की जिम्मेदारी उन्हीं की होगी।
नागरिकों की शिकायत पर ठेकेदार को तीन दिन के अंदर जवाब देना होगा। बार-बार गड़बड़ी की वजह से ठेका रद्द करने की नौबत आए तो फैसला सात दिन में लेना होगा।
स्थायी समिति का प्रस्ताव, आयुक्त का फैसला और हाई कोर्ट में चुनौती, इन सबके बीच पुणे के परफॉर्मेंस आधारित सफाई ठेकों का भविष्य प्रशासनिक और कानूनी खींचतान में फंसा है। प्रस्तावित नई टेंडर प्रक्रिया से तय होगा कि अगले एक साल शहर की सड़कों की सफाई कैसे चलेगी।
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